मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने की घोषणा, कहा- सरकार की इस पहल से पूरे राज्य में गणेश उत्सव मना रहे समुदायों को मिलेगा सहयोग
Rahul Gupta
अमरावती, 9 सितंबर।
गणेश चतुर्थी के मौके पर आंध्र प्रदेश में उत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इसी बीच राज्य सरकार ने गणेश पंडालों को लेकर बड़ा ऐलान किया है। मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने घोषणा की है कि इस गणेश चतुर्थी पर आंध्र प्रदेश के सभी गणेश पंडालों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।
नारा लोकेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह सरकार की बड़ी त्योहारी पहल है, जिसका उद्देश्य पूरे राज्य में उत्सव मना रहे समुदायों को सहयोग देना और गणेश चतुर्थी के जश्न को और जीवंत बनाना है। उन्होंने भगवान गणेश से सभी परिवारों को समृद्धि, खुशी और सफलता का आशीर्वाद देने की कामना भी की।
आयोजकों को मिलेगी राहत
सरकार के इस फैसले से गणेश उत्सव के दौरान पंडाल लगाने वाले आयोजकों को बिजली के खर्च से राहत मिलने की उम्मीद है। पंडालों में रोशनी और अन्य व्यवस्थाओं के लिए बिजली की जरूरत होती है। ऐसे में मुफ्त बिजली की सुविधा से आयोजन समितियों पर आर्थिक बोझ कम होगा।
आंध्र प्रदेश में ‘विनायक चविथि’ के नाम से मनाया जाता है त्योहार
आंध्र प्रदेश में गणेश चतुर्थी को ‘विनायक चविथि’ के नाम से जाना जाता है। राज्य में यह त्योहार पारंपरिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी 10 दिनों तक चलने वाला हिंदू त्योहार है, जिसे भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
इस दौरान श्रद्धालु अपने घरों में गणेश प्रतिमा स्थापित करते हैं। इसके अलावा विभिन्न इलाकों में सामुदायिक पूजा के लिए बड़े-बड़े पंडाल सजाए जाते हैं और प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है।
मिट्टी और हल्दी से बनाई जाती हैं गणेश प्रतिमाएं
आंध्र प्रदेश में गणेश पूजा की कुछ खास स्थानीय परंपराएं भी हैं। घरों में मिट्टी से बनी प्रतिमा को ‘मट्टी विनायकडु’ और हल्दी से बनी प्रतिमा को ‘सिद्धि विनायकडु’ कहा जाता है। श्रद्धालु इन प्रतिमाओं की पूजा करते हैं।
राज्य के शहरों और कस्बों में सामुदायिक पूजा के लिए गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। सड़कों पर आकर्षक पंडाल सजाए जाते हैं, जहां रोजाना वैदिक मंत्रों, आरती और भोग के साथ पूजा-अर्चना होती है।
मोदक के साथ कुदुमु और अन्नादम का भोग
गणेश उत्सव के दौरान भगवान गणेश को उनके प्रिय मोदक के साथ स्थानीय विशेष प्रसाद का भी भोग लगाया जाता है। इनमें कुदुमु और अन्नादम प्रमुख हैं।
10 दिनों के उत्सव के बाद गणेश प्रतिमाओं की धूमधाम से शोभायात्रा निकाली जाती है और जल में विसर्जन किया जाता है। इसे भगवान गणेश के कैलाश पर्वत लौटने का प्रतीक माना जाता है।
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