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हरियाणा श्वेत क्रांति से स्वीट क्रांति की ओर, 2030 तक लक्ष्य 15500 एमटी शहद उत्पादन का : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंचकूला मे विश्व मधुमक्खी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मधुमक्खी पालकों को किया संबोधित

हरियाणा सरकार द्वारा मधुमक्खी पालन को भावांतर भरपाई योजना में  किया शामिल, शहद के लिए 120 रूपये प्रति किलो संरक्षित मूल्य तय

नायब सिंह सैनी ने भावांतर भरपाई योजना के तहत किसानों के खातों में 1.02 करोड रूपये की राशि की जारी

हरियाणा बना मधुमक्खी पालकों के रजिस्ट्रेशन में नंबर वन

मधुमक्खियां कृषि और पर्यावरण की रीढ : नायब सिंह सैनी

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न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़, 20 मई। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के श्वेत क्रांति से स्वीट क्रांति के आहवान पर आगे बढते हुए मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए मधुमक्खी पालन नीति बनाई । इस नीति के तहत वर्ष 2030 तक मधुमक्खी पालकों की संख्या बढ़ाकर 7 हजार 750 करने और शहद उत्पादन 15 हजार 500 मीट्रिक टन करने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री आज सैक्टर-1 स्थित रेड बिशप कनवेंशन सैंटर में हरियाणा उद्यान विभाग द्वारा विश्व मधुमक्खी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यअतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा भी उपस्थित थे।

इससे पहले मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए मधुमक्खी पालकों द्वारा शहद और शहद से बने उत्पादों के स्टालस का अवलोकन किया और उनमें गहरी रूचि दिखाई।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विश्व मधुमक्खी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार मधुमक्खी पालन को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इस क्षेत्र में अपार संभावनाओं को देखते हुए अनेक योजनाएं शुरू की गई हैं। मधुमक्खी पालकों को मधुमक्खी के बक्सों, कॉलोनियों और उपकरणों पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध करवा रहे हैं।

उन्होने बताया कि मधुमक्खी पालन से जुडे किसानों को अनिश्चितता और बाजार के उतार-चढाव से राहत दिलाते हुए हरियाणा सरकार द्वारा मधुमक्खी पालन को भी भावांतर भरपाई योजना में शामिल किया गया है। इस योजना के तहत शहद का, संरक्षित मूल्य 120 रुपये किलो तय किया गया है। इससे अब किसान को नुकसान होने का डर नहीं रहता और उन्हें एक निश्चित आय की गारंटी मिली है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने  30 किसानों के खातों में भावांतर भरपाई योजना के तहत 1 करोड़ 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी की।

उन्होने बताया कि इसके अलावा मधुमक्खी पालकों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए मधुमक्खी पालन को मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना में शामिल करने का निर्णय लिया है। उन्होने बताया कि नेशनल मधुक्रांति पोर्टल पर हरियाणा के 3 हजार से अधिक मधुमक्खी पालक रजिस्टर्ड हैं। मधुमक्खी पालकों के रजिस्ट्रेशन करवाने में हरियाणा राज्य प्रथम स्थान पर है।

उन्होने कहा कि विश्व मधुमक्खी दिवस एक छोटे से जीव को लेकर मनाया जा रहा दिन है। लेकिन यह धरती पर जीवन को बचाने के लिए किया जा रहा एक महान प्रयास है। हमारे वैज्ञानिक पूरी मानव जाति को बार-बार चेताते आ रहे हैं कि यदि मधुमक्खियां खत्म हो गई तो जीवन भी खतरे में आ जाएगा। पूरी दुनिया को इसी बात के प्रति जागरूक करने के लिए हर वर्ष 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस मनाया जाता है। हमारे वेदों, पुराणों और भारतीय संस्कृति में भी मधु और मधुमक्खियों का विशेष महत्व बताया गया है। ऋग्वेद में मधु को समृद्धि, शुद्धता और स्वास्थ्य का प्रतीक माना गया है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि मधुमक्खियां केवल प्रकृति की संरक्षक नही है बल्कि ये कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ भी हैं। आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, तब मधुमक्खियों का महत्व और अधिक बढ़ गया है। लेकिन चिंता की विषय है कि आज मधुमक्खियां खतरे में है। कीटनाशकों का प्रयोग, प्रदूषण, जंगलों की कटाई और जलवायु परिवर्तन के कारण इनकी संख्या लगातार कम हो रही है। उन्होने किसानों से आहवान करते हुए कहा कि वे सरसों, सूरजमुखी, कपास, बरसीम और विभिन्न फलों व सब्जियों की खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन भी करें। इससे शहद उत्पादन के साथ-साथ मधुमक्खियों द्वारा पर-परागण करने से फसलों की पैदावार में बढ़ोतरी होगी।

