सवाल: यदि महाराजा रणजीत सिंह श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश हो सकते थे, तो मान क्यों नहीं?
चंडीगढ़, 16 जून। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब के खिलाफ खुले तौर पर टकराव का रुख नहीं अपनाना चाहिए।
मुख्यमंत्री मान द्वारा उनके खिलाफ जारी श्री अकाल तख्त साहिब के हुकमनामे को खारिज किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए, वड़िंग ने कहा कि भले ही मुख्यमंत्री को अपना पक्ष रखने और अपनी बात कहने का पूरा अधिकार है, लेकिन वह यह सब श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा और अधिकारिता को कमजोर करने वाले रवैये के बिना भी कर सकते थे। ऐसे टकराव से बचा जा सकता था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री को इस मामले का राजनीतिकरण करने से बचना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार को सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था के मुकाबले खड़ा करना राज्य के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की अधिकारिता को कमजोर करने का कोई भी प्रयास किसी भी सच्चे सिख के लिए स्वीकार्य नहीं होगा।
वड़िंग ने जोर देते हुए, कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री होने के नाते मान की अतिरिक्त जिम्मेदारी बनती है कि वह श्री अकाल तख्त साहिब की पवित्रता तथा उसकी गरिमा और मर्यादा का सम्मान करें। मुख्यमंत्री को महाराजा रणजीत सिंह से सीख लेनी चाहिए, जिन्होंने महान सिख साम्राज्य के शासक होने के बावजूद श्री अकाल तख्त साहिब के तत्कालीन जत्थेदार के आदेश को स्वीकार किया था और श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश हुए थे। उन्होंने सवाल किया कि यदि महाराजा रणजीत सिंह श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश हो सकते थे, तो मुख्यमंत्री भगवंत मान क्यों नहीं ?
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