अमेरिका के साथ 24 अन्य देशों के समूह का हिस्सा बना भारत, 6G के साथ एआई, रोबोटिक्स और डिजिटल तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर जोर
Rahul Gupta
नई दिल्ली, 8 सितंबर। 5G के विस्तार के बीच भारत ने अब अगली पीढ़ी की संचार तकनीक 6G की तैयारी तेज कर दी है। भारत अमेरिका के नेतृत्व वाली उस वैश्विक पहल का हिस्सा बन गया है, जिसका उद्देश्य 6G तकनीक के विकास, इनोवेशन और साझा सुरक्षा हितों को बढ़ावा देना है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के मुताबिक, भारत अब 6G तकनीक विकसित करने वाले 24 अन्य देशों के समूह में शामिल हो गया है।
यह अहम फैसला अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना स्थित चैपल हिल में आयोजित G20 इनोवेशन मंत्री स्तरीय बैठक के दौरान हुआ। भारत की ओर से केंद्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बैठक में हिस्सा लिया और अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लटनिक के साथ द्विपक्षीय बातचीत की।
6G तकनीक पर ग्लोबल सहयोग
इस वैश्विक समूह का उद्देश्य 6G के क्षेत्र में तकनीकी इनोवेशन को बढ़ावा देना और सहयोग के जरिए सुरक्षित एवं भरोसेमंद संचार तकनीक विकसित करना है। बैठक के अंत में सदस्य देशों के मंत्रियों ने साझा बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि उभरती तकनीकें दुनियाभर के लोगों के लिए विकास और प्रगति के नए अवसर पैदा कर सकती हैं।
भारत का इस पहल में शामिल होना देश की अगली पीढ़ी की डिजिटल तकनीक को लेकर तैयारियों को दर्शाता है। 6G के आने से केवल इंटरनेट की स्पीड बढ़ने की उम्मीद नहीं है, बल्कि एआई, रोबोटिक्स, स्मार्ट डिवाइस और अन्य आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल को भी नई गति मिल सकती है।
सेमीकंडक्टर और एआई पर भी हुई चर्चा
जितिन प्रसाद और हावर्ड लटनिक के बीच हुई बातचीत में 6G के अलावा सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े डेटा सेंटर जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 में अमेरिकी निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया।
दोनों देशों के बीच एआई तकनीक में साझेदारी को मजबूत करने पर भी विचार किया गया। जितिन प्रसाद ने कहा कि सेमीकंडक्टर और एआई जैसे क्षेत्र तेजी से विकसित हो रही डिजिटल अर्थव्यवस्था के बुनियादी आधार हैं।
टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बढ़ रही भारत की भूमिका
G20 इनोवेशन बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग समेत कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। अमेरिकी वाणिज्य विभाग और व्हाइट हाउस ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी ने इस बैठक की मेजबानी में भूमिका निभाई।
6G को लेकर वैश्विक सहयोग में भारत की भागीदारी से एआई, सेमीकंडक्टर और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, साझा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी देशों के बीच सहयोग मजबूत हो सकता है।
भारत के लिए 6G की तैयारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया के कई देशों में अभी 5G नेटवर्क का विस्तार जारी है। ऐसे में अगली पीढ़ी की संचार तकनीक के विकास के शुरुआती चरण में शामिल होकर भारत वैश्विक तकनीकी मानकों और इनोवेशन में अपनी भूमिका मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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