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पशु-पक्षियों के संरक्षण में जनभागीदारी जरूरी : राव नरबीर सिंह

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पर्यावरण, वन और वन्य जीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने पंचकूला में विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में करी शिकरत 

पर्यावरण संरक्षण के लिए सिंगल-यूज प्लास्टिक व पॉलिथीन का उपयोग न करने का लें संकल्प : राव नरबीर सिंह 

न्यूज़म ब्यूरो 

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पंचकूला। हरियाणा के पर्यावरण, वन और वन्य जीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि पशु-पक्षियों का आदिकाल से हमारे जीवन में विशेष महत्व रहा है। देवी-देवताओं का भी पशु-पक्षियों से गहरा संबंध रहा है, जो हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है। इनके संरक्षण के लिए सरकारी प्रयासों के साथ-साथ जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

राव नरबीर सिंह विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर पंचकूला में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 2 फरवरी से 21 फरवरी तक प्रदेश में आयोजित होने वाले प्रथम हरियाणा पक्षी उत्सव-2026 के पोस्टर का विमोचन किया तथा उत्सव के दौरान होने वाली विभिन्न गतिविधियों के कैलेंडर का लोकार्पण कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।

राव नरबीर सिंह ने कार्यक्रम के शीर्ष वाक्य “आर्द्रभूमियां और पारंपरिक ज्ञान-प्रकृति एवं संस्कृति का उत्सव” की सराहना करते हुए कहा कि हरियाणा में सुल्तानपुर (गुरुग्राम) और भिंडावास (झज्जर) दो प्रमुख वेटलैंड हैं, जहां हर वर्ष हजारों प्रवासी पक्षी विभिन्न देशों से आते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान कुछ प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई थीं, लेकिन सरकार का प्रयास है कि वेटलैंड्स पर आने वाले पक्षियों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि हर वर्ष अधिक संख्या में प्रवासी पक्षी यहां आएं।

उन्होंने बताया कि गुरुग्राम के बसई, चंदू तथा आसपास के तीन-चार गांवों में हजारों एकड़ भूमि पर जलभराव रहता है। इनमें से 200-300 एकड़ क्षेत्र में झील विकसित कर उसे पर्यटन स्थल के रूप में बदला जा सकता है, जिससे दिल्ली-एनसीआर के लोग भ्रमण के लिए आ सकेंगे और क्षेत्र को पॉलिथीन व प्लास्टिक से भी निजात मिलेगी।

वन मंत्री ने कहा कि हरियाणा में सिंगल-यूज प्लास्टिक और पॉलिथीन के निर्माण पर वर्ष 2013 से प्रतिबंध है, लेकिन इसके बावजूद इनका प्रयोग हो रहा है। इस कानून की सफलता जनभागीदारी के बिना संभव नहीं है। उन्होंने लोगों से सिंगल-यूज प्लास्टिक व पॉलिथीन का उपयोग न करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

उन्होंने बताया कि पॉलिथीन जलाने से जहरीली गैसें निकलती हैं, जो वातावरण को प्रदूषित करती हैं, जबकि जमीन में दबाने पर इसे गलने में लगभग 450 वर्ष लग जाते हैं। साथ ही यह शहरों की सीवरेज लाइनों की जल निकासी को भी प्रभावित करती है। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि उनका लक्ष्य पॉलिथीन-मुक्त हरियाणा बनाना है, जिसके लिए जन-सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि लगभग 40 प्रतिशत प्रदूषण पॉलिथीन के प्रयोग से होता है।

उन्होंने कहा कि हरियाणा वेटलैंड अथॉरिटी और तालाब प्राधिकरण का गठन किया गया है। जोहड़ों और तालाबों के जल को स्वच्छ बनाने के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी बेहद जरूरी है।

इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) डॉ विवेक सक्सेना ने विश्व आर्द्रभूमि दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी शुरुआत वर्ष 1975 में हुई थी। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, इसी संदेश को देने के लिए हर वर्ष नई थीम के साथ यह दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम “आर्द्रभूमियां और पारंपरिक ज्ञान-प्रकृति एवं संस्कृति का उत्सव” रखी गई है।

कार्यक्रम में कालका की विधायक शक्ति रानी शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख विनीत कुमार गर्ग और पीसीसीएफ कैलाश चंद मीणा, डॉ टीपी सिंह, वासवी त्यागी, नवदीप सिंह हुड्डा सहित विभाग के अन्य अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी उपस्थित रहे।

 

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