90 वर्षीय सेवानिवृत्त IFS अधिकारी और पर्यावरणविद् ए.एन. येलप्पा रेड्डी के पैदल मार्च के बाद सरकार ने विधेयक वापस लेने का ऐलान किया है
इससे पहले रविवार को बेंगलुरु के लालबाग में 2.8 किलोमीटर का पैदल मार्च निकाला गया
रेड्डी के नेतृत्व में हुए इस मार्च में युवाओं समेत सैकड़ों लोग शामिल हुए
न्यूज़म ब्यूरो
बेंगलुरु, 6 सितंबर। Park Protection Bill को लेकर विरोध तेज होने के बाद सरकार ने इसे वापस लेने का फैसला किया है।
इस फैसले से पहले बेंगलुरु के लालबाग में रविवार को बड़ा पैदल मार्च निकाला गया।
90 वर्षीय पर्यावरणविद् एएन येलप्पा रेड्डी ने इस मार्च का नेतृत्व किया।

Park Protection Bill को लेकर क्यों हुआ विरोध
प्रदर्शनकारी कर्नाटक पार्क संरक्षण संशोधन विधेयक को वापस लेने की मांग कर रहे थे।
कर्नाटक विधानसभा ने पिछले महीने इस विधेयक को पारित किया था।
प्रस्तावित प्रावधान को लेकर पार्कों के सार्वजनिक उपयोग पर सवाल उठाए गए थे।
विधेयक के तहत सरकार को पार्कों की पांच फीसदी जगह सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित करने का अधिकार मिलता।
प्रदर्शनकारियों ने इसे पार्कों की मौजूदा संरचना के लिए चिंताजनक बताया।
उन्होंने पार्कों की जमीन और हरित क्षेत्र की सुरक्षा पर जोर दिया।
Park Protection Bill के खिलाफ लालबाग में मार्च
रविवार सुबह लालबाग में विरोध प्रदर्शन का माहौल नजर आया।
रेड्डी के साथ धीरे-धीरे चलते लोगों की संख्या बढ़ती गई।
कई लोग उनके समर्थन में नारे लगाते हुए मार्च में शामिल हुए।
प्रदर्शन में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे।
लालबाग बेंगलुरु की प्रमुख हरित धरोहरों में शामिल है।
शहर में 1300 से अधिक पार्क मौजूद हैं।
इसी वजह से पार्कों से जुड़े किसी भी फैसले पर लोगों की नजर रहती है।
Park Protection Bill पर मुख्यमंत्री ने क्या कहा

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार रात बड़ा ऐलान किया।
उन्होंने कहा कि सरकार विधेयक को वापस लेगी।
उन्होंने जनता की राय और उनकी चिंताओं को फैसले का आधार बताया।
मुख्यमंत्री के अनुसार इसमें जरूरी संशोधन किए जाएंगे।
इसके बाद विधेयक को दोबारा पेश किया जाएगा।
सरकार का यह कदम विरोध के बीच सामने आया है।
इससे पार्कों के इस्तेमाल को लेकर आगे नई चर्चा शुरू हो सकती है।
कर्नाटक के पार्कों पर बनी रहेगी नजर
Park Protection Bill को वापस लेने की घोषणा के बाद भी मुद्दा खत्म नहीं हुआ है।
सरकार संशोधित प्रावधानों के साथ इसे फिर विधानसभा में ला सकती है।
ऐसे में प्रस्तावित बदलावों पर लोगों और पर्यावरणविदों की नजर रहेगी।
लालबाग मार्च ने पार्कों के संरक्षण को लेकर सार्वजनिक बहस को बढ़ाया है।
90 वर्षीय येलप्पा रेड्डी की मौजूदगी ने इस विरोध को खास ध्यान दिलाया।
प्रदर्शन में युवाओं की भागीदारी भी देखने को मिली।
अब सरकार के अगले कदम का इंतजार किया जा रहा है।
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