उन्होने कहा कि मधुमक्खियों का महत्व केवल खेती तक ही सीमित नहीं है। वर्तमान समय में मधुमक्खी पालन रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन चुका है। कम लागत, कम जमीन और कम संसाधनों में शुरू होने वाला यह व्यवसाय लाखों लोगों को रोजगार प्रदान कर रहा है। मधुमक्खी हमें शहद के अलावा रॉयल जेली, बी-वैक्स, प्रोपोलिस, बी-पॉलेन और बी-वेनम जैसे कई बहुमूल्य उत्पाद भी देती है। इनकी बाजार में, विशेषकर फार्मा और कॉस्मेटिक उद्योगों में भारी मांग है। इन उत्पादों का मूल्य शहद से कई गुणा अधिक है।

नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार मधुमक्खी पालन को बढ़ाने का निरंतर प्रयास कर रही हैं। मधुमक्खी पालन को व्यावसायिक ढंग से चलाने में सहयोग करने के लिए कुरूक्षेत्र के रामनगर में इजरायल की तकनीक पर आधारित देश का पहला एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केन्द्र स्थापित किया गया है। इस केन्द्र में किसानों को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें शहद व्यापार केन्द्र भी स्थापित किया गया है। इस केंद्र पर लगभग 800 टन शहद का व्यापार हो चुका है। इसी केंद्र में शहद निकालने, भंडारण, प्रसंस्करण और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शहद के विपणन का प्रशिक्षण दिया जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की ज्यादातर भूमि खेती के अधीन है। इसी कारण हमारे यहां जंगलों और बागों की कमी है। फिर भी प्रदेश के प्रगतिशील किसानों ने नेशनल बीकीपिंग एंड हनी मिशन में महत्वपूर्ण योगदान किया है। हरियाणा में लगभग 5 हजार मीट्रिक टन शहद उत्पादन होता है। उन्होने कहा कि हमने मधुमक्खी पालन सहित बागवानी को कृषि विविधिकरण का एक प्रमुख स्तंभ बनाया है। प्रदेश में वर्ष 2014 में कुल बागवानी क्षेत्र 1 लाख 17 हजार एकड़ था, जो आज बढ़कर दोगुणा से भी अधिक यानी 2 लाख 73 हजार एकड़ हो गया है।

नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज भूमि जोत छोटी होती जा रही है। इसलिए, किसान मधुमक्खी पालन करके अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। यह ऐसा व्यवसाय है, जिसमें कम जमीन की आवश्यकता होती है। भूमिहीन, कम पढ़े-लिखे, अनपढ़, यहां तक महिलाएं भी प्रशिक्षण लेकर इस व्यवसाय को सफलतापूर्वक चला सकती हैं। कई राज्यों में महिलाएं सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के माध्यम से शहद उत्पादन और विपणन कर रही हैं। हरियाणा में भी युवा स्टार्टअप के रूप में हनी ब्रांड लांच करके न केवल अपनी कमाई बढ़ा सकते हैं, बल्कि प्रदेश की पहचान भी बना सकते हैं। इसके लिए हरियाणा सरकार द्वारा वितिय सहायता और तकनीकी मार्गदशर्न उपलब्ध करवाया जाएगा ताकि हरियाणा को हनी हब बनाया जाए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 11 प्रगतिशील मधुमक्खी पालकों को 11-11 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होने बागवानी विभाग द्वारा प्रकाशित (हरियाणा स्ट्राईडस अहेड इन हार्टिकल्चर) नामक पुस्तक का विमोचन भी किया।

इससे पूर्व, हरियाणा के कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि हरियाणा कृषि प्रधान प्रदेश है और इसका देश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान है। उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों की आय बढाने के लिए निंरतर कार्य कर रही है और इस दिशा में अनेक योजनाएं भी लागू की है। हरियाणा देश का पहला राज्य है जहां 24 फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा रही है।

उन्होने कहा कि राज्य सरकार ने खेतों के लिए खाद और किसानों के लिए भाव सुनिश्चित किया है ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। किसानों की आय बढाने और लोगों के स्वास्थ्य दोनो को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में जैविक और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत 10 जिलों में प्रयोगशालाएं भी स्थापित की जा रही है।

इस अवसर पर विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता, बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष बंतो कटारिया, नवनिर्वाचित मेयर श्याम लाल बंसल, कृषि एंव किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार, बागवानी विभाग के महानिदेशक डाॅ रणबीर सिंह, बागवानी विभाग के एचओडी (विशेष) डाॅ अर्जुन सैनी, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ बीआर कंबोज, मुख्यमंत्री के ओएसडी वीरेंद्र बढखालसा, मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीण अत्रे सहित प्रदेशभर से आए मधुमक्खी पालक और विशेषज्ञ शामिल थे।

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