कांगड़ा के सिद्धबाड़ी स्थित चिन्मय तपोवन आश्रम में चिन्मय अमृत महोत्सव आयोजित हुआ
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कार, सेवा और युवाओं के मूल्यों पर जोर दिया
न्यूज़म ब्यूरो
शिमला, 20 सितम्बर। चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने पर कांगड़ा में चिन्मय अमृत महोत्सव मनाया गया। राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक शिक्षा के संतुलन की बात कही।

Chinmaya Amrit Mahotsav में भारतीय परंपरा पर जोर
शिमला, 20 सितंबर 2026। कांगड़ा जिले के सिद्धबाड़ी स्थित चिन्मय तपोवन आश्रम में शनिवार शाम विशेष कार्यक्रम हुआ। यहां चिन्मय अमृत महोत्सव का आयोजन किया गया। राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
यह आयोजन चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुआ। कार्यक्रम में मिशन के संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। उनके जीवन, शिक्षाओं और योगदान पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम में चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की यात्रा को रेखांकित किया गया। इस दौरान आध्यात्मिक गतिविधियों और सामाजिक सेवा का उल्लेख हुआ। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रचार में योगदान पर भी चर्चा हुई।
Chinmaya Amrit Mahotsav में स्वामी चिन्मयानंद को याद किया

राज्यपाल ने भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की बात कही। उन्होंने चिन्मय मिशन के योगदान की सराहना की।
उन्होंने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं ने लोगों को प्रेरित किया। उनकी शिक्षाओं से भारतीय दर्शन और संस्कृति को समझने में मदद मिली। राज्यपाल ने इसे भारत की ज्ञान परंपरा से जोड़कर देखा।
उन्होंने कहा कि भारत में ज्ञान, सेवा और साधना की पुरानी परंपरा रही है। मानव कल्याण भी इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इन जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
युवाओं के लिए आधुनिक शिक्षा और संस्कार जरूरी
राज्यपाल ने युवाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं। युवाओं में संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी मजबूत होनी चाहिए।
उन्होंने युवाओं को राष्ट्रभक्ति और सेवा भावना से जोड़ने की बात कही। साथ ही आधुनिक शिक्षा के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी तेजी से बदलाव ला रहे हैं। ऐसे समय में आधुनिक विकास को अपनाना जरूरी है। इसके साथ सांस्कृतिक परंपराओं और मानवीय मूल्यों की रक्षा भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए। इससे वे बदलती दुनिया में अपनी भूमिका बेहतर तरीके से निभा सकेंगे।
Chinmaya Amrit Mahotsav में गीता की शिक्षाओं का उल्लेख
राज्यपाल ने अपने संबोधन में भगवद्गीता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गीता जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कर्तव्यों को जिम्मेदारी से निभाने पर जोर दिया। साथ ही समर्पण और सेवा की भावना को महत्वपूर्ण बताया।
राज्यपाल ने कहा कि सेवा व्यक्ति को निजी हितों से आगे बढ़ाती है। इससे समाज के व्यापक कल्याण के लिए काम करने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने भारतीय जीवन-दर्शन के दो प्रमुख विचारों का उल्लेख किया। इनमें वसुधैव कुटुम्बकम और सर्वे भवन्तु सुखिनः शामिल हैं। उन्होंने मानवता के कल्याण के लिए लगातार प्रयास करने का आह्वान किया।
चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की यात्रा पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया। स्वामी मित्रानंद ने चिन्मय मिशन की यात्रा पर प्रकाश डाला।
उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के जीवन और योगदान की जानकारी दी। कार्यक्रम में मिशन की आध्यात्मिक और सामाजिक गतिविधियों का भी उल्लेख हुआ।
इस अवसर पर कांगड़ा के सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज मौजूद रहे। उपायुक्त हेमराज बैरवा और पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
वरिष्ठ आचार्य परमशिखर स्वामी माधवानंद और स्वामी अनुकूलानंद उपस्थित रहे। पद्मश्री क्षमा मैत्रेय और ट्रस्टी डॉ. राजन गुप्ता भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
इसके अलावा चिन्मय मिशन के पदाधिकारी, साधक और श्रद्धालु भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।
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