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‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का अगला पड़ाव गुजरात? अभिजीत दीपके बोले- कोई पूछ क्यों नहीं रहा वहां जाने को

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पंजाब, झारखंड और कर्नाटक में अभियान पहुंचने का जिक्र किया, अब गुजरात को लेकर दिए संकेत; नोएडा में भी स्कूलों के ऑडिट से शुरू हुआ नया विवाद

राहुल गुप्ता
अहमदाबाद, 16 सितंबर।

कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी का ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान अब महाराष्ट्र से निकलकर दूसरे राज्यों तक पहुंच गया है। अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर का सोशल ऑडिट किया जा रहा है। इस दौरान अलग-अलग राज्यों में स्कूलों की स्थिति को लेकर सीजेपी की टीम ने सवाल उठाए हैं। वहीं, पंजाब के कुछ सरकारी स्कूलों में आधुनिक सुविधाओं की तारीफ भी की गई।

अब सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के एक बयान के बाद गुजरात को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। दीपके ने कहा कि जिन राज्यों को लेकर उनकी टीम से सवाल किए गए, वहां वे जा चुके हैं। उन्होंने पंजाब, झारखंड और कर्नाटक का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें हैरानी है कि अब तक किसी ने गुजरात जाने के बारे में नहीं पूछा। इससे संकेत मिल रहे हैं कि अभियान का अगला पड़ाव गुजरात हो सकता है।

15 अगस्त को महाराष्ट्र से शुरू हुआ था अभियान

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत 15 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गांव से हुई थी। अभिजीत दीपके ने अपने पैतृक गांव के सरकारी स्कूल का दौरा कर वहां बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया था।

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अभियान के तहत पानी, शौचालय, बैठने की व्यवस्था और स्कूल की इमारत जैसी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए गए। बाद में महाराष्ट्र के लातूर जिले के औसा में भी सीजेपी की टीम ने सरकारी स्कूलों का दौरा किया। इस दौरे को लेकर विवाद हुआ और अभिजीत दीपके समेत कुछ लोगों के खिलाफ कथित तौर पर बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश करने और अन्य आरोपों में मामला दर्ज किया गया।

राजस्थान में जर्जर स्कूल का मुद्दा उठा

राजस्थान में भी सीजेपी के अभियान के दौरान सरकारी स्कूल की इमारत की स्थिति का मुद्दा सामने आया। जयपुर के रामपुरा-कनवारपुरा सरकारी प्राथमिक स्कूल की पुरानी इमारत को असुरक्षित बताया गया था।

सीजेपी की टीम के दौरे के बाद स्कूल की जर्जर इमारत को गिराए जाने और नई इमारत के लिए 18 लाख रुपये की व्यवस्था किए जाने की रिपोर्ट सामने आई। इस रकम में 12 लाख रुपये सरकार और 6 लाख रुपये स्थानीय विधायक निधि से दिए जाने की बात कही गई।

हरियाणा में मिड-डे मील को लेकर उठे सवाल

हरियाणा के भिवानी जिले के सांगवान गांव के सरकारी प्राथमिक स्कूल में भी सीजेपी की टीम पहुंची थी। टीम ने मिड-डे मील के लिए रखे गेहूं में कीड़े और मूंगफली में चींटियां होने का दावा किया था। स्कूल की इमारत और शौचालय की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए।

इसके बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल की प्रभारी शिक्षिका को निलंबित किया और दो रसोइयों को हटाने के साथ मिड-डे मील प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। बाद में हरियाणा सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में 2,814 जर्जर और असुरक्षित ढांचों को गिराने का आदेश दिया। सीजेपी ने इसे अपने अभियान से जोड़ते हुए इसका स्वागत किया है।

पश्चिम बंगाल में भी सामने आया विवाद

पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में भी ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान से जुड़ा विवाद सामने आया। सीजेपी समर्थक अब्दुल हाफिज ने अपने पुराने स्कूल की स्थिति के वीडियो और तस्वीरें साझा की थीं। इसके बाद उनके और उनके पिता पर हमले का आरोप लगा। बाद में उनके पिता की मौत हो गई।

सीजेपी ने इस घटना को लेकर आरोप लगाए और मामले में कार्रवाई की मांग की। घटना की परिस्थितियों और इसके राजनीतिक पहलू को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

कर्नाटक में 200 से ज्यादा स्कूलों के ऑडिट का दावा

कर्नाटक में सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका की अगुवाई में सरकारी स्कूलों का दौरा किया गया। बेंगलुरु के कई स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए गए।

