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MGNREGA : “नाम बदलने के साथ रोजगार देने वाले प्रावधान भी बदले”, हरपाल चीमा ने केंद्र पर उठाए सवाल

Harpal Singh Cheema speaks on MGNREGA and rural employment issues in Punjab Harpal Singh Cheema speaks on MGNREGA and rural employment issues in Punjab
Harpal Singh Cheema speaks on MGNREGA and rural employment issues in Punjab

MGNREGA में बदलाव को लेकर हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा
उन्होंने ग्रामीण रोजगार घटने का दावा करते हुए 9.56 करोड़ कम दिहाड़ी का आंकड़ा बताया

न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़ । पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने ग्रामीण रोजगार योजना में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि MGNREGA का नाम बदलने के साथ रोजगार उपलब्ध कराने वाले कई प्रावधानों में भी बदलाव हुए हैं। चीमा ने कहा कि इसका असर ग्रामीण मजदूरों, गरीब परिवारों और वंचित समुदायों पर पड़ रहा है। उनके बयान को लेकर ग्रामीण रोजगार योजना फिर राजनीतिक चर्चा में है।

MGNREGA से VB-G RAM G तक बदला ढांचा

केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2026 से Viksit Bharat–Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) यानी VB-G RAM G Act लागू किया है। इसके साथ MGNREGA, 2005 को समाप्त किया गया। केंद्र सरकार के अनुसार नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी है। सरकार ने इसे ग्रामीण आजीविका और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाली व्यवस्था बताया है।

हरपाल सिंह चीमा ने हालांकि इस बदलाव को अलग नजरिये से देखा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार लगातार यह बताती रही कि केवल योजना का नाम बदला गया है। उनके अनुसार रोजगार पैदा करने वाले कई हिस्सों में बदलाव किए गए हैं। चीमा ने दावा किया कि इससे ग्रामीण मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर कम हुए हैं।

Rural Employment में 9.56 करोड़ दिहाड़ी कम होने का दावा

चीमा ने पत्रकारवार्ता में रोजगार से जुड़े आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष करीब 9.56 करोड़ कम person-days का रोजगार पैदा हुआ। उनके मुताबिक पिछले वर्ष यह संख्या लगभग 30 करोड़ थी। इस वर्ष यह आंकड़ा करीब 20.4 करोड़ रह गया है। यह आंकड़ा उन्होंने ग्रामीण श्रमिकों को उपलब्ध रोजगार में गिरावट के रूप में पेश किया।

हालांकि ये आंकड़े चीमा द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताए गए हैं। इन्हें उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों के प्रभाव से जोड़कर देखा। उपलब्ध रिपोर्टों में इन आंकड़ों का संदर्भ मौजूदा अवधि के ग्रामीण रोजगार से दिया गया है। इसलिए इन्हें पूर्ण वित्तीय वर्ष के अंतिम आंकड़े के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

Rural Workers पर असर का सवाल

चीमा ने कहा कि रोजगार में कमी का सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण मजदूर परिवारों पर पड़ सकता है। उन्होंने विशेष रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों का उल्लेख किया। चीमा के अनुसार योजना से जुड़े करीब 87 प्रतिशत श्रमिक इन समुदायों से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार घटने की स्थिति में इन वर्गों की आय और आजीविका पर असर पड़ सकता है। यह आंकड़ा भी उनके बयान के रूप में सामने आया है।

VB-G RAM G को लेकर केंद्र का पक्ष

केंद्र सरकार नए कानून को रोजगार गारंटी के विस्तार के रूप में पेश कर रही है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार VB-G RAM G के तहत रोजगार की वैधानिक गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन की गई है। सरकार ने कहा है कि पुराने MGNREGA कार्यों को नए ढांचे में जारी रखा जा सकता है। मजदूरों के लिए समय पर भुगतान और देरी होने पर मुआवजे का प्रावधान भी बताया गया है।

MGNREGA पर जारी है राजनीतिक बहस

हरपाल सिंह चीमा ने नए कानून को लेकर अपने बयान में केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। वहीं केंद्र सरकार VB-G RAM G को ग्रामीण रोजगार और विकास के नए ढांचे के रूप में बता रही है। ऐसे में बहस योजना के नाम से आगे बढ़कर रोजगार के वास्तविक आंकड़ों और लागू प्रावधानों पर केंद्रित हो गई है। आने वाले समय में राज्यों में इसके क्रियान्वयन और रोजगार के आंकड़ों से इस बदलाव का आकलन किया जाएगा।

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