1984 के सिख-विरोधी नरसंहार के पीड़ितों को न्याय दिलाना राजनीति नहीं, हमारा कर्तव्य है – मुख्यमंत्री
जिनके शासनकाल में बूथ कैप्चरिंग के आरोप सामने आए, वही आज वोट चोरी का शोर मचा रहे हैं – मुख्यमंत्री
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 24 अक्टूबर। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस के पास SIR के विरोध में रैली करने के लिए वर्ष के 365 दिन थे, लेकिन 1 नवंबर की तारीख चुनने पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर दल को अपनी बात रखने का अधिकार है, और हम उसका सम्मान करते हैं। लेकिन कांग्रेस ने आखिर इसी तारीख को क्यों चुना ? 1 नवंबर 1984 वही तारीख है, जब दिल्ली में सिख-विरोधी हिंसा का भयावह दौर शुरू हुआ था। हजारों सिख परिवारों ने अपने प्रियजन खोए, और वह पीड़ा आज भी उनके मन में जीवित है। तारीखें केवल कैलेंडर में नहीं, देश की स्मृति में भी दर्ज होती हैं। फिर ठीक वही दिन क्यों चुना गया, जो सिख समाज की सबसे पीड़ादायक स्मृति से जुड़ा है? जिस दिन सिख समाज अपने शहीदों को याद कर सिर झुकाता है, उस दिन कांग्रेस मंच सजाकर नारे लगाएगी? यदि यह संयोग है, तो कांग्रेस को खुलकर कहना चाहिए और सिख समाज की भावनाओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। यदि यह संयोग नहीं है, तो यह और भी गंभीर विषय है। दोनों ही स्थितियों में जवाबदेही कांग्रेस की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 नवंबर सिख समाज के लिए शोक और स्मरण का दिन है। उस दिन राजनीतिक नारों और शोर से उन यादों पर पर्दा डालने का प्रयास हो, तो प्रश्न उठना स्वाभाविक है। 1984 के पीड़ितों के प्रति हमारी भावना राजनीति की नहीं, संवेदना और कर्तव्य की है। पीड़ितों के साथ खड़ा होना कोई उपकार नहीं, यह हमारा धर्म है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2015 में विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर 1984 के बंद पड़े मामलों की दोबारा जांच का रास्ता खोला गया। इसी प्रक्रिया के तहत कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा हुई। उन्होंने कहा कि जब वर्षों से बंद पड़ी फाइलें खुलीं, तभी पीड़ितों के लिए न्याय की उम्मीद भी मजबूत हुई।
उन्होंने कहा कि करतारपुर साहिब कॉरिडोर के खुलने से संगत की दशकों पुरानी अरदास पूरी हुई। साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने के लिए 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ घोषित किया गया। वहीं, सेवा भोज योजना के तहत गुरुद्वारों के लंगर पर लगने वाले GST की प्रतिपूर्ति की व्यवस्था भी की गई। ये कदम सिख समाज की आस्था, सेवा और बलिदान की परंपरा के प्रति सम्मान को दर्शाते हैं।
हरियाणा में 1984 की हिंसा के पीड़ित 121 परिवारों को सरकारी नौकरी देने का निर्णय उनके सम्मानजनक पुनर्वास की दिशा में कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा में भी 1984 की हिंसा ने गहरे जख्म दिए थे। प्रदेश में 121 लोगों की जान गई, जबकि 20 गुरुद्वारों, 221 घरों, 154 दुकानों और 57 कारखानों को जला दिया गया। इन परिवारों की क्षति की भरपाई कोई भी कदम पूरी तरह नहीं कर सकता, लेकिन सरकार ने उनके प्रति अपना दायित्व समझते हुए विधानसभा में निर्णय लिया कि इन 121 परिवारों के सदस्यों को सरकारी नौकरी दी जाएगी, ताकि वे सम्मान के साथ अपना जीवन आगे बढ़ा सकें।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों को दशकों तक अपने अधिकारों और न्याय के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ी, उनके प्रति संवेदनशीलता दिखाना सरकार का कर्तव्य है। सिख समाज की पीड़ा को समझना और उसके इतिहास तथा बलिदान का सम्मान करना आवश्यक है।
सरदार त्रिलोचन सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके नेता हैं। उनके द्वारा सार्वजनिक रूप से हथियारों के साथ बूथ कैप्चरिंग के लिए भेजे जाने संबंधी कथन ने गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। कांग्रेस नेतृत्व को इस बयान पर अपना स्पष्ट पक्ष रखना चाहिए और देश को बताना चाहिए कि वह अपने ही नेता के कथन को स्वीकार करता है या उसका खंडन करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह किसी विपक्षी दल की ओर से लगाया गया आरोप भर नहीं है, बल्कि कांग्रेस से जुड़े रहे नेता का सार्वजनिक कथन है। लोकतंत्र में ऐसे गंभीर सवालों का जवाब देना राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। कांग्रेस को सफाई देने के बजाय स्पष्ट करना चाहिए कि उसके नेता ने जो कहा, उस पर पार्टी का क्या रुख है।
SIR पर कांग्रेस के आरोप दोहरा मापदंड
मुख्यमंत्री ने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कोई नई प्रक्रिया नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत निर्वाचन आयोग को मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का अधिकार प्राप्त है। स्वतंत्रता के बाद विभिन्न वर्षों में गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया अपनाई गई, जिनमें से कई कांग्रेस के शासनकाल में हुए। ऐसे में जिस प्रक्रिया को पहले स्वीकार किया जाता रहा, उसी पर आज वोट चोरी का आरोप लगाना कांग्रेस के दोहरे मापदंड को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि मृत, स्थानांतरित और दोहरे नामों को हटाकर मतदाता सूची को शुद्ध करना निष्पक्ष चुनावों के लिए आवश्यक है। किसी भी पात्र नागरिक को अपने मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए और मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं। पात्र नागरिक फॉर्म-6, बूथ स्तर अधिकारी (BLO) अथवा वोटर हेल्पलाइन ऐप के माध्यम से अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती पारदर्शी और विश्वसनीय मतदाता सूची पर निर्भर करती है। चुनाव जनता के वोट से जीते जाते हैं, किसी दबाव या हथियार के बल पर नहीं। इसलिए कांग्रेस को SIR पर सवाल उठाने से पहले अपने शासनकाल और अपने नेताओं के बयानों से जुड़े प्रश्नों का भी जवाब देना चाहिए।
मोहब्बत की दुकान’ के नारे पर मुख्यमंत्री का सवाल—1984 के पीड़ितों के दर्द के लिए कांग्रेस के पास क्या जवाब है ?
मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी के ‘मोहब्बत की दुकान’ के नारे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मोहब्बत और भाईचारे की बात करना अच्छी बात है, लेकिन इसकी वास्तविक परीक्षा आचरण और जवाबदेही से होती है। कांग्रेस को बताना चाहिए कि उसकी ‘मोहब्बत की दुकान’ में 1984 के पीड़ित परिवारों के दर्द के लिए क्या स्थान है और अपने ही सिख नेता के गंभीर बयान पर पार्टी नेतृत्व मौन क्यों है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को तीन सवालों के स्पष्ट जवाब देने चाहिए। पहला, SIR के विरोध में रैली के लिए 1 नवंबर की तारीख ही क्यों चुनी गई? दूसरा, सरदार त्रिलोचन सिंह के बूथ कैप्चरिंग संबंधी बयान पर कांग्रेस नेतृत्व का क्या पक्ष है? तीसरा, वोट चोरी का आरोप लगाने से पहले कांग्रेस अपने पुराने चुनावी तौर-तरीकों और अपने शासनकाल से जुड़े सवालों का जवाब क्यों नहीं देती ?
मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास पर पर्दा डालने से सच्चाई नहीं बदलती और राजनीतिक नारों से अतीत के सवाल समाप्त नहीं होते। 1984 के पीड़ितों की स्मृतियों, उनके संघर्ष और उनके साथ हुए अन्याय को भुलाया नहीं जा सकता। सिख समाज की भावनाओं का सम्मान करना और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के प्रयास जारी रखना हम सबका दायित्व है। कांग्रेस को भी इन गंभीर सवालों पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।
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