सीजेपी की ओर से दावा किया गया कि उसकी टीम ने कर्नाटक में 200 से ज्यादा स्कूलों का ऑडिट किया है। वर्थुर के एक सरकारी स्कूल में छत की स्थिति और शिक्षकों की संख्या को लेकर भी मुद्दे उठाए गए। इसके बाद शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा से मुलाकात कर स्कूल की समस्याओं पर चर्चा किए जाने की बात सामने आई।

पंजाब में मिली अलग तस्वीर

पंजाब के लुधियाना में सीजेपी की टीम ने तीन सरकारी स्कूलों का दौरा किया। इनमें स्कूल ऑफ एमिनेंस, सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल और सरकारी प्राइमरी स्कूल शामिल थे।

स्कूल ऑफ एमिनेंस में टीम ने स्विमिंग पूल, बैडमिंटन कोर्ट, दिव्यांगों के लिए रैंप, एआई लैब और कंप्यूटर लैब जैसी सुविधाएं देखीं। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर की तारीफ की। हालांकि, टीम ने कुछ कमियां भी बताईं और उन्हें शिक्षा मंत्री के सामने रखने की बात कही।

वहीं, जंडियाली के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की इमारत और बुनियादी सुविधाओं को लेकर अलग तस्वीर सामने आई। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि अभियान के दौरान सीजेपी की टीम ने केवल खराब स्कूलों की तस्वीरें ही सामने नहीं रखीं, बल्कि कुछ अच्छी सुविधाओं की तारीफ भी की।

झारखंड भी पहुंचा अभियान

सीजेपी ने झारखंड में भी सरकारी स्कूलों के सोशल ऑडिट की जानकारी दी है। अभिजीत दीपके ने हाल में पंजाब, झारखंड और कर्नाटक का जिक्र करते हुए कहा था कि जिन राज्यों में उनकी टीम के पहुंचने को लेकर सवाल उठाए गए, वहां वे जा चुके हैं।

हालांकि, झारखंड में अलग-अलग स्कूलों की स्थिति को लेकर उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी महाराष्ट्र, हरियाणा या कर्नाटक के मुकाबले सीमित है।

नोएडा पहुंचते ही नया विवाद

15 सितंबर को सीजेपी का ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान उत्तर प्रदेश के नोएडा पहुंचा। सौरव दास की अगुवाई में टीम ने गौतमबुद्ध नगर के सरकारी स्कूलों का ऑडिट शुरू किया।

सीजेपी की टीम ने एक सरकारी प्राथमिक स्कूल में खराब शौचालय, टूटे गेट और पुरानी इमारत जैसी कमियों का दावा किया। टीम ने यह भी कहा कि कुछ बच्चे पर्याप्त कक्षाओं की कमी के कारण बरामदे में पढ़ रहे थे।

इसके बाद आसपास के कुछ अन्य स्कूलों में प्रवेश नहीं मिलने को लेकर भी विवाद हुआ। सीजेपी की ओर से दावा किया गया कि स्कूलों के गेट बंद रखे गए थे। दूसरी ओर, गौतमबुद्ध नगर के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्कूल बंद किए जाने की बात से इनकार किया और कहा कि भीड़ के कारण बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए प्रवेश नहीं दिया गया।

अब गुजरात को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा?

सीजेपी के अभियान को लेकर यह सवाल भी उठता रहा है कि उसकी टीम किन राज्यों में स्कूलों का ऑडिट कर रही है। इसके जवाब में अभिजीत दीपके ने पंजाब, झारखंड और कर्नाटक का उदाहरण दिया है।

अब गुजरात को लेकर उनके बयान ने नई चर्चा शुरू कर दी है। दीपके ने कहा कि उन्हें हैरानी है कि अब तक किसी ने उनसे गुजरात जाने के बारे में नहीं पूछा। यह बयान गुजरात में अभियान शुरू करने की औपचारिक घोषणा नहीं है, लेकिन इससे वहां संभावित दौरे के संकेत जरूर मिलते हैं।

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत महाराष्ट्र से हुई थी और अब यह कई राज्यों तक पहुंच चुका है। ऐसे में अगर सीजेपी गुजरात में भी सरकारी स्कूलों का सोशल ऑडिट शुरू करती है, तो वहां के स्कूलों की स्थिति और स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी।

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