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ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 226 अरब डॉलर के पार, चीन और रूस से सबसे ज्यादा नुकसान

भारत ने ब्रिक्स देशों से फार्मा, इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल समेत छह क्षेत्रों में बाजार पहुंच आसान बनाने की मांग की, आयात और निर्यात के बीच बढ़ा अंतर

Rahul Gupta
नई दिल्ली, 11 सितंबर।

भारत इस साल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में कई देशों के प्रमुख और प्रतिनिधि भारत पहुंचे हैं। ऐसे में ब्रिक्स देशों के साथ भारत के व्यापार की स्थिति भी चर्चा का अहम विषय बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 226.1 अरब डॉलर हो गया है।

18वें ब्रिक्स सम्मेलन में भारत ने बढ़ते व्यापार असंतुलन पर चिंता जताई और सदस्य तथा साझेदार देशों से भारतीय उत्पादों के लिए बाजार पहुंच आसान बनाने की मांग की। भारत ने फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग, केमिकल्स और डिजिटल सर्विस जैसे छह प्रमुख क्षेत्रों में नियमों को सरल बनाने और कस्टम क्लियरेंस की प्रक्रिया तेज करने पर जोर दिया।

ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार बढ़ा, लेकिन घाटा भी बढ़ा

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में भारत और समूह के देशों के बीच बढ़ता व्यापार असंतुलन महत्वपूर्ण मुद्दा बना। वित्त वर्ष 2025-26 में ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा 226.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

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हालांकि, इसी अवधि में भारत और ब्रिक्स देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 417.5 अरब डॉलर हो गया। वित्त वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा करीब 203 अरब डॉलर था। यानी पांच वर्षों में दोनों पक्षों के बीच कारोबार का आकार तेजी से बढ़ा, लेकिन आयात और निर्यात की रफ्तार में बड़ा अंतर बना रहा।

आयात में तेज बढ़ोतरी से बढ़ा व्यापार घाटा

बीते पांच वर्षों में ब्रिक्स देशों को भारत का निर्यात 48.8 प्रतिशत बढ़कर 95.7 अरब डॉलर हो गया। इसके मुकाबले ब्रिक्स देशों से भारत का आयात 131.8 प्रतिशत बढ़कर 321.8 अरब डॉलर पहुंच गया।

भारत के कुल वैश्विक निर्यात में ब्रिक्स बाजारों की हिस्सेदारी करीब 22 प्रतिशत है। वहीं, भारत के कुल वैश्विक आयात में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक है। आयात और निर्यात के बीच यही बड़ा अंतर भारत के बढ़ते व्यापार घाटे की प्रमुख वजहों में शामिल है।

चीन और रूस से सबसे बड़ा व्यापार घाटा

रुबिक्स डेटा साइंसेज के रिसर्च आंकड़ों के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2025 में ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा करीब 224 अरब डॉलर रहा। वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 117 अरब डॉलर था।

इस घाटे में चीन की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर से अधिक रहा। इसके बाद रूस का स्थान है, जिसके साथ भारत का व्यापार घाटा करीब 55 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

मिस्र और इथियोपिया के साथ भारत को व्यापार अधिशेष

ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा एक जैसा नहीं है। मिस्र और इथियोपिया जैसे नए सदस्य देशों के साथ भारत व्यापार अधिशेष की स्थिति में है।

ब्रिक्स के विस्तार के बाद समूह में खाड़ी और अफ्रीकी देशों की भूमिका भी बढ़ी है। ऐसे में भारत इन बाजारों में अपने निर्यात को बढ़ाकर व्यापार संतुलन सुधारने की संभावनाएं तलाश रहा है।

छह क्षेत्रों में आसान बाजार पहुंच की मांग

बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने के लिए भारत ने ब्रिक्स देशों से छह प्रमुख क्षेत्रों में नियम आसान करने का आग्रह किया है। इनमें फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग, केमिकल्स और डिजिटल सर्विस शामिल हैं।

भारत ने इन क्षेत्रों में तकनीकी मानकों को सरल बनाने, प्रक्रियाओं को कम जटिल करने और कस्टम क्लियरेंस में तेजी लाने पर जोर दिया है। भारत का मानना है कि व्यापारिक बाधाएं कम होने से भारतीय निर्यातकों को ब्रिक्स बाजारों में अधिक समान और निष्पक्ष अवसर मिल सकते हैं।

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