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10 दिन बाद भी एक गिरफ्तारी नहीं, रोहित की माँ टूट चुकी, गांव प्रशासन से जवाब मांग रहा

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बारात से लेकर सीसीटीवी तक जांच अधूरी – पंचायत बोली, अब सड़कों पर उतरने की तैयारी
 
48 घंटे का अल्टीमेटम खत्म, पुलिस के हाथ खाली – रोहित हत्याकांड में अब बड़ा आंदोलन तय
 
आईजी दफ्तर में रोहित हत्याकांड पर जवाब नहीं, पुलिस के हाथ अब भी खाली – दोनों गांवों में भारी आक्रोश
 
 
रोहतक / चंडीगढ़, 5 दिसंबर :  हुमायूंपुर और बखेता दोनों गांवों की पंचायत, सामाजिक प्रतिनिधि व रोहित धनखड़ के परिवार के सदस्य तय कार्यक्रम के अनुसार रोहतक स्थित आईजी ऑफिस पहुँचे, जहाँ उनका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रोहित धनखड़ की हत्या के मामले में आईजी रोहतक से सीधे मिलकर 48 घंटे की दी गई मोहलत पर जवाब मांगना था। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से आज आईजी ऑफिस में मौजूद ही नहीं थे। उनकी जगह पर एएसपी वाईवीआर शशि शेखर रोहतक व डीएसपी भिवानी ने पंचायत व परिजनों से मुलाकात की। पंचायत ने साफ-साफ पूछा कि आईजी की ओर से दिए गए 48 घंटे की समय-सीमा में पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की, क्या रोहित धनखड़ के हत्यारों को पकड़ा गया, क्या केस की कोई गुत्थी सुलझी, जांच किस स्तर तक पहुँची है और किस आधार पर जनता से समय माँगा गया था। इसके जवाब में पुलिस प्रशासन की ओर से सिर्फ इतना कहा गया कि घटना को अंजाम देने में इस्तेमाल हुई दो गाड़ियों को पकड़ा गया है, लेकिन वे यह नहीं बता सके कि उन गाड़ियों के ड्राइवर कौन थे, गाड़ियों पर सवार 15–20 हमलावर कौन थे, और न ही यह बता सके कि FIR में जिन लोगों के नाम दर्ज हैं, उनमें से एक भी व्यक्ति गिरफ्तार क्यों नहीं हुआ।
 
पंचायत और परिवार ने यह कड़वा सत्य मीडिया के सामने रखा कि घटना को हुए इतने दिन बीत चुके हैं, लेकिन न तो FIR में नामजद किसी आरोपी को पुलिस ने हिरासत में लिया, न ही उन 15–20 हमलावरों में से किसी एक को पकड़ा गया, जिन्होंने मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की खुलेआम हत्या कर दी। न किसी आरोपी के घर पर दबिश की ठोस जानकारी दी गई, न ही उनके परिजनों से गहन पूछताछ की गई। उल्टा पुलिस प्रशासन ने आज फिर से पंचायत से एक सप्ताह का और समय माँग लिया, जबकि पंचायत और परिवार का कहना है कि 10 दिन बीत जाने के बाद भी अगर पुलिस के हाथ एक भी पुख्ता गिरफ्तारी नहीं लगी, तो यह पुलिस प्रशासन की बहुत बड़ी नाकामी और लापरवाही है। पंचायत ने सवाल उठाया कि जब पूरा गांव, खाप और परिवार शुरुआत से ही बारात पक्ष एवं दुल्हन पक्ष के परिवारों, उनके रिश्तेदारों, उनकी कॉल डिटेल्स, उनकी लोकेशन, उनके रिश्तेदारी नेटवर्क और शादी के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच की मांग कर रहे थे, तो अब तक दूल्हा–दुल्हन पक्ष, उनके परिजनों, बारातियों और वहां मौजूद संदिग्ध युवकों से गहन पूछताछ क्यों नहीं की गई। पुलिस को खुद तकनीकी तौर पर – कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), लोकेशन ट्रैकिंग, मोबाइल डेटा, शादी स्थल के और आसपास के सीसीटीवी फुटेज, टोल प्लाजा रिकॉर्ड, रास्ते में लगे कैमरों तथा गाड़ियों की ट्रैफिक लोकेशन – इन सभी एंगल से जांच आगे बढ़ानी चाहिए थी, लेकिन आज भी पुलिस सिर्फ दो गाड़ियों की बरामदगी तक ही बात सीमित करके बैठी है।
 
