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“Viksit Bharat के लिए केंद्र-राज्य साथ आएंगे”, वित्तीय रणनीति पर मंथन

Centre-State Finance Ministers’ Meeting on Viksit Bharat Centre-State Finance Ministers’ Meeting on Viksit Bharat
Centre-State Finance Ministers’ Meeting on Viksit Bharat

Viksit Bharat के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों की 18-19 सितंबर को बैठक होगी

सम्मेलन में आर्थिक विकास, GST 2.0, कृषि वित्त, Renewable Energy, ऊर्जा बदलाव, निजी निवेश और कार्बन प्रबंधन जैसी प्रमुख प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी

न्यूज़म ब्यूरो

नई दिल्ली | भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय सहयोग पर मंथन शुरू हुआ है। वित्त मंत्रालय ने 18 और 19 सितंबर को नई दिल्ली में दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया है।

इस सम्मेलन का नाम “Financing India’s Journey towards Viksit Bharat” रखा गया है। इसमें राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री और वित्त सचिव शामिल हो रहे हैं। कई मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं।

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Nirmala Sitharaman at the Viksit Bharat Financing Conference
Nirmala Sitharaman at the Viksit Bharat Financing Conference

वित्तीय चुनौतियों और विकास प्राथमिकताओं पर चर्चा

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच नीतिगत तालमेल को मजबूत करना है। बैठक में देश की विकास यात्रा से जुड़ी वित्तीय चुनौतियों पर चर्चा हो रही है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सम्मेलन में मौजूद हैं। आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर सम्मेलन के उद्देश्यों पर जानकारी देंगी।

15वें वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एन.के. सिंह सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य संबोधन देंगे। महाराष्ट्र के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव और वित्त सचिव सुधीर श्रीवास्तव राज्यों का दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे।

तीन प्रमुख विषयों पर होगा मंथन

सम्मेलन में तीन प्रमुख विषयों पर विशेष सत्र रखे गए हैं। इनमें मैक्रोइकोनॉमिक स्थिति, कृषि वित्त और ऊर्जा बदलाव शामिल हैं।

  • आर्थिक विकास और निजी निवेश

पहले सत्र में भारत की आर्थिक वृद्धि और विकास के संभावित रास्तों पर चर्चा होगी। इसमें निजी क्षेत्र से वित्त जुटाने के विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा।

राज्यों पर GST 2.0 के संभावित प्रभावों को भी चर्चा में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य राज्यों की वित्तीय जरूरतों और विकास लक्ष्यों के बीच तालमेल तलाशना है।

  • कृषि क्षेत्र के लिए वित्तीय व्यवस्था

दूसरे सत्र में कृषि क्षेत्र में वित्त उपलब्ध कराने पर चर्चा होगी। इसमें कृषि बाजार और मार्केटिंग के लिए वित्तीय विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में संसाधनों के टिकाऊ इस्तेमाल और लचीलापन बढ़ाने की जरूरत पर भी मंथन होगा।

  • Renewable Energy और ऊर्जा बदलाव

तीसरे सत्र में ऊर्जा क्षेत्र के बदलाव के लिए वित्तीय जरूरतों पर चर्चा होगी। इसमें Renewable Energy और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए निवेश विकल्प शामिल हैं।

कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण से जुड़ी तकनीकों के वित्तपोषण पर भी चर्चा प्रस्तावित है।

विकास के परिणाम मापने और तकनीक पर जोर

Centre and States Discuss Financing for Viksit Bharat
Centre and States Discuss Financing for Viksit Bharat

सम्मेलन में विकास योजनाओं के परिणामों को मापने की जरूरत पर भी चर्चा होगी। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग इस विषय पर जानकारी देंगे।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन सुशासन में नई तकनीक की भूमिका पर प्रकाश डालेंगे।

केंद्र सरकार के अनुसार, सम्मेलन का उद्देश्य विकास के लिए वित्तीय जरूरतों और प्राथमिकताओं पर साझा दृष्टिकोण तैयार करना है। इसमें अकादमिक शोध और व्यावहारिक नीति अनुभव को एक साथ लाने का प्रयास किया जा रहा है।

राज्यों के साथ बेहतर समन्वय पर फोकस

Viksit Bharat के लक्ष्य को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय इस बैठक का प्रमुख पहलू है। सम्मेलन में दीर्घकालिक विकास के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के तरीकों पर चर्चा हो रही है।

हालांकि, सम्मेलन का एजेंडा चर्चा के विषयों को दर्शाता है। किसी विशेष नई वित्तीय नीति या परियोजना की मंजूरी को इससे स्वतः नहीं जोड़ा जा सकता।

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