सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं की “मुफ्त ओरल हेल्थ स्क्रीनिंग” की जाएगी : आरती सिंह राव
‘मुस्कान से मातृत्व तक’ पहल की शुरुआत
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 3 जुलाई। हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने प्रदेश के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को गर्भवती महिलाओं की “मुफ्त ओरल हेल्थ स्क्रीनिंग” करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि मातृ स्वास्थ्य देखभाल को और अधिक मजबूत और व्यापक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) और ई-पीएमएसएमए (ePMSMA) दिवसों पर आने वाली हर गर्भवती महिला के लिए ओरल (मौखिक/दांतों की) स्वास्थ्य जांच को अनिवार्य कर दिया है।
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि ‘मुस्कान से मातृत्व तक’ नाम की इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान होने वाली दांतों और मसूड़ों की समस्याओं का समय रहते पता लगाना और उनका उचित इलाज करना है, ताकि मां और नवजात शिशु दोनों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सके। स्वास्थ्य विभाग ने सभी गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों से इस पहल में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की है ताकि हर मां और बच्चे का भविष्य सुरक्षित और स्वस्थ हो सके।
आरती सिंह राव ने इसे सरकार का ऐतिहासिक निर्णय बताया और कहा कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं। इन बदलावों के कारण मसूड़ों की बीमारी (जिंजिवाइटिस) और दांतों में सड़न जैसी मौखिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा काफी बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य मंत्री राव ने सचेत करते हुए कहा कि गर्भावस्था के दौरान ओरल हेल्थ का ध्यान न रखने या इसमें लापरवाही बरतने से समय से पहले प्रसव (प्रीटर्म बर्थ) और जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने जैसे गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। ऐसे में नियमित ओरल चेक-अप से इन समस्याओं की शुरुआती चरण में ही पहचान हो जाती है, जिससे सही समय पर इलाज और परामर्श देना आसान हो जाता है। उन्होंने सभी भावी माताओं से अपील की कि वे हर महीने की 9, 10, 23 तारीख और महीने के आखिरी वर्किंग डे (कार्य दिवस) पर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मिलने वाली इस मुफ्त ओरल हेल्थ स्क्रीनिंग सेवा का लाभ जरूर उठाएं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), हरियाणा के मिशन डायरेक्टर डॉ. रिपुदमन सिंह ढिल्लों ने इस पहल के जमीनी क्रियान्वयन के बारे में बताया कि इस अभियान के तहत प्रसव पूर्व क्लीनिक (एंटीनेटल क्लीनिक) में आने वाली सभी गर्भवती महिलाओं की बुनियादी ओरल हेल्थ स्क्रीनिंग प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा की जाएगी। यदि किसी महिला को दांतों के विशेष इलाज की आवश्यकता होगी, तो उसे आगे की जांच और उपचार के लिए नजदीकी सरकारी दंत चिकित्सा केंद्र में रेफर किया जाएगा।
डॉ. ढिल्लों ने कहा कि इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए राज्य के सभी सिविल सर्जनों को कड़े निर्देश जारी किए जा चुके हैं ताकि प्रसव पूर्व देखभाल करने वाली टीमों और डेंटल टीमों के बीच बेहतर तालमेल बना रहे और लाभार्थियों को बिना किसी परेशानी के स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। इसके साथ ही, स्वास्थ्य कर्मी गर्भवती महिलाओं को ओरल हाइजीन बनाए रखने, ब्रश करने के सही तरीकों, पौष्टिक आहार और गर्भावस्था के दौरान समय पर दांतों के इलाज के महत्व के बारे में भी जागरूक करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि डॉक्टरी देखरेख में गर्भावस्था के दौरान दांतों की सामान्य जांच और इलाज पूरी तरह से सुरक्षित है।
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