चंडीगढ़, 1 दिसंबर। पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना की स्टेकहोल्डर्स मीट आज संगम ऑडिटोरियम, एमजीएसआईपीए, सेक्टर 26 में आयोजित हुई, जिसमें शहर के निवासियों की उत्साही भागीदारी देखने को मिली। बैठक में 80 से अधिक आरडब्ल्यूए सदस्य शामिल हुए। शहर की दो प्रमुख आरडब्ल्यूए महासंघ— FOSWAC और CRAWFED के पदाधिकारी, जिनमें FOSWAC के अध्यक्ष और CRAWFED के वरिष्ठ पदाधिकारी भी शामिल थे, सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। यह मंच जन चिंताओं को रखने, हितधारकों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा योजना के लाभों के व्यापक प्रसार का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना।
बैठक की अध्यक्षता श्री सौरभ कुमार, आईएफएस, सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा नवीकरणीय ऊर्जा ने की। पैनल में श्री नवीन कुमार श्रीवास्तव, आईएफएस, निदेशक (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं नवीकरणीय ऊर्जा); श्री अरुण वर्मा, निदेशक सीपीडीएल; श्री प्रमोद मिश्रा, सीटीओ सीपीडीएल; श्री सुखविंदर अब्रोल, परियोजना निदेशक क्रेस्ट; तथा श्री अभिषेक चौधरी शामिल थे। आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों, सूचीबद्ध सोलर वेंडरों तथा सीएचबी, एमसी और इंजीनियरिंग विभाग सहित विभिन्न प्रशासनिक विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके पश्चात क्रेस्ट और सीपीडीएल ने पीएमएसजी–एमबीवाई योजना की विशेषताओं और लाभों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। उपस्थितजनों को बताया गया कि प्रक्रिया को सरल बनाने और सब्सिडी जारी करने में तेजी लाने हेतु अनेक पहलें की गई हैं। सफलता कथाओं में बताया गया कि वर्ष के पहले नौ महीनों में 673 में से 148 उपभोक्ता पीएमएसजी योजना के अंतर्गत शून्य बिजली बिल प्राप्त कर रहे हैं। क्रेस्ट एवं सीपीडीएल ने वित्तीय लाभ एवं उपभोक्ता सुविधाओं पर स्पष्ट जानकारी प्रस्तुत की।
प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया…
• पाँच वर्ष से कम की पे–बैक अवधि एवं दीर्घकालिक आर्थिक लाभ
• राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी एवं समयबद्ध आवेदन प्रक्रिया
• सब्सिडी लाभ, नेगेटिव बिलिंग और बैंक-यूनिट सेटलमेंट; लगभग 20% उपभोक्ता पहले से शून्य बिल पा रहे हैं
• मीटर परीक्षण शुल्क में छूट और पीपीए हस्ताक्षर की डिजिटल प्रक्रिया
• निरीक्षण प्रक्रिया में तेजी एवं उपभोक्ता सेवाओं में सुधार
….प्रमुख नीतिगत मुद्दे उजागर
नागरिक समाज के सदस्यों ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) रूफ-राइट मुद्दे को तत्काल नीति हस्तक्षेप की आवश्यकता वाला गंभीर विषय बताया, जिसके कारण लगभग 60,000 सीएचबी फ्लैटों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने में बाधा आ रही है। पावर ऑफ अटॉर्नी अथवा अन्य वैकल्पिक दस्तावेजों को इंस्टॉलेशन हेतु मान्य मानने का मुद्दा भी उठाया गया।
संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र—निवासियों ने बिलिंग, तकनीकी एवं प्रक्रिया संबंधी समस्याएँ रखीं।खुले सत्र में निवासियों ने निम्न चिंताएँ व्यक्त कीं….
सेक्टर-वार आरडब्ल्यूए बैठकों के बजाय शीघ्र उपभोक्ता सुनवाई आयोजित करने की आवश्यकता
बैंक्ड यूनिट्स, कैरी-फ़ॉरवर्ड व्यवस्था और सेटलमेंट संबंधी स्पष्टीकरण
अधिक बिलिंग और बिल सुधार में देरी की शिकायतें
पीपीए शर्तों, लोड एन्हांसमेंट शुल्क, एसीडी प्रविष्टियों और अन्य बिलिंग संबंधित प्रश्न
मीटर परीक्षण में देरी और लंबित सब्सिडी जारी होने में विलंब
एक भवन में बहु-विद्युत कनेक्शन होने पर सोलर इंस्टॉलेशन में कठिनाइयाँ
सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं नवीकरणीय ऊर्जा का व्यापक जन-जागरूकता पर जोर
सचिव महोदय ने योजना के लाभ पात्र उपभोक्ताओं तक पहुँचाने हेतु इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, सोशल मीडिया, डोर-टू-डोर अभियान, कार्यशालाएँ और बैठकों सहित विभिन्न माध्यमों का उपयोग करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पीएम सूर्यघर राष्ट्र की एक महत्त्वपूर्ण फ्लैगशिप योजना है और इसके व्यापक लाभ चंडीगढ़ के प्रत्येक नागरिक तक पहुँचने चाहिए, ताकि चंडीगढ़ वास्तव में एक मॉडल सोलर सिटी बन सके और 100% नवीकरणीय ऊर्जा संचालित शहर के लक्ष्य को प्राप्त कर सके।
क्रेस्ट और सीपीडीएल ने पुनः आश्वासन दिया कि वे उपभोक्ता अनुभव को सरल बनाने, निरीक्षण, बिल सुधार एवं सब्सिडी जारी करने की प्रक्रिया में तेजी, डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने, स्थापना प्रक्रिया के दौरान निरंतर सहयोग प्रदान करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। बैठक का समापन चंडीगढ़ को 100% रूफटॉप सोलर कवरेज की दिशा में सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।