Yudh Nashean Virudh के तहत पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान को व्यापक रूप देने की कोशिश की जा रही है
Punjab Drug War में तस्करी और सप्लाई नेटवर्क पर पुलिस कार्रवाई के साथ युवाओं को जागरूक करने, स्कूलों में नशा रोकथाम कार्यक्रम चलाने, गांवों में नागरिक निगरानी बढ़ाने और नशे से प्रभावित लोगों को उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 21 सितम्बर। पंजाब सरकार के Anti-Drug Campaign में नशे के खिलाफ कार्रवाई के साथ सामाजिक भागीदारी और स्वास्थ्य सेवाओं को भी जोड़ा गया है। Yudh Nashean Virudh के तहत पुलिस द्वारा नशीले पदार्थों की सप्लाई पर कार्रवाई, स्कूलों में जागरूकता और गांवों में निगरानी की व्यवस्था पर फोकस किया जा रहा है। वहीं Drug De-Addiction के तहत नशे से जूझ रहे लोगों के लिए उपचार और पुनर्वास सुविधाओं को मजबूत करने की बात कही गई है। सरकार के अनुसार युवाओं को खेल, संस्कृति और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना भी इस रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य नशे की रोकथाम और उपचार को एक साथ आगे बढ़ाना है।
पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान अब केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रखने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। Yudh Nashean Virudh के तहत नशे की सप्लाई रोकने के साथ इसकी रोकथाम और उपचार पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
सरकार के मुताबिक Punjab Drug War को सफल बनाने के लिए पुलिस के साथ शिक्षा संस्थानों, युवाओं, स्थानीय समुदायों और स्वास्थ्य सेवाओं को भी अभियान से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इसका उद्देश्य नशे के खिलाफ कार्रवाई को जमीनी स्तर तक पहुंचाना है।

नशे की सप्लाई पर कार्रवाई से अभियान की शुरुआत
अभियान का पहला हिस्सा नशीले पदार्थों की तस्करी और सप्लाई नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ा है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार मार्च 2025 से सितंबर 2026 के बीच एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 61,824 एफआईआर दर्ज कीं।
इसी अवधि में 81,433 गिरफ्तारियों की जानकारी सरकार ने दी है। कार्रवाई के दौरान 3,918 किलोग्राम हेरोइन, 991 किलोग्राम अफीम और 47 टन पोस्त की भूसी बरामद किए जाने का दावा किया गया है।
इसके अलावा 1,416 किलोग्राम गांजा और 65 लाख टैबलेट तथा कैप्सूल की बरामदगी भी बताई गई है। पुलिस की ओर से इसी दौरान 79,293 जनसभाएं किए जाने की जानकारी दी गई है।
Anti-Drug Campaign में शिक्षा व्यवस्था को बनाया हिस्सा
नशे की समस्या से निपटने के लिए स्कूलों में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार के मुताबिक 3,600 स्कूलों के करीब 7.5 लाख विद्यार्थियों तक 14 सप्ताह का नशा विरोधी पाठ्यक्रम पहुंचाया जा रहा है।
इसके साथ शिक्षकों को विद्यार्थियों के व्यवहार में होने वाले बदलावों को समझने और शुरुआती जोखिमों की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
पहले चरण में 13 जिलों के लगभग 25 हजार शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के अनुसार अमृतसर, तरनतारन और फाजिल्का में करीब 7 हजार शिक्षक पहले ही जागरूक किए जा चुके हैं।
Drug-Free Punjab के लिए युवाओं को सकारात्मक विकल्प
नशे से बचाव की रणनीति में युवाओं को भी अहम स्थान दिया गया है। स्कूल और कॉलेज स्तर पर खेलों, सांस्कृतिक गतिविधियों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
सरकार का मानना है कि युवाओं को केवल नशे के नुकसान बताने के बजाय उन्हें सकारात्मक गतिविधियों के अवसर देना भी जरूरी है। इसी सोच के तहत स्कूलों में पूरे साल की गतिविधियों का कैलेंडर तैयार किया गया है।
कॉलेजों में भी छात्रों को स्वस्थ जीवनशैली और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने पर ध्यान दिया जा रहा है।
गांवों में बढ़ाई गई नागरिकों की निगरानी
Yudh Nashean Virudh का एक अहम हिस्सा स्थानीय समुदायों को अभियान से जोड़ना है। सरकार के अनुसार सितंबर 2026 तक करीब 1.25 लाख सदस्य लगभग 15 हजार गांव और वार्ड रक्षा समितियों से जुड़े हैं।
इनमें से 50 हजार से अधिक सदस्यों को नशा मुक्ति ऐप के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई है। इन समितियों के जरिए नशे की बिक्री की जानकारी देने के साथ जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
सरकार के मुताबिक सेफ पंजाब व्हाट्सऐप हेल्पलाइन पर मार्च 2025 से 51 हजार से अधिक सूचनाएं मिली हैं। इन सूचनाओं के आधार पर 25 हजार से ज्यादा नशा-संबंधी गिरफ्तारियां होने का दावा किया गया है।
Drug De-Addiction के जरिए उपचार और पुनर्वास पर जोर
नशे से प्रभावित लोगों को इलाज उपलब्ध कराना भी इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पंजाब में 547 ओओएटी केंद्र, 219 नशा मुक्ति केंद्र और 91 पुनर्वास केंद्र संचालित होने की जानकारी सरकार ने दी है।
इन केंद्रों में उपचार के साथ मरीजों को व्यस्त रखने के लिए कौशल विकास और रचनात्मक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2024 में सरकारी नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों में 12,200 से अधिक दाखिले हुए थे। 2025 में यह संख्या करीब 34 हजार तक पहुंच गई।
पांच मोर्चों से आगे बढ़ रहा Punjab Drug War
पंजाब सरकार के अनुसार Punjab Drug War में अब कार्रवाई, रोकथाम, जागरूकता, जनभागीदारी और उपचार को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
एक ओर पुलिस सप्लाई नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। दूसरी ओर स्कूलों में विद्यार्थियों को जागरूक किया जा रहा है और गांवों में नागरिकों की भूमिका बढ़ाई जा रही है।
वहीं Drug-Free Punjab के लक्ष्य के तहत नशे से प्रभावित लोगों के लिए उपचार और पुनर्वास को भी अभियान से जोड़ा गया है। सरकार का कहना है कि इन सभी स्तरों को एक साथ मजबूत करके नशे के खिलाफ लंबे समय तक चलने वाली व्यवस्था तैयार करने पर फोकस किया जा रहा है।
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