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डंपिंग रोकने का आह्वान, दादूमाजरा में CBG संयंत्र से चंडीगढ़ को स्वच्छ ऊर्जा की मिली नई दिशा : प्रशासक गुलाब चंद कटारिया

न्यूज़म ब्यूरो 
 
चंडीगढ़, 19 जनवरी : स्वच्छ और हरित शहर की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आज चंडीगढ़ नगर निगम ने दादूमाजरा