दिल्ली में ओखला, भलस्वा और गाजीपुर के कूड़े के पहाड़ों पर काम के तहत 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया गया है
इस प्रक्रिया से 100 एकड़ भूमि खाली हुई है
न्यूज़म ब्यूरो
दिल्ली, 31 अगस्त | दिल्ली में वर्षों से बड़ी चुनौती बने कूड़े के पहाड़ों को हटाने का काम जारी है।
ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल साइटों पर बड़े स्तर पर कचरे का प्रसंस्करण किया गया है।
दिल्ली सरकार के अनुसार, तीनों साइटों पर अब तक करीब 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस हुआ है।
इस काम के बाद लगभग 100 एकड़ भूमि को दोबारा उपयोग के लिए खाली किया गया है।

Delhi Landfill Waste पर तीनों साइटों का आंकड़ा
ओखला, भलस्वा और गाजीपुर में अलग-अलग स्तर पर पुराने कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया गया।
| लैंडफिल साइट | प्रोसेस किया गया कचरा | खाली की गई भूमि |
|---|---|---|
| ओखला | करीब 70 लाख मीट्रिक टन | 35 एकड़ |
| भलस्वा | करीब 102 लाख मीट्रिक टन | 45 एकड़ |
| गाजीपुर | करीब 44 लाख मीट्रिक टन | 20 एकड़ |
| कुल | करीब 2.16 करोड़ मीट्रिक टन | 100 एकड़ |
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में कूड़े के पहाड़ लंबे समय से लोगों के लिए समस्या बने हुए थे।
सरकार ने पुराने कचरे को हटाने के लिए वैज्ञानिक और समयबद्ध कार्ययोजना पर काम किया।
100 एकड़ भूमि को दोबारा उपयोग योग्य बनाने की प्रक्रिया
कचरे के प्रसंस्करण के बाद खाली हुई भूमि को भविष्य में दूसरे उपयोगों के लिए तैयार किया जा सकता है।
सरकार का कहना है कि यह अभियान केवल पुराने कचरे को हटाने तक सीमित नहीं है।
लैंडफिल क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को भी बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है।
ओखला, भलस्वा और गाजीपुर के आसपास लंबे समय से कचरे के ढेर बड़ी समस्या बने रहे हैं।
कचरे के प्रसंस्करण से इन क्षेत्रों की भूमि को चरणबद्ध तरीके से खाली किया जा रहा है।
Waste Management के लिए चार नए प्लांट की तैयारी
दिल्ली सरकार ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चार नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट बनाने की तैयारी की है।
इन प्लांट्स का उद्देश्य रोजाना पैदा होने वाले कचरे के प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ाना है।
सरकार चाहती है कि नया कचरा लगातार जमा होकर भविष्य में बड़े लैंडफिल का रूप न ले।
मुख्यमंत्री के अनुसार, लक्ष्य यह है कि दिल्ली में प्रतिदिन उत्पन्न कचरे का समय पर प्रसंस्करण हो।
इससे कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
गाजीपुर के प्रसंस्कृत कचरे से निकलने वाली सामग्री का उपयोग
गाजीपुर लैंडफिल में कचरे के प्रसंस्करण के बाद निकलने वाले इनर्ट मटेरियल का भी उपयोग किया जा रहा है।
इस सामग्री को लो-लाइन क्षेत्रों को भरने के लिए इस्तेमाल किया गया है।
कुछ स्थानों पर इसका उपयोग सड़कों के नीचे बेस तैयार करने में भी किया गया है।
इससे कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण के साथ प्राप्त सामग्री के उपयोग पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
Delhi Landfill Waste के बाद भविष्य की योजना
दिल्ली सरकार का फोकस मौजूदा कूड़े के पहाड़ों को कम करने के साथ भविष्य की व्यवस्था तैयार करना है।
चार नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट इस व्यापक कचरा प्रबंधन योजना का हिस्सा होंगे।
सरकार के अनुसार, नई क्षमता विकसित होने से रोजाना पैदा होने वाले कचरे का तेजी से निपटान संभव होगा।
ओखला, भलस्वा और गाजीपुर में जारी काम के साथ दिल्ली में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को विस्तार दिया जा रहा है।
तीनों लैंडफिल साइटों पर 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण और 100 एकड़ भूमि खाली होना इस प्रक्रिया का प्रमुख हिस्सा है।
यह भी पढ़ें: Gold Silver Rate 31 August 2026 : 10 शहरों में आज का नया रेट
पढ़ने के लिए धन्यवाद
आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।
