दिल्ली को Zero Waste Delhi की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए एलजी तरनजीत सिंह संधू ने विशेषज्ञों के साथ बैठक की
बैठक में 100 प्रतिशत Source Segregation, वार्ड स्तर पर कचरा प्रोसेसिंग और Bulk Waste Generators के नियमों पर चर्चा हुई
न्यूज़म ब्यूरो
नई दिल्ली | दिल्ली में Solid Waste Management व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विकेंद्रीकृत मॉडल पर जोर दिया जा रहा है।
एलजी तरनजीत सिंह संधू ने वार्ड स्तर पर कचरे के प्रसंस्करण और स्रोत पर ही कचरा अलग करने की जरूरत बताई।
उन्होंने Bulk Waste Generators से नियमों का सख्ती से पालन कराने पर भी जोर दिया।
बैठक का उद्देश्य ऐसे मोहल्ले विकसित करना है, जहां कचरे का प्रबंधन स्थानीय स्तर पर हो और लैंडफिल पर निर्भरता घटे।

Zero Waste Delhi के लिए 100% Source Segregation पर जोर
दिल्ली को कचरा प्रबंधन के मामले में अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में नई रणनीति पर काम किया जा रहा है। लेफ्टिनेंट गवर्नर तारणजीत सिंह संधू ने संबंधित एजेंसियों के विशेषज्ञों के साथ विकेंद्रीकृत ठोस कचरा प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में ऐसे मोहल्ले विकसित करने पर जोर दिया गया, जहां कचरे का प्रबंधन स्थानीय स्तर पर किया जा सके।
बैठक के दौरान Zero Waste Delhi के लक्ष्य के लिए स्रोत पर 100 प्रतिशत कचरा अलग करने को अहम बताया गया। इसका मतलब है कि घरों और संस्थानों से निकलने वाले कचरे को शुरुआत में ही अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाए।
एलजी ने कहा कि कचरा प्रबंधन केवल नगर निकायों की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। इसमें निवासी, संस्थान और अन्य संबंधित पक्ष भी सक्रिय भूमिका निभाएं।
Solid Waste Management में वार्ड स्तर पर Processing
बैठक में Solid Waste Management को विकेंद्रीकृत करने पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रस्ताव के अनुसार, कचरे को केवल बड़े निपटान स्थलों तक ले जाने के बजाय वार्ड स्तर पर ही उसके प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए।
इस मॉडल से कचरे के परिवहन की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही स्थानीय स्तर पर गीले और सूखे कचरे के प्रबंधन के लिए अलग व्यवस्थाएं विकसित की जा सकती हैं।
एलजी ने पहले भी दिल्ली में कचरे को केवल लैंडफिल तक पहुंचाने के बजाय उसे संसाधन में बदलने पर जोर दिया था। सितंबर की एक कार्यशाला में उन्होंने ‘Waste to Landfill’ से ‘Waste to Wealth’ की ओर बढ़ने की बात कही थी।
Source Segregation को लेकर Bulk Waste Generators पर सख्ती

Source Segregation के साथ बैठक में Bulk Waste Generators के लिए तय कचरा प्रबंधन नियमों का सख्ती से पालन कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
बड़े कचरा उत्पादकों में संस्थान, बाजार, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान और अन्य बड़ी इकाइयां शामिल हो सकती हैं। इनके स्तर पर नियमों के पालन से शहर में कचरा प्रबंधन की पूरी श्रृंखला को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
एलजी ने अधिकारियों और विशेषज्ञों से कहा कि नियमों के पालन के साथ जागरूकता पर भी ध्यान दिया जाए। उनका जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है, जिसमें कचरा पैदा होने के स्थान से ही उसका सही प्रबंधन शुरू हो।
Waste Processing से मोहल्लों में बदल सकता है कचरा प्रबंधन
Waste Processing को स्थानीय स्तर पर बढ़ाने से दिल्ली के मोहल्लों में कचरा प्रबंधन का तरीका बदलने की योजना है। इसके लिए संबंधित एजेंसियों को सफल मॉडल का अध्ययन करके स्थानीय जरूरत के अनुसार उन्हें लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।
जून 2026 में एलजी ने दक्षिण दिल्ली की नवजीवन विहार कॉलोनी के Zero Waste मॉडल का निरीक्षण किया था। वहां RRR Centre, विकेंद्रीकृत एरोबिक कंपोस्टिंग और स्रोत पर कचरा अलग करने जैसी व्यवस्थाएं देखी गई थीं।
सितंबर में MCD और IIT दिल्ली की कार्यशाला के दौरान भी दिल्ली में ऐसे सफल मॉडलों को अपनाने की चर्चा हुई थी। उस समय इंदौर के कचरा प्रबंधन मॉडल का अध्ययन करने पर जोर दिया गया था।
Zero Waste Delhi के लिए नागरिक भागीदारी को बताया जरूरी
तरनजीत सिंह संधू ने स्वच्छता को रोजमर्रा की जिम्मेदारी से जोड़ते हुए लोगों की भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने नागरिकों से कचरा अलग करने, भागीदारी बढ़ाने और दूसरों को प्रेरित करने की अपील की।
एलजी ने कहा कि स्वच्छ दिल्ली का लक्ष्य तभी आगे बढ़ सकता है, जब नागरिक, संस्थान और प्रशासन मिलकर काम करें। उन्होंने मोहल्ला स्तर पर सामूहिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत करने की जरूरत बताई।
दिल्ली में पहले से ही कुछ क्षेत्रों में Zero Waste मॉडल विकसित करने और उन्हें दूसरे इलाकों तक पहुंचाने पर काम हो रहा है। अब Zero Waste Delhi की दिशा में स्रोत पर कचरा अलग करने, वार्ड स्तर पर प्रोसेसिंग और नियमों के पालन को प्रमुख आधार बनाया जा रहा है।
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