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मॉडल ऑनलाइन स्थानांतरण नीति 2026 और शिक्षक स्थानांतरण नीति 2026 मंजूर : सैनी

न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़, 22 जून। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में मानव संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करने, कर्मचारियों की संतुष्टि को बढ़ावा देने, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और व्यापक जनहित में सार्वजनिक सेवा वितरण को मजबूत करने के उद्देश्य से मॉडल ऑनलाइन स्थानांतरण नीति (MOTP), 2026 और शिक्षक स्थानांतरण नीति (TTP), 2026 को मंजूरी दे दी है।

ये संशोधित नीतियां पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की टिप्पणियों के साथ-साथ विभिन्न हितधारकों से प्राप्त फीडबैक पर उचित विचार करने के बाद तैयार की गई हैं।न्यायालय ने, अन्य बातों के अलावा, पिछली स्थानांतरण व्यवस्था के तहत आयु को दिए गए महत्व (वेटेज) और दंपत्ति मामलों (couple cases) को दिए गए कम मेरिट अंकों आदि को लेकर चिंता व्यक्त की थी, जिसके बाद हितधारकों के फीडबैक को शामिल करते हुए इन चिंताओं को दूर करने के लिए नीतिगत ढांचे की व्यापक समीक्षा की गई है।

नई नीतियों के तहत, स्थानांतरण के उद्देश्यों के लिए कर्मचारी रैंकिंग एक संशोधित 120-अंकीय समग्र स्कोरिंग ढांचे के माध्यम से निर्धारित की जाएगी। इसमें आयु को दिए गए वेटेज को 75% से घटाकर 25% कर दिया गया है, जबकि व्यावसायिक अनुभव और सेवा की निरंतरता को मान्यता देने के लिए एक नया पैरामीटर “कैडर में अनुभव” शुरू किया गया है, जिसका वेटेज 25% होगा। इसके अलावा, विशेष कारकों के लिए आवंटित वेटेज को 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया गया है, जिससे वास्तविक कठिनाइयों और विशेष परिस्थितियों का सामना करने वाले कर्मचारियों को अधिक राहत मिलेगी। कर्मचारी कल्याण प्रावधानों के एक महत्वपूर्ण विस्तार के रूप में, मान्यता प्राप्त गंभीर बीमारियों की सूची को व्यापक बनाया गया है, जिसमें अब मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, बेहचेट रोग, और अग्न्याशय व बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसे निर्दिष्ट अंग प्रत्यारोपण मामलों को शामिल किया गया है। साथ ही, नीतियां एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय भी पेश करती हैं, जिसके तहत सेवानिवृत्ति के एक वर्ष के भीतर किसी भी कर्मचारी या शिक्षक का स्थानांतरण उनकी स्पष्ट लिखित सहमति के बिना नहीं किया जाएगा।

नियमित सरकारी सेवा करने वाले जोड़ों के लिए समर्थन को और मजबूत करते हुए दंपत्ति मामले की श्रेणी के तहत मिलने वाले मेरिट अंकों को 5 से बढ़ाकर 10 अंक कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, पात्र संगठनों की परिभाषा का विस्तार करते हुए इसमें किसी भी सरकार के नियमित कर्मचारियों को शामिल किया गया है, बशर्ते वे हरियाणा, चंडीगढ़ या दिल्ली में तैनात हों। प्रक्रियात्मक दक्षता और पारदर्शिता में सुधार के लिए, ये नीतियां सुव्यवस्थित समय-सीमा प्रदान करती हैं और “श्रेणी” की अवधारणा पेश करती हैं, जिससे स्थानांतरण अभियानों के दौरान भाग लेने वाले और भाग न लेने वाले कर्मचारियों के बीच स्पष्ट अंतर किया जा सके।

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इन नीतियों की अधिसूचना के साथ ही, मॉडल ऑनलाइन स्थानांतरण नीति, 2025 और शिक्षक स्थानांतरण नीति, 2025 के प्रावधानों के तहत शुरू किए गए कोई भी स्थानांतरण अभियान बंद माने जाएंगे, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी पात्र कर्मचारियों को 2026 के नीतिगत ढांचे के तहत स्थापित अधिक निष्पक्ष और संतुलित मानदंडों का लाभ मिले।

