Stock Market Today में भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला
सेंसेक्स 400 से अधिक अंक टूटा, जबकि निफ्टी में करीब 150 अंकों की गिरावट दर्ज की गई
न्यूज़म ब्यूरो
नई दिल्ली, 31 अगस्त | सोमवार को सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार दबाव में दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में रहे।
बाजार में यह गिरावट वैश्विक संकेतों के बीच देखने को मिली। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

Stock Market Today में सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव
कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 400 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया।
वहीं, निफ्टी 50 में करीब 150 अंकों की कमजोरी दर्ज की गई।
दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगभग 0.40 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। निवेशकों ने शुरुआती कारोबार में सतर्क रुख अपनाया।
वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा।
Asian Markets में कई प्रमुख सूचकांक टूटे

एशियाई शेयर बाजारों में भी सोमवार को कमजोरी देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का KOSPI 1.46 प्रतिशत गिरा।
KOSPI गिरकर 6,689.95 के स्तर पर पहुंच गया। ताइवान का Weighted Index भी 1.17 प्रतिशत नीचे रहा।
यह सूचकांक 45,789.14 के स्तर तक पहुंच गया। जापान का Nikkei 225 भी 1.08 प्रतिशत गिरा।
Nikkei 225 गिरकर 65,689.00 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।
वहीं, GIFT NIFTY में 147.50 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। यह 24,164.50 के स्तर तक पहुंच गया।
हालांकि, कुछ एशियाई बाजारों में तेजी भी देखने को मिली। Straits Times में 0.45 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
थाईलैंड का SET Composite भी 0.18 प्रतिशत की तेजी के साथ कारोबार करता दिखाई दिया।
Crude Oil की बढ़ती कीमतों का असर
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
ऊंचे तेल दाम महंगाई के दबाव को बढ़ा सकते हैं। इससे कंपनियों की लागत और उपभोक्ता खर्च प्रभावित हो सकता है।
निवेशक फिलहाल वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
Interest Rates को लेकर बनी चिंता
अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बनी संभावनाओं ने भी निवेशकों को सतर्क किया है।
अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो वैश्विक निवेश पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में कई आर्थिक जोखिम बने रह सकते हैं।
इनमें कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कमजोर मानसून और वैश्विक तनाव प्रमुख हैं।
फेडरल रिजर्व का रुख भी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
Stock Market Today : निवेशकों की नजर आगे के संकेतों पर

भारतीय बाजार की आगे की दिशा वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर रह सकती है।
निवेशक कच्चे तेल की कीमतों, ब्याज दरों और अंतरराष्ट्रीय तनाव पर नजर रखेंगे।
घरेलू आर्थिक आंकड़े भी बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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