तृप्ति भटनागर
जबलपुर | रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का 36वां दीक्षांत समारोह बीते दिनों गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं और उन्होंने विद्यार्थियों को रचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा उद्यमिता की भावना के साथ राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का प्रेरक संदेश दिया।
समारोह में मध्यप्रदेश के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री मंगुभाई पटेल की अध्यक्षता में विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। विश्वविद्यालय के इतिहास के महत्वपूर्ण आयोजनों में शामिल इस समारोह में 240 स्वर्ण पदक और 182 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि सहित हजारों विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि आज का युग ज्ञान, नवाचार और तकनीकी परिवर्तन का युग है। ऐसे समय में युवाओं की भूमिका केवल नौकरी प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें रोजगार सृजन, अनुसंधान, नवाचार और समाज के सकारात्मक परिवर्तन में भी योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है।
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग देश के विकास, सामाजिक उत्थान और मानव कल्याण के लिए करें। उन्होंने कहा कि भारत आज विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने में युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
विकसित भारत-2047 के संकल्प को नई ऊर्जा
समारोह में यह भावना प्रमुख रूप से उभरकर सामने आई कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में शिक्षित और जागरूक युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी। राष्ट्रपति ने कहा कि नई पीढ़ी को केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, सामाजिक संवेदनशीलता और नवाचार की सोच को भी अपनाना होगा।
उन्होंने विद्यार्थियों को जीवनभर सीखते रहने, चुनौतियों का सामना करने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को विकसित करने की सलाह दी। राष्ट्रपति ने कहा कि ज्ञान और कौशल का उपयोग तभी सार्थक होता है जब वह समाज और देश के विकास में योगदान दे।
उत्कृष्ट प्रतिभाओं का हुआ सम्मान
दीक्षांत समारोह के दौरान विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। कुल 240 स्वर्ण पदक वितरित किए गए, जबकि 182 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान कर उनके वर्षों के शोध और परिश्रम को सम्मानित किया गया।
समारोह में मौजूद विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए यह क्षण विशेष रूप से भावुक और गौरवपूर्ण रहा। वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम जब मंच पर सम्मान के रूप में मिला तो पूरे परिसर में उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला।

शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार से बनेगा आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि उच्च शिक्षा संस्थान केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे नवाचार, अनुसंधान और सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख माध्यम हैं। मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि प्रदेश के युवा राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।
समारोह में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने विश्वास व्यक्त किया कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से निकलने वाली नई पीढ़ी प्रदेश और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
युवाओं के लिए प्रेरणा बना दीक्षांत समारोह
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का 36वां दीक्षांत समारोह केवल उपाधियां वितरित करने का आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह युवाओं को बड़े सपने देखने, समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने की प्रेरणा देने वाला अवसर भी बना।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रेरक संदेश और विद्यार्थियों की उपलब्धियों ने यह स्पष्ट किया कि ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्रसेवा का संगम ही विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश की मजबूत नींव तैयार करेगा।
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