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विधान परिषद चुनाव में हार के बाद महायुति में घमासान, शिंदे की शिवसेना पर आरोप

पांच में से तीन सीटें गंवाने के बाद भाजपा ने सहयोगी दल को घेरा, तो शिंदे गुट ने सरकार के खिलाफ नाराजगी का हवाला देकर मुख्यमंत्री बदलने की मांग उठाई।

राहुल गुप्ता

मुंबई, 29 अक्टूबर। महाराष्ट्र विधान परिषद की शिक्षक और पदवीधर निर्वाचन क्षेत्रों की पांच सीटों के नतीजों के बाद महायुति में आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। चुनाव में महायुति को तीन सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। भाजपा को दो सीटें गंवानी पड़ीं, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को एक सीट पर हार मिली। एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने अमरावती शिक्षक सीट पर जीत दर्ज की। इन नतीजों के बाद भाजपा और शिंदे गुट के बीच मतभेद सामने आने लगे हैं।

भाजपा प्रवक्ता ने शिंदे गुट को ठहराया जिम्मेदार

भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर चुनावी हार के लिए शिंदे की शिवसेना को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अगर शिवसेना ने महायुति के धर्म का पालन करते हुए भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का सहयोग किया होता, तो गठबंधन पांचों सीटें जीत सकता था।

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नवनाथ बन के मुताबिक, पुणे की एक सीट हासिल करने की कोशिश में शिवसेना ने अपने सहयोगी दलों को मुश्किल में डाल दिया, जिससे महायुति तीन सीटों पर जीत का मौका गंवा बैठी।

शिंदे गुट का पलटवार, सरकार के प्रति नाराजगी का दावा

भाजपा के आरोपों पर शिंदे गुट के नेता रवींद्र धंगेकर ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जब सरकार को लेकर मतदाताओं के मन में संदेह और नाराजगी पैदा होती है, तो इस तरह के नतीजे सामने आते हैं। उन्होंने भाजपा की ओर से शिवसेना पर हार का ठीकरा फोड़ने को गलत बताया।

धंगेकर ने कहा कि शिक्षकों के मतदान से सरकार के प्रति नाराजगी दिखाई दे रही है और नेतृत्व को इसकी गंभीरता से समीक्षा करनी चाहिए।

एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाने की मांग

रवींद्र धंगेकर ने कहा कि जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे, तब भाजपा और शिवसेना की सत्ता आई थी। उन्होंने राज्य में नेतृत्व की जिम्मेदारी फिर से एकनाथ शिंदे को सौंपने और उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग की।

धंगेकर ने नवनाथ बन पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बात चुनाव से पहले समझनी चाहिए थी। उन्होंने राज्य के नेतृत्व में बदलाव की जरूरत बताई और देवेंद्र फडणवीस की जगह एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाने की मांग दोहराई।

विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद महायुति के भीतर शुरू हुई यह बयानबाजी राज्य सरकार के नेतृत्व को लेकर नए राजनीतिक विवाद का संकेत दे रही है।

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