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हिंदी-विभाग द्वारा नवम गुरु श्री तेग बहादुर जी को समर्पित एक दिवसीय राष्ट्रीय व्याख्यान का आयोजन

चंडीगढ़, 28 नवंबर। पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के हिंदी विभाग द्वारा हिंदी साहित्य परिषद द्वारा नवम गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350 वें शहीदी पर्व को समर्पित एक दिवसीय व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय था “हिंद की चादर: श्री गुरु तेग बहादुर”।
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चंडीगढ़, 28 नवंबर। पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के हिंदी विभाग द्वारा हिंदी साहित्य परिषद द्वारा नवम गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350 वें शहीदी पर्व को समर्पित एक दिवसीय व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय था “हिंद की चादर: श्री गुरु तेग बहादुर”।
 
 
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अशोक कुमार (सह आचार्य हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्विद्यालय, धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश) उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. कुलदीप सिंह (अध्यक्ष, पंजाबी विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र) तथा विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ. अमरदीप कौर (सहायक आचार्य, पंजाबी विभाग, एम. सी.एम. डी.ए. वी. कॉलेज फॉर विमेन, सेक्टर- 36, चंडीगढ़) तथा डॉ. विनोद कुमार ( सहायक आचार्य, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़) उपस्थित रहे।
 
 
कार्यक्रम के आरंभ में हिंदी-विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के अध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार तथा संकाय सदस्य डॉ. विनोद कुमार द्वारा अतिथि गण का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया। विभागाध्यक्ष महोदय ने कहा कि गुरु तेग बहादुर विश्व गुरु हैं, जिन्होंने मानवीय मूल्यों, आदर्शो एवं सिद्धांतों की रक्षा हेतु प्राणों की आहुति दी। 
 
 
विशिष्ट वक्ता डॉ. अमरदीप कौर ने कहा कि गुरु तेग बहादुर बचपन से ही त्यागी प्रवृत्ति के थे। उनकी जीवन दृष्टि समन्वयवादी थी जिसमें भक्ति तथा शक्ति का समन्वय है। उनकी शहादत मानव धर्म को समर्पित है।
 
 
मुख्य वक्ता प्रो. कुलदीप सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी को आज पूरा विश्व याद कर रहा है। इसका कारण यह है कि उन्होंने भाईचारे, आत्म निरीक्षण, ज्ञान-परम्परा, मानवता का प्रसार किया। उनका साहित्य साहित्यकारों को उत्कृष्ठ साहित्य रचना की प्रेरणा देता है। उनका जीवन स्वहित को त्यागकर परहित हेतु समर्पित होने की प्रेरणा देता है।
 
 
विशिष्ट वक्ता डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि गुरु तेग बहादुर गुरु परंपरा, मानवता, सेवा भाव, त्याग के उद्घोषक हैं। वे आध्यात्म, ज्ञान तथा सत्य के शोधक थे। उनका जीवन विध्वंश के स्थान पर निर्माण का उदाहरण है। मुख्य अतिथि डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का जीवन भौतिकवादी समय में जीवन को नैतिक बनाए रखने की प्रेरणा देता है। इसके पश्चात अतिथि गण को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
 
 
कार्यक्रम के अंत में प्रो. अशोक कुमार ने उपस्थित सभी का धन्यवाद करते हुए कहा कि गुरु तेगबहादुर हिन्द की एक ऐसी चादर हैं जिसकी ओट में आज मानवता, नैतिकता और सदाचार के मूल्य हमारे समाज में जीवित है। उनकी इस विरासत को आज की युवा पीढ़ी को संजोए रखने की आवश्यकता है।
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