राजीव जैन ने पत्र में लिखा था कि शहरों में भी समाज के लोग बर्तन बनाने एवं पकाने का काम करते हैं जिनके लिए कोई जगह उपलब्ध नहीं है, यह काम उन्हें सड़कों पर करना पड़ता है। इस कारण वायु प्रदूषण तो फैलता ही है साथ में सड़क पर भी रुकावटें खड़ी होती हैं। उन्होंने लिखा था कि अधिकांश लोग इस कार्य को छोड़ चुके थे परन्तु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान शुरू किये जाने से फिर मिटटी के बर्तनों की मांग बढ़ रही ।
मेयर जैन ने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल को भी उन्होंने सभी गांवों में जमीन देने की मांग रखी थी तब से चल रही प्रक्रिया अब जाकर सिरे चढ़ी है और जिन गाँवो में जमीन उपलब्ध हो पाई उनमें जमीन दे दी गई। उन्होंने बताया कि स्थानीय निकाय विभाग में शामिल गांवों में कुम्हार समाज के लोग पालिसी ना होने के कारण इस सुविधा से वंचित हो रहे थे, अब सरकार द्वारा मांगी गई रिपोर्ट से उम्मीद जगी है।