कैबिनेट ने मानव संसाधन विभाग को MOTP, 2026 के तहत पहले ऑनलाइन स्थानांतरण अभियान के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने के लिए अधिकृत किया है, विशेष रूप से ‘नोशनल श्रेणी’ और उन कैडरों के संबंध में जहां वर्तमान कर्तव्य प्रभार (CDC) व्यवस्थाएं लागू हैं। ये पुनर्गठित नीतियां प्रशासनिक दक्षता और कर्मचारी कल्याण को सुनिश्चित करते हुए एक निष्पक्ष, पारदर्शी, वस्तुनिष्ठ और तकनीक-संचालित स्थानांतरण प्रणाली के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराती हैं।

एचपीएसएन की दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना (दयालू-Ⅰ) में संशोधन मंजूर

चंडीगढ़, 22 जून। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास (एच०पी०एस०एन०) की दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना (दयालू-Ⅰ) में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई।

योजना में संशोधन के अनुसार दावा प्रस्तुत करने की अवधि का विस्तार तथा पूर्वव्यापी राहत देते हुए अब सभी भविष्य के दावों के लिए दावा भरने की अवधि को मृत्यु / विकलांगता की तारीख से 3 महीने से बढ़ाकर 6 महीने करना और आज तक दायर किए गए सभी दावों के लिए 3 महीने की पूर्वव्यापी छूट (यानी मृत्यु / विकलांगता की तारीख से 6 महीने तक) की अवधि होगी।

इसके साथ ही स्तरीकृत विलालम्ब क्षमा तंत्र में अब भविष्य के सभी दावों के लिए निम्नानुसार प्रत्यायोजित शक्तियों के साथ एस स्तरित विलम्ब क्षमा तंत्र होगा। इसके तहत 6 महीने से अधिक और 7 महीने तक की देरी के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एचपीएसएन और 7 महीने से अधिक और 9 महीने तक की देरी के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव, वित्त विभाग तथा 9 महीने से अधिक और 12 महीने तक की देरी के लिए वित्तमंत्री को शक्तियां दी गई है।

योजना में अब एक संरचित शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाएगा जिसमें उपायुक्त (डीसी) क्षेत्र स्तर के अधिकारियों के रूप में कार्य करेंगे और मुख्यालय स्तर पर मौजूदा अधिकारियों के अतिरिक्त अ०सां०का०वि० के जिला सांख्यिकीय अधिकारी (जि०स०अ०) जिला स्तर पर दयालू-1 योजना के नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।

इलेक्ट्रिक (EV) तथा सीएनजी ट्रकों एवं बसों की खरीद पर मोटर वाहन कर में 100 प्रतिशत छूट मिलेगी 

चंडीगढ़, 22 जून। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) की सहायता योजना के तहत राज्य के एनसीआर जिलों में पुराने ट्रकों एवं बसों (बीएस-IV अथवा उससे पूर्व उत्सर्जन मानकों वाले) के प्रतिस्थापन पर मोटर वाहन कर में छूट प्रदान करने को मंजूरी दी गई।

ट्रकों एवं बसों के लिए पात्र लाभार्थियों को नए बीएस-VI अथवा उससे कड़े उत्सर्जन मानकों वाले, इलेक्ट्रिक (EV) तथा सीएनजी ट्रकों एवं बसों की खरीद पर मोटर वाहन कर में 100 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी।

इसके अतिरिक्त, ट्रकों एवं बसों के लिए योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को पुराने (Used) बीएस-VI अथवा उससे कड़े उत्सर्जन मानकों वाले, इलेक्ट्रिक (EV) तथा सीएनजी ट्रकों एवं बसों की खरीद पर मोटर वाहन कर में 50 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी। दोनों ही मामलों में मोटर वाहन कर में यह छूट 10 वर्ष की अवधि के लिए मान्य होगी।

इसके अलावा, योजना के तहत खरीदे गए नए वाहनों के पंजीकरण पर पंजीकरण शुल्क में भी छूट प्रदान की जाएगी। साथ ही, योजना में पुराने ट्रकों एवं बसों के साथ भाग लेने वाले लाभार्थियों को एक वर्ष से अधिक समय से लंबित देनदारियों में छूट प्रदान की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि हरियाणा के राज्यपाल ने भी राज्य के एनसीआर जिलों में पंजीकृत पुराने बीएस-IV अथवा उससे पूर्व उत्सर्जन मानकों के अनुरूप ट्रकों एवं बसों के संबंध में एक वर्ष से अधिक समय से लंबित बकाया देनदारियों में छूट प्रदान की है।

इस प्रोत्साहन से वाहन बेड़े के आधुनिकीकरण में तेजी आने, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी लाने तथा राज्य के एनसीआर जिलों में वायु गुणवत्ता में सुधार होने की अपेक्षा है, जिसमें 93458 ट्रक और 16329 बसें शामिल है।

 

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