परिवार द्वारा बार-बार जिन हमलावरों के नाम , पूरी घटना , संदिग्ध लोगों, शादी में शामिल परिवारों और रिश्तेदारों के बारे में जानकारी दी गई, आज आईजी दफ्तर में पुलिस ने वही बातें सुनकर कहा कि “हमने आपके ये पॉइंट नोट कर लिए हैं, अब हम इस एंगल से भी जांच करेंगे।” यह अपने आप में बेहद गंभीर और चिंताजनक बात है कि यदि परिवार और पंचायत खुद जांच के एंगल बताएंगे, तभी पुलिस फाइल आगे बढ़ाएगी, अन्यथा नहीं – क्या यही एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की हत्या के मामले में पुलिस जांच का मानक तरीका है? पंचायत ने यह भी सवाल उठाया कि 15–20 हमलावरों ने जिस शादी में हुड़दंग, गाली-गलौच और बदतमीजी की, जिसके खिलाफ रोहित ने सिर्फ इतना कहा कि “हुड़दंग मत करो, लड़कियों के आगे इस तरह की हरकत मत करो”, क्या उस शादी के घर-परिवार और मेहमानों से पुलिस ने विस्तृत पूछताछ की, उनके बयान लिखित में दर्ज किए, और सीसीटीवी व मोबाइल वीडियो से उनकी पहचान पक्की की? अगर पुलिस अब तक इतनी बुनियादी जांच भी नहीं कर पाई, तो यह जांच नहीं, बल्कि न्याय से खुला खिलवाड़ है।
 
ग्रामवासियों, पंचायत और खाप प्रतिनिधियों का यह भी कहना है कि अब इस पूरे मामले में कहीं न कहीं राजनीतिक दबाव, ऊँचे पदों से प्रभाव, या किसी उच्च अधिकारी के इशारे पर जांच प्रक्रिया को जानबूझकर धीमा या प्रभावित किए जाने की आशंका लगातार गहरी होती जा रही है। जिस प्रकार 10 दिन बीत जाने के बाद, 48 घंटे के आईजी आश्वासन के बाद भी एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई, नामजद आरोपियों तक पहुंचने के साधारण और प्रारंभिक कदम भी नहीं उठाए गए, शादी में उपस्थित परिजनों व संदिग्धों से पूछताछ तक नहीं की गई—यह सब संकेत देता है कि कहीं पर्दे के पीछे से इस केस को कमजोर करने का दबाव तो नहीं बनाया जा रहा। पंचायत और ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि जांच में इतनी गंभीर चूकें और देरी केवल लापरवाही के कारण नहीं, बल्कि किसी दबाव, संरक्षण या मिलीभगत के चलते हो रही है, तो यह लोकतंत्र और न्याय की आत्मा को चोट पहुँचाने जैसा अपराध है। ग्रामीणों और पंचायत ने जोर देकर कहा कि वे इस दिशा में भी कड़े सवाल उठाएँगे कि आखिर किसके प्रभाव में पुलिस प्रशासन कदम पीछे खींच रहा है, किन कारणों से आरोपी खुले घूम रहे हैं, और क्यों न्याय प्रक्रिया को जंजीरों में बाँधकर रखा गया है। उनका साफ कहना है कि अगर जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की सांठगांठ, संरक्षण या राजनीतिक हस्तक्षेप साबित हुआ, तो यह संघर्ष और भी बड़ा रूप लेगा और इस देश की न्यायिक व्यवस्था के सामने एक सवाल खड़ा करेगा कि क्या एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की हत्या को दबाया जा सकता है।
 
पंचायत और रोहित धनखड़ के परिवार ने आज आईजी रोहतक के नाम एक औपचारिक आवेदन भी प्रशासन को सौंपा, जिसमें स्पष्ट मांग की गई है कि केस को भिवानी की वजह रोहतक प्रशासन को दिया जाए । आवेदन में कहा गया है कि जांच रोहतक के सीआईए (Crime Investigation Agency) स्टाफ को हैंडओवर किया जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले व्यक्तियों, राजनीतिक दबाव, रिश्तेदारी नेटवर्क और प्रशासनिक दखल से दूर एक निष्पक्ष और ठोस जांच सुनिश्चित हो सके।
 
रोहित की माँ संतोष कई बार कह चुकी हैं कि “अगर मेरे बेटे के हत्यारों को सज़ा नहीं मिली, तो मेरे जीने का कोई मतलब नहीं।” परिवार को डर है कि यह निराशा कहीं आत्महत्या की कोशिश में न बदल जाए; इसी वजह से परिवार ने घर में महिलाओं की ड्यूटी अलग-अलग लगाई हुई है, कोई ना कोई हर समय रोहित की माँ और उसकी बहन के पास रहती है, ताकि वह भावुक होकर कोई गलत कदम न उठा लें। परिवार ने साफ कहा कि अगर प्रशासन की इस सुस्ती और लापरवाही की वजह से मानसिक रूप से टूट चुकी रोहित की माँ, उसकी बहन या कोई भी परिवार का सदस्य खुदकुशी जैसा कोई कदम उठाने पर मजबूर हुआ, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी हरियाणा सरकार और पुलिस प्रशासन की होगी, क्योंकि वे समय रहते न्याय और सुरक्षा देने में विफल रहे हैं।
 
दोनों गांवों में इस समय माहौल बेहद संवेदनशील और आक्रोश से भरा हुआ है। पंचायतों का कहना है कि यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, पूरे क्षेत्र के आत्मसम्मान पर हमला है – एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी, जिसने अपनी पहचान मेहनत और अनुशासन से बनाई, जिसने शादी में लड़कियों के सम्मान में सिर्फ इतना कहा कि “गाली-गलौज और हुड़दंग मत करो”, उसी को पीट-पीटकर मार दिया गया और 10 दिन बाद भी, 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद भी, पुलिस के हाथ खाली हैं। यह स्थिति पुलिस की जांच क्षमता, इच्छा शक्ति और प्रशासनिक जिम्मेदारी – सभी पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। पुलिस यदि शुरू से ही तकनीकी और ज़मीनी स्तर पर तेज़ी से जांच करती, बारात और दुल्हन पक्ष के रिश्तेदारों, शादी के आयोजकों, पंडाल संचालकों, गाड़ी मालिकों व ड्राइवरों और वहां मौजूद संदिग्ध युवकों से पूछताछ करती, तो आज तक कई कड़ियाँ जुड़ चुकी होतीं। लेकिन आज की बैठक ने साफ कर दिया कि पुलिस ने उन बुनियादी कदमों को भी अभी तक गंभीरता से नहीं उठाया, जिनकी अपेक्षा एक आम नागरिक भी ऐसे जघन्य हत्याकांड में करता है।
 
आईजी से न मिल पाने और पुलिस की असंतोषजनक जवाबदेही देखकर पंचायत, धनखड़ 12 के सभी गांव, हरियाणा धनखड़ खाप, राष्ट्रीय धनखड़ खाप, अन्य खापों के प्रधान, सामाजिक संगठन और रोहित का परिवार अब इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि सिर्फ भरोसे और इंतज़ार से न्याय नहीं मिलेगा। पंचायत ने स्पष्ट कहा है कि अब गांव जाकर सभी ग्रामवासियों, खाप प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को आज की स्थिति से अवगत कराया जाएगा और एक बड़ी, सामूहिक रणनीति तैयार की जाएगी। इसमें शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक आंदोलन, धरना, सड़क पर उतरकर विरोध, लंबे समय तक चलने वाले जन-अभियान और जरूरत पड़ने पर उच्च स्तर – यहाँ तक कि अदालतों और राष्ट्रीय मंचों – तक जाने के विकल्प शामिल होंगे। पंचायत और परिवार का कहना है कि वे कानून और संविधान की मर्यादा के भीतर रहकर लड़ाई लड़ेंगे, लेकिन अब पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है; पुलिस और प्रशासन को पर्याप्त समय दिया जा चुका है, अब “वक्त” नहीं, “न्याय” चाहिए।
 
रोहित धनखड़ के परिवार, दोनों गांवों की पंचायतों और खाप प्रतिनिधियों ने मीडिया व पूरे समाज से अपील की है कि वे इस मामले को सिर्फ एक खबर समझकर आगे न बढ़ जाएँ, बल्कि इसे उस अन्याय की मिसाल समझें, जो कल किसी और घर के बेटे, भाई या खिलाड़ी के साथ भी हो सकता है। यह लड़ाई सिर्फ रोहित के लिए नहीं, बल्कि हर उस युवा की सुरक्षा और सम्मान के लिए है, जो आज भी इस उम्मीद से मेहनत करता है कि उसका समाज और उसकी व्यवस्था उसके साथ खड़ी होगी। रोहित अब वापस नहीं आएगा, लेकिन यदि उसके हत्यारों को सख्त सज़ा मिली, तो कम-से-कम यह समाज को यह संदेश देगा कि “इस मिट्टी का बेटा बेइंसाफी के साथ नहीं मारा जाएगा।”
 
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