न्यूज़म ब्यूरो
लखनऊ, 27 अगस्त। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास के प्रोफेसर दुर्गेश श्रीवास्तव ने कहा कि नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल-तिब्बत सीमा पर एक और अस्थायी बैरियर झील के टूटने का खतरा पैदा हो गया है। चीन ने चेतावनी दी है कि झील अगले 72 घंटे में टूट सकती है। ऐसे में नेपाल-तिब्बत सीमा पर फिर बड़ा खतरा है और 72 घंटे बेहद अहम हैं।बताया जा रहा है कि झील में पानी ओवरफ्लो होना शुरू हो गया है, जिससे आसपास के इलाकों में खतरा बढ़ गया है।
प्रोफेसर श्रीवास्तव ने कहा कि खतरे को देखते हुए तिब्बत के संवेदनशील गांवों को खाली कराया जा रहा है। चीन ने बीजिंग और चेंगदू से विशेष बचाव दल भी भेजे हैं। प्रोफेसर दुर्गेश श्रीवास्तव ने कहा कि यह खतरा ऐसे समय आया है जब नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में पहले ही भीषण बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही हुई है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल में 332 लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के लापता होने की सूचना है। जिइरोंग क्षेत्र में ल्हेंदे नदी में मलबा और चट्टानें गिरने से भी जान-माल का नुकसान हुआ है।
भारत के लिए भी चिंता: नेपाल की नदियों के रास्ते बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में अतिरिक्त जल दबाव का खतरा हो सकता है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि नई झील टूटने पर यूपी या बिहार में निश्चित रूप से बड़ी बाढ़ आएगी। यूपी के कुशीनगर में नारायणी नदी के संभावित उफान को देखते हुए प्रशासन पहले ही सतर्क है।
सबसे महत्वपूर्ण बात: 72 घंटे की चेतावनी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, लेकिन सोशल मीडिया पर चल रहे “30 लाख घन मीटर पानी सीधे बिहार-यूपी में जलप्रलय लाएगा” जैसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं मिली है। प्रोफेसर श्रीवास्तव ने कहा कि स्थिति तेजी से बदल रही है। नेपाल, तिब्बत और भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए अगले 72 घंटे खास तौर पर महत्वपूर्ण है।
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