पेरिस में मौजूद उद्योग मंत्री उदय सामंत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और जरांगे पाटिल के करीबियों से लगातार बातचीत की, जिसके बाद सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच सहमति का रास्ता बना
राहुल गुप्ता
मुंबई, 17 सितंबर।
मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल का अनशन खत्म कराने के पीछे करीब साढ़े तीन घंटे तक चली बातचीत और पर्दे के पीछे हुई राजनीतिक कवायद अहम रही। इस पूरी प्रक्रिया में महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत की भूमिका भी चर्चा में रही, जो इस दौरान करीब 7 हजार किलोमीटर दूर पेरिस में मौजूद थे।
उदय सामंत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पेरिस गए हुए थे। महाराष्ट्र में मनोज जरांगे के अनशन और प्रस्तावित मुंबई मार्च को लेकर संवेदनशील स्थिति के बीच सामंत लगातार राज्य के घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए थे और पेरिस से ही महाराष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व तथा जरांगे पाटिल के करीबियों के संपर्क में रहे।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से लगातार हुई बातचीत
बातचीत के दौरान उदय सामंत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से करीब सात बार चर्चा की। इसके अलावा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से भी उनकी लगभग सात बार बातचीत हुई।
इसके बाद एक अहम कॉन्फ्रेंस कॉल हुई, जिसमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील, बीजेपी नेता प्रसाद लाड और उदय सामंत शामिल हुए। इस दौरान मनोज जरांगे की लंबित मांगों, आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति और मौजूदा स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से संभालने पर चर्चा हुई।
जरांगे के करीबियों से भी सरकार का सीधा संपर्क
सरकार की ओर से मनोज जरांगे पाटिल के करीबी सहयोगियों से भी सीधे संपर्क किया गया। बातचीत के दौरान लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने का भरोसा दिलाया गया।
सरकार के सामने चुनौती यह थी कि एक तरफ जरांगे पाटिल के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखा जाए और दूसरी तरफ प्रस्तावित मुंबई मार्च से स्थिति और न बिगड़े। गणेशोत्सव के दौरान मुंबई में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए भी बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया गया।
पेरिस से चलता रहा ‘मुंबई कनेक्शन’
इस पूरे घटनाक्रम में उदय सामंत की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि वह महाराष्ट्र से बाहर पेरिस में मौजूद थे। इसके बावजूद उन्होंने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और जरांगे पाटिल के करीबियों के बीच संवाद बनाए रखा।
करीब साढ़े तीन घंटे तक चली बातचीत में कई दौर की चर्चा हुई। पहले सरकार के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत हुई, इसके बाद संयुक्त कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए आगे की रणनीति पर चर्चा की गई और फिर जरांगे पाटिल के करीबियों तक सरकार का संदेश पहुंचाया गया।
बातचीत के बाद खत्म हुआ अनशन
लगातार बातचीत और सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद मनोज जरांगे पाटिल ने अपना अनशन खत्म करने का फैसला किया। इसके साथ ही तत्काल तौर पर प्रस्तावित मुंबई मार्च को लेकर बना तनाव भी कम हुआ।
उदय सामंत इससे पहले भी मनोज जरांगे पाटिल के मुंबई मार्च से जुड़े घटनाक्रम में हस्तक्षेप कर चुके हैं। इस बार भी पेरिस से उनके प्रयासों के जरिए सरकार और जरांगे पाटिल के खेमे के बीच संवाद बना रहा।
अब लंबित मांगों पर फैसले का इंतजार
मनोज जरांगे का अनशन खत्म होने से तत्काल टकराव की स्थिति टली है, लेकिन मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़ी लंबित मांगों पर सरकार आगे क्या निर्णय लेती है, यह महत्वपूर्ण होगा।
बातचीत के दौरान सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों को अब किस तरह और कितनी जल्दी लागू किया जाता है, इस पर आगे की राजनीतिक और प्रशासनिक प्रक्रिया नजर रहेगी।
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