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UPI Payment : ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर बदल सकता है नियम, MDR पर लगेगा 18% GST? जानें पूरा हिसाब

UPI Payment: 0.4% MDR and 18% GST proposal explained UPI Payment: 0.4% MDR and 18% GST proposal explained
UPI Payment: 0.4% MDR and 18% GST proposal explained

UPI Payment से जुड़े नियमों में अक्टूबर से बड़ा बदलाव होने की चर्चा है
₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू होने की बात सामने आई है

न्यूज़म ब्यूरो

नई दिल्ली,  25 सितम्बर | देश में डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके UPI Payment को लेकर नए शुल्क की चर्चा तेज है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट पेमेंट पर MDR लगाया जा सकता है।
इस MDR पर 18% GST लगाने को लेकर GST Council की अगली बैठक में फैसला संभव है।
समझें MDR क्या है, GST कैसे जुड़ेगा और इसका बोझ उपभोक्ता या व्यापारी पर किस तरह पड़ सकता है।

UPI Payment पर बदल सकता है नियम, ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर MDR की चर्चा

देशभर में करोड़ों लोग रोजाना चाय की दुकानों से लेकर बड़े मॉल तक UPI Payment का इस्तेमाल करते हैं। अब डिजिटल पेमेंट से जुड़े शुल्क को लेकर एक नया प्रस्ताव चर्चा में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पेमेंट एग्रीगेटर्स की ओर से व्यापारियों से लिए जाने वाले MDR पर 18 प्रतिशत GST लगाया जा सकता है।

यह प्रस्ताव अभी अंतिम फैसला नहीं है। इस पर आगामी GST Council की बैठक में चर्चा और निर्णय होने की संभावना बताई जा रही है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो बड़े UPI मर्चेंट पेमेंट पर कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है।

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MDR Charge क्या है और किन ट्रांजैक्शन पर लगेगा?

MDR Charge यानी Merchant Discount Rate एक तरह की फीस होती है, जिसे मर्चेंट भुगतान स्वीकार करने की प्रक्रिया के दौरान वहन करता है। इस रकम का निपटान पेमेंट सिस्टम और बैंकिंग व्यवस्था के जरिए किया जाता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ₹2,000 से ज्यादा के कारोबारी UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जा सकता है। वहीं ₹75,000 या उससे अधिक के भुगतान पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 तक सीमित रहने की बात कही गई है।

पर्सन-टू-पर्सन भुगतान और छोटे ट्रांजैक्शन को प्रस्तावित शुल्क से बाहर रखने की जानकारी दी गई है। इसका मतलब है कि हर UPI भुगतान पर यह चार्ज लागू नहीं होगा।

18% GST सिर्फ MDR Charge पर लगेगा, पूरे भुगतान पर नहीं

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात 18% GST को लेकर है। यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो GST पूरे UPI पेमेंट पर नहीं लगाया जाएगा। टैक्स सिर्फ MDR की रकम पर लगेगा।

उदाहरण के तौर पर, कोई ग्राहक ₹10,000 का UPI Payment करता है। यदि उस पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होता है, तो MDR की रकम ₹40 बनेगी। इसके बाद ₹40 पर 18 प्रतिशत GST लगाया जाएगा।

₹40 का 18 प्रतिशत GST ₹7.20 होगा। इस तरह व्यापारी की कुल लागत ₹47.20 हो सकती है। यानी ग्राहक द्वारा किए गए पूरे ₹10,000 पर 18 प्रतिशत GST नहीं लगेगा।

GST Council की बैठक में हो सकता है बड़ा फैसला

GST Council की अगली बैठक 7 अक्टूबर को प्रस्तावित बताई गई है। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि बैठक में प्रक्रिया को सरल बनाने और सुधार से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी।

UPI लेनदेन पर MDR से जुड़े GST का मुद्दा भी इसी बैठक में उठ सकता है। सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सेवाओं पर GST लगाने का फैसला GST Council के स्तर पर किया जाता है।

राज्यों के वित्त मंत्री भी GST Council का हिस्सा होते हैं। इसलिए इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय परिषद की चर्चा और सहमति के बाद ही स्पष्ट होगा।

UPI Payment पर नया नियम आया तो किस पर पड़ेगा असर?

यदि UPI Payment से जुड़े MDR और GST का प्रस्ताव लागू होता है, तो इसका सीधा असर मर्चेंट्स की लागत पर पड़ सकता है। खासतौर पर अधिक मूल्य वाले कारोबारी UPI भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ सकता है।

छोटे भुगतान और व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले ट्रांजैक्शन को बाहर रखने की स्थिति में आम रोजमर्रा के छोटे UPI भुगतानों पर सीधा असर सीमित रह सकता है। हालांकि, अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि GST Council और संबंधित संस्थाएं नियमों को किस रूप में लागू करती हैं।

फिलहाल इस प्रस्ताव को लेकर अंतिम फैसला होना बाकी है। इसलिए 18% GST को अभी से हर UPI Payment पर लागू मानना सही नहीं होगा। 7 अक्टूबर की प्रस्तावित बैठक के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

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