पंजाब विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में विधान सभा अध्यक्ष ने बताई गुरु रविदास जी की विचारधारा की प्रासंगिकता
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 24 अक्तूबर। हरियाणा विधान सभा के अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की शिक्षाएं आज भी समाज को समानता, सामाजिक समरसता और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। उनकी विचारधारा भेदभाव से मुक्त समाज की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करती है। गुरु रविदास जी ने अपने विचारों और रचनाओं के माध्यम से मानव मात्र की समानता, श्रम की गरिमा, बंधुत्व और सामाजिक न्याय का संदेश दिया। उनकी शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी उनके समय में थीं।
विधान सभा अध्यक्ष शनिवार को पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के हिंदी विभाग की ओर से संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के 650वें जन्म दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी का विषय ‘संत रविदास: परंपरा, प्रतिरोध और परिवर्तन की चेतना‘ था। इसमें देश-विदेश के विद्वानों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों और शोधार्थियों ने गुरु रविदास जी की विचारधारा तथा भारतीय समाज पर उनके व्यापक प्रभाव के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।
विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि संत रविदास जी का जीवन और दर्शन हमें यह सिखाता है कि मनुष्य की पहचान उसकी जाति, वर्ग अथवा सामाजिक पृष्ठभूमि से नहीं, बल्कि उसके विचारों, कर्मों और मानवीय मूल्यों से होनी चाहिए। समाज में प्रत्येक व्यक्ति को समान सम्मान और अवसर मिलना चाहिए। गुरु रविदास जी ने ऐसी सामाजिक व्यवस्था की कल्पना की, जिसमें किसी के साथ भेदभाव न हो और प्रत्येक व्यक्ति सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर सके। जो संत भक्ति करते हैं उनकी द्वारा दी गई शिक्षाएं जीवन में आत्मसात करने योग्य होती है। संत कहते हैं कि कुछ भी बने लेकिन अच्छे इंसान अवश्य बनना। जीवन में संयमित परिश्रम करने का अभ्यास करने की सीख भी संत देते हैं। हमें जीवन में जोड़ने वाला बनना है, तोड़ने वाला नहीं। उन्होंने चिड़ियां की कहानी सुनाते हुए कहा कि हमें आग बुझाने वाला बनना है।
उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी की वाणी में सामाजिक परिवर्तन की चेतना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने रूढ़ियों और सामाजिक विषमताओं के विरुद्ध अपनी आवाज उठाते हुए प्रेम, सद्भाव और समानता पर आधारित समाज का संदेश दिया। उनकी शिक्षाएं हमें आत्मचिंतन करने के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग भी बनाती हैं। उनके विचारों को केवल पढ़ना या सुनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और सामाजिक जीवन में अपनाना भी आवश्यक है।
विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि गुरु रविदास जी का प्रसिद्ध आदर्श ‘बेगमपुरा‘ एक ऐसे समाज की परिकल्पना प्रस्तुत करता है, जहां दुख, भय, भेदभाव और सामाजिक असमानता के लिए कोई स्थान न हो। उनकी वाणी में कहा गया है कि “ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिलै सबन को अन्न। छोट-बड़ो सब सम बसैं, रैदास रहै प्रसन्न॥” यह विचार आज भी न्यायपूर्ण, समावेशी और संवेदनशील समाज के निर्माण के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके दर्शन की वास्तविक सार्थकता इसी में है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के सम्मान, अधिकारों और गरिमा का आदर करे।
उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी की शिक्षाएं लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक आदर्शों के अनुरूप हैं। समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और सामाजिक न्याय जैसे मूल्य एक सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला हैं। इन मूल्यों को मजबूत करने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी भूमिका निभानी होगी। जनप्रतिनिधियों, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी है कि वे महापुरुषों की शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं और उन्हें अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करें। हम एक राष्ट्र एक विधान की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि संत रविदास जी की 650वीं जयंती का अवसर उनके विचारों को व्यापक स्तर पर समझने और आत्मसात करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को महापुरुषों के विचारों से अवगत करवाना आवश्यक है। तभी हम देश का संतुलित विकास कर पाएंगे। देश की प्रगति संतों के विचारों व मूल्यों के बिना संभव नहीं है। संविधान हमें अधिकार देता है तो महापुरुषों के विचार हमें चरित्र देते हैं। हम कितने भी बड़े पद पर चले जाए लेकिन हमारे अंदर अगर चारित्रिक गुण या सेवा भाव नहीं है तो सब व्यर्थ हैं। युवा पीढ़ी ही देश का भविष्य हैं, सभी भावी कर्णधार इन्हीं युवाओं में से बनेंगे।
ऐसे आयोजन न केवल भारतीय संत परंपरा की समृद्ध विरासत से परिचित कराते हैं, बल्कि समकालीन सामाजिक चुनौतियों पर विचार करने और उनके समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं। सोशल मीडिया में सूचनाओं का प्रवाह और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण गलत जानकारी मिल सकती है। ऐसे में युवाओं को सचेत रहने की जरूरत है। इस अवसर पर सोनीपत डॉ. बी आर अंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो देविंदर सिंह, पीयू में हिन्दी विभाग अध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार, डॉ. गुरमीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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