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Water Management : “जल को महत्वपूर्ण संसाधन मानकर उसका संरक्षण जरूरी” — प्राग मिशन में एच. राजेश प्रसाद का जोर

H. Rajesh Prasad leads the Indian delegation at the Water Management mission in Prague, Czech Republic H. Rajesh Prasad leads the Indian delegation at the Water Management mission in Prague, Czech Republic
H. Rajesh Prasad leads the Indian delegation at the Water Management mission in Prague, Czech Republic

Water Management को लेकर भारत और चेक गणराज्य के बीच सहयोग पर जोर दिया गया
यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया

न्यूज़म ब्यूरो

प्राग, चेक गणराज्य, 21 सितंबर | Waste Management और Circular Economy पर भारत-चेक सहयोग को बढ़ावा देने की पहल हुई।
21 से 25 सितंबर तक भारतीय प्रतिनिधिमंडल चेक गणराज्य के दौरे पर है।
प्रतिनिधिमंडल प्राग, ज़्लीन और ओस्ट्रावा में अधिकारियों और विशेषज्ञों से मिलेगा।
चर्चा में शोध, तकनीक, निवेश और पर्यावरण अनुकूल समाधानों पर फोकस रहेगा।

Water Management  : प्राग मिशन में एच. राजेश प्रसाद ने संभाली कमान

यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। यह उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल जल प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन और सर्कुलर इकोनॉमी पर केंद्रित पांच दिवसीय मिशन के लिए चेक गणराज्य पहुंचा है।

यह मिशन 21 से 25 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारत और चेक गणराज्य के बीच जल संरक्षण, अपशिष्ट जल उपचार और संसाधनों के कुशल इस्तेमाल में सहयोग बढ़ाना है।

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प्रतिनिधिमंडल के दौरे में पर्यावरण अनुकूल तकनीकों और पुनर्चक्रण से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी। दोनों देशों के विशेषज्ञ संभावित साझेदारी के क्षेत्रों पर विचार-विमर्श करेंगे।

 अपशिष्ट जल और पुनर्चक्रण पर चर्चा

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए एच. राजेश प्रसाद ने जल को महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में देखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के साथ इसके कुशल उपयोग पर भी ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने अपशिष्ट जल के उपचार, दोबारा उपयोग और पुनर्चक्रण को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, सतत जल प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक और व्यावहारिक समाधान विकसित करने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि बढ़ती जल और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न क्षेत्रों को साथ लाना होगा। इसमें सरकारी नीतियों, तकनीक, शैक्षणिक शोध और उद्योगों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

Circular Economy  : संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर जोर

मिशन के दौरान Circular Economy से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य संसाधनों के दोबारा उपयोग और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना है।

चेक गणराज्य के पर्यावरण उपमंत्री इवो मार्सिन ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। उन्होंने साझा पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि अपशिष्ट को केवल निपटान की वस्तु के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बजाय पुन: उपयोग, पुनर्चक्रण और संसाधनों की पुनर्प्राप्ति पर ध्यान देने की जरूरत है।

India-Czech Cooperation  : तकनीकी साझेदारी पर फोकस

मिशन का एक प्रमुख उद्देश्य भारत और चेक गणराज्य के बीच तकनीकी सहयोग को मजबूत करना है। दोनों पक्ष जल और पर्यावरण क्षेत्र में नए समाधान तलाशने पर चर्चा कर रहे हैं।

एच. राजेश प्रसाद ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए ऐसे समाधान विकसित किए जा सकते हैं। इन्हें भारत की शहरी, औद्योगिक और कृषि संबंधी जरूरतों के अनुसार बड़े स्तर पर अपनाया जा सकता है।

इस दौरान पायलट परियोजनाओं और संस्थागत साझेदारी की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। निवेश और व्यावसायिक सहयोग भी मिशन के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

Research Collaboration  : IIT रोपड़ और चितकारा विश्वविद्यालय की भागीदारी

भारतीय प्रतिनिधिमंडल में लोक प्रशासन, नीति निर्माण और उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके अलावा शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञ भी मिशन का हिस्सा हैं।

आईआईटी रोपड़ और चितकारा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तथा शिक्षाविद भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं। इससे मिशन में शोध और नवाचार का पक्ष मजबूत हुआ है।

शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी से संयुक्त अनुसंधान और तकनीकी समाधान विकसित करने के अवसर तलाशे जाएंगे।

Environmental Partnership  : तीन शहरों का दौरा करेगा प्रतिनिधिमंडल

भारतीय प्रतिनिधिमंडल प्राग, ज़्लीन और ओस्ट्रावा का दौरा करेगा। इन शहरों में सरकारी अधिकारियों, कंपनियों, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के साथ बैठकें होंगी।

बैठकों में जल प्रबंधन और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी तकनीकों को समझने पर जोर रहेगा। इसके साथ संभावित संयुक्त परियोजनाओं और निवेश के अवसरों पर भी चर्चा होगी।

यह पहल चेक गणराज्य के मानद वाणिज्य दूत मेजर गुनीत चौधरी द्वारा की गई है। मिशन का आयोजन भारत में चेक गणराज्य के दूतावास और चेक पर्यावरण मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है।

Sustainable Solutions  : व्यावहारिक साझेदारी की उम्मीद

पांच दिवसीय मिशन के जरिए दोनों देशों के संबंधित पक्षों के बीच व्यावहारिक साझेदारी को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

इसमें जल प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन और Circular Economy के क्षेत्र शामिल हैं। तकनीकी सहयोग, संयुक्त शोध, पायलट परियोजनाएं और संस्थागत साझेदारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मिशन से दोनों देशों के बीच पर्यावरणीय तकनीक और संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग विकसित होने की उम्मीद है।

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