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National Teacher Award : चंडीगढ़ के रवि जायसवाल को सम्मान

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National Teacher Award

National Teacher Award 2026 में चंडीगढ़ के विज्ञान शिक्षक रवि कुमार जायसवाल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सम्मानित किया

उन्होंने कबाड़ और बेकार सामान से स्कूल में 3D सीवी रमन डोम थिएटर, मौसम केंद्र और मोबाइल लैब तैयार की

न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़,  05 सितंबर। चंडीगढ़ के लिए 5 सितंबर 2026 का शिक्षक दिवस खास उपलब्धि लेकर आया।
मलोया कॉलोनी के सरकारी मॉडल हाई स्कूल के विज्ञान शिक्षक रवि कुमार जायसवाल को राष्ट्रीय सम्मान मिला।
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पुरस्कार दिया।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चयनित शिक्षकों से बातचीत की थी।
रवि जायसवाल भी इस संवाद में शामिल रहे थे।
उनके अभिनव शिक्षण कार्यों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।

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National Teacher Award के लिए 48 शिक्षक चयनित

इस वर्ष देशभर से 48 शिक्षकों का राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयन हुआ था।
इनमें चंडीगढ़ से रवि कुमार जायसवाल भी शामिल थे।

रवि जायसवाल का जन्म हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में हुआ था।
नौवीं कक्षा के दौरान वह पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ आ गए थे।
वर्ष 2009 में उनकी नियुक्ति विज्ञान शिक्षक के रूप में हुई।

इसके बाद उन्होंने पढ़ाई को किताबों और कक्षा तक सीमित नहीं रखा।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रयोगों और तकनीक के माध्यम से विज्ञान समझाना शुरू किया।

Science Dome से बच्चों को मिला नया अनुभव

रवि जायसवाल ने स्कूल में कबाड़ और बेकार सामान का इस्तेमाल किया।
उन्होंने इसी सामान से 3D सीवी रमन डोम थिएटर तैयार किया।
उन्होंने स्कूल परिसर में मौसम केंद्र भी विकसित किया।

इस पहल के पीछे उनका उद्देश्य जरूरतमंद बच्चों की मदद करना था।
कई बच्चे आर्थिक कारणों से साइंस सिटी की यात्रा नहीं कर पाते थे।
ऐसे विद्यार्थियों को स्कूल में ही विज्ञान का अनुभव देने की कोशिश हुई।

डोम थिएटर में प्रोजेक्टर के जरिए विद्यार्थियों को विज्ञान के अध्याय समझाए जाते हैं।
इससे कठिन विषयों को दृश्य माध्यम से समझना आसान होता है।

Mobile Lab ने बदला पढ़ाई का तरीका

रवि जायसवाल ने स्कूल के पुराने सामान का भी उपयोग किया।
टूटी कुर्सियों और बेंच समेत कई वस्तुओं से उन्होंने मोबाइल लैब बनाई।
यह लैब अलग-अलग कक्षाओं में जाकर विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक शिक्षा देती है।

उनका मानना है कि विज्ञान को केवल किताबों से समझना पर्याप्त नहीं है।
प्रयोगों के जरिए बच्चे विषय को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
इसी सोच के साथ उन्होंने कक्षा को प्रयोगशाला से जोड़ने का प्रयास किया।

दूसरे स्कूलों में भी पहुंची पहल

रवि जायसवाल के बनाए मॉडल का असर दूसरे स्कूलों में भी दिखाई दिया।
उनके काम से प्रेरित होकर कई स्कूलों में डोम और विज्ञान पार्क बने।
कुछ स्कूलों में गणित पार्क जैसी सुविधाएं भी विकसित की गईं।

चंडीगढ़ के 111 स्कूलों में करीब 40 स्कूलों में ऐसी सुविधाएं मौजूद हैं।
इन सुविधाओं में विज्ञान और गणित की व्यावहारिक जानकारी दी जाती है।

विद्यार्थियों को मिली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान

रवि जायसवाल के प्रयासों का असर विद्यार्थियों की उपलब्धियों में भी दिखा है।
उनके विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं।
कई विद्यार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया है।

उनकी शिक्षण पद्धति ने विज्ञान को विद्यार्थियों के लिए अधिक व्यावहारिक बनाया है।
इसी योगदान के चलते उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला।
राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार मिलना उनके शिक्षण सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

 

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