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राज्यपाल कटारिया ने रखी धनास अमृत सरोवर के पुनर्जीवन की आधारशिला

चंडीगढ़, 19 नवंबर। पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करने और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्स्थापन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, पंजाब के राज्यपाल एवं प्रशासक, यू.टी. चंडीगढ़, श्री गुलाब चंद कटारिया ने आज गाँव धनास में अमृत सरोवर के पुनर्जीवन कार्य की आधारशिला रखी। इस कार्यक्रम के साथ एएमआरयूटी 2.0 मिशन के तहत एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना और सतत शहरी विकास को बढ़ावा देना है।
चंडीगढ़, 19 नवंबर। पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करने और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्स्थापन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, पंजाब के राज्यपाल एवं प्रशासक, यू.टी. चंडीगढ़, श्री गुलाब चंद कटारिया ने आज गाँव धनास में अमृत सरोवर के पुनर्जीवन कार्य की आधारशिला रखी। इस कार्यक्रम के साथ एएमआरयूटी 2.0 मिशन के तहत एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना और सतत शहरी विकास को बढ़ावा देना है।
 
कार्यक्रम में सांसद श्री सतनाम सिंह सन्धू, मेयर स्म. हरप्रीत कौर बाबला, आयुक्त नगर निगम चंडीगढ़ श्री अमित कुमार, आईएएस, विशेष आयुक्त श्री प्रदीप कुमार, आईएएस, मुख्य अभियंता श्री सी. बी. ओझा, क्षेत्र पार्षद श्री कुलजीत सिंह सन्धू, श्री हरजीत सिंह, श्री सतिन्दर सिंह सिद्धू, नगर निगम पार्षदगण, चंडीगढ़ प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, नगर निगम के अधिकारी तथा शहर के प्रमुख नागरिक उपस्थित रहे।
 
सभा को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री गुलाब चंद्र कटारिया ने इस परियोजना की शुरुआत पर गहरी संतुष्टि व्यक्त की। उन्होंने कहा कि धनास अमृत सरोवर का पुनर्जीवन केवल एक अवसंरचनात्मक परियोजना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक कल्याण और शहर की सांस्कृतिक धरोहर के प्रति हमारा नैतिक संकल्प है। उन्होंने कहा, “हमारे जल स्रोत हमारे पारिस्थितिक संतुलन की जीवनरेखाएं हैं। इन्हें पुनर्जीवित कर हम स्वच्छ जल सुनिश्चित करते हैं, जैव विविधता को मजबूत करते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ पर्यावरण छोड़ते हैं।”
 
राज्यपाल ने कहा कि यह पहल माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस दूरदर्शी दृष्टिकोण का प्रतिबिंब है, जिसके तहत उन्होंने देश के उपेक्षित और प्राचीन जल स्रोतों के पुनर्जीवन का संकल्प लिया और अमृत सरोवर पहल की शुरुआत की। उनका उद्देश्य केवल पर्यावरण संरक्षण ही नहीं, बल्कि इन पुनर्जीवित जलाशयों को जनता को समर्पित स्वच्छ, सुंदर और जीवंत सार्वजनिक स्थलों में परिवर्तित करना भी है।
 
उन्होंने शहर की मेयर, स्थानीय क्षेत्र पार्षद, नगर निगम के अधिकारियों एवं अभियंताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों तथा स्वयं सहायता समूहों के समन्वित प्रयासों की सराहना की और कहा कि उनके सहयोग से यह दूरदर्शी पहल साकार हो रही है।
 
इस अवसर पर संबोधित करते हुए सांसद श्री सतनाम सिंह सन्धू ने इस पहल को सामूहिक शासन का उत्कृष्ट मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि अमृत सरोवर जैसे प्राकृतिक संसाधनों का पुनर्जीवन स्थिरता और नागरिक कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा, “यह परियोजना न केवल पारिस्थितिक संतुलन को पुनर्स्थापित करेगी, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करेगी।”
 
मेयर श्रीमती हरप्रीत कौर बाबला ने सामुदायिक भागीदारी—विशेषतः शहर की विभिन्न जल संरचनाओं के संरक्षण में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों की भूमिका—पर बल दिया। उन्होंने कहा, “धनास सरोवर का पुनर्जीवन चंडीगढ़ के स्वच्छ, हरित और अधिक सक्षम शहर बनने के सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। नागरिक मिलकर विकास और प्रकृति को साथ लेकर चलने वाला शहर बना सकते हैं।”
 
कार्यक्रम की शुरुआत में क्षेत्र पार्षद श्री कुलजीत सिंह सन्धू ने राज्यपाल, विशिष्ट अतिथियों, अधिकारियों, अभियंताओं और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने पुनर्जीवित प्राकृतिक संपदा की रक्षा और संवर्धन को सामुदायिक दायित्व बताते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि धनास अमृत सरोवर का पुनर्जीवन चंडीगढ़ की सतत विकास, पारिस्थितिक बहाली और सौहार्दपूर्ण शहरी जीवन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
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