चंडीगढ़ में नशे से प्रभावित करीब 50 परिवारों ने अपनी आपबीती सुनाई
परिवारों ने मुफ्त योजनाओं के बजाय नशे से छुटकारा और इंसाफ की मांग की
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 17 सितंबर | चंडीगढ़ में भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में नशे से प्रभावित परिवारों ने पुलिस कार्रवाई और सरकार की नशा विरोधी मुहिम पर सवाल उठाए। जानिए परिवारों ने क्या कहा।
पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। चंडीगढ़ में भाजपा नेताओं ने नशे से प्रभावित परिवारों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसका आयोजन “मावां मांगदियां जवाब” अभियान के तहत किया गया। कार्यक्रम में पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से आए करीब 50 परिवारों ने अपनी आपबीती साझा की।
परिवारों ने कहा कि उन्हें मुफ्त राशन, मुफ्त यात्रा या मुफ्त बिजली नहीं चाहिए। उनकी मांग नशे से छुटकारे और अपने परिजनों की मौत के मामलों में न्याय की है। परिवारों ने नशे की बिक्री और पुलिस कार्रवाई से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए।

नशे से प्रभावित परिवारों ने सरकार से मांगा इंसाफ

अबोहर से आई एक महिला ने अपने भाई से जुड़ी घटना बताई। उनके मुताबिक, परिवार को पता था कि वह नशा करता था। उन्होंने पुलिस के 100 नंबर पर फोन करके नशे की बिक्री की जानकारी दी थी।
महिला ने दावा किया कि उन्हें हेल्पलाइन पर संपर्क करने के लिए कहा गया। उनके अनुसार, पुलिस की ओर से कथित तौर पर नशा खरीदकर मौके पर पहुंचने को कहा गया। महिला ने सवाल उठाया कि जब पुलिस को स्थान की जानकारी दी गई थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
एक अन्य महिला ने अपने इकलौते बेटे की मौत का दर्द बताया। उन्होंने दावा किया कि बेटे को मारकर फेंक दिया गया था। महिला के अनुसार, पुलिस ने शव उठाने के लिए वाहन उपलब्ध नहीं होने की बात कही थी।
एक अन्य परिवार ने बताया कि नशे के कारण उनके दोनों बेटों की मौत हो गई। महिला ने कहा कि अब वह घरों में काम करके अपना गुजारा कर रही हैं।
ढिल्लों ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने नशे से प्रभावित परिवारों को सामने रखते हुए पंजाब सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि नशे के कारण मारे गए लोगों की संख्या 1984 में मारे गए निर्दोष लोगों से कई गुना अधिक है।
यह आंकड़ा और तुलना ढिल्लों के राजनीतिक बयान का हिस्सा है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपलब्ध नहीं कराई गई।
ढिल्लों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि भाजपा नशे के खिलाफ जन आंदोलन शुरू करेगी। उनके मुताबिक, 18 सितंबर से चार नशा मुक्त पंजाब यात्राएं शुरू की जाएंगी।
ढिल्लों ने यह भी कहा कि भाजपा सत्ता में आती है तो दो साल में नशे को खत्म करने का लक्ष्य रखा जाएगा। उन्होंने पार्टी की अन्य राज्यों में सरकारों के कार्यों का भी हवाला दिया।
जाखड़ ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने नशे से प्रभावित परिवारों के दर्द को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखी खाली कुर्सियों का जिक्र किया। उनके मुताबिक, ये कुर्सियां नशे के कारण जान गंवाने वालों का प्रतीक थीं।
जाखड़ ने पंजाब सरकार के नशा विरोधी अभियान को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पुलिस के गिरफ्तारी आंकड़ों का हवाला दिया। पंजाब पुलिस के अनुसार, 1 मार्च 2025 से 10 सितंबर 2026 तक 60,582 एफआईआर दर्ज हुईं। इस दौरान 79,784 कथित नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने 3,803 किलोग्राम हेरोइन बरामद करने की जानकारी दी है।
जाखड़ ने पूछा कि इतनी बड़ी संख्या में गिरफ्तारियों के बावजूद नशे की समस्या को लेकर परिवारों की शिकायतें क्यों बनी हुई हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए।
मोरिंडा और खरड़ से भी पहुंचे परिवार

मोरिंडा से आए एक व्यक्ति ने बताया कि उनका बेटा अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। उन्होंने सरकार से नशे की गिरफ्त में आए युवाओं के इलाज की मदद मांगी।
खरड़ के घड़ूआं से पहुंचे एक युवक ने भी अपनी नशे की लत की बात कही। उसने सरकार से इलाज और सहायता उपलब्ध कराने की अपील की।
नवांशहर से आए एक युवक ने भी पुलिस कार्रवाई को लेकर अपना अनुभव साझा किया। उसने दावा किया कि नशा तस्करों की जानकारी देने के बावजूद उसे कथित रूप से खुद नशा खरीदने के लिए कहा गया।
नशे के खिलाफ कार्रवाई पर जारी है राजनीतिक बहस
पंजाब में नशे को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। पंजाब पुलिस ने अपने अभियान में बड़ी संख्या में गिरफ्तारियों और नशीले पदार्थों की बरामदगी की जानकारी दी है। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान केवल गिरफ्तारी के आंकड़ों से नहीं होगा।
इन परिवारों की मांगों में कार्रवाई के साथ इलाज, पुनर्वास और न्याय भी शामिल है। ऐसे में पंजाब का Punjab Drug Crisis राजनीतिक मुद्दे के साथ सामाजिक चिंता का विषय भी बना हुआ है।
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