तृप्ति भटनागर
भोपाल। मध्य प्रदेश को तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को भोपाल स्थित अपने निवास पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की कार्यप्रणाली, योजनाओं और चल रही गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति, भविष्य की योजनाओं और तकनीकी नवाचारों से जुड़े विषयों पर प्रस्तुतीकरण दिया।
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को प्रदेश के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि वर्तमान दौर ज्ञान, अनुसंधान और तकनीक का है। ऐसे में मध्य प्रदेश को भी नवाचार, वैज्ञानिक सोच और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने की आवश्यकता है।
नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की योजनाओं को केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और युवा नवाचारकों से भी जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत उन्हें सही मंच और संसाधन उपलब्ध कराने की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना समय की मांग है। यदि युवा अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास से जुड़ेंगे तो इससे न केवल नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी।
तकनीक आधारित सुशासन पर सरकार का फोकस
डॉ. मोहन यादव ने बैठक में कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए तकनीक का व्यापक उपयोग कर रही है। डिजिटल सेवाओं, डेटा आधारित निर्णय प्रणाली और आधुनिक तकनीकी समाधानों के माध्यम से आम नागरिकों तक सरकारी सेवाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ऐसी परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दे, जिनका सीधा लाभ आम नागरिकों, किसानों, विद्यार्थियों और उद्यमियों को मिल सके। तकनीक का उपयोग केवल विकास परियोजनाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह लोगों के जीवन को सरल और बेहतर बनाने का माध्यम भी बनना चाहिए।
युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसरों पर चर्चा
बैठक में प्रदेश में नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Innovation Ecosystem) को मजबूत करने, स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने और तकनीकी अनुसंधान संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि युवाओं को नई तकनीकों, शोध परियोजनाओं और नवाचार कार्यक्रमों से जोड़ने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विज्ञान और तकनीक ही विकास की दिशा तय करेंगे। ऐसे में मध्य प्रदेश को इस क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय और दूरदर्शी योजना की आवश्यकता है।
विकसित मध्य प्रदेश की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल विकास करना नहीं, बल्कि ऐसा विकास सुनिश्चित करना है जो आधुनिक, टिकाऊ और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप हो। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और प्रदेश को नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने में योगदान दे सकता है।
भोपाल में आयोजित यह समीक्षा बैठक राज्य सरकार की उस सोच को भी दर्शाती है, जिसमें तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को विकसित मध्य प्रदेश के निर्माण का प्रमुख आधार माना जा रहा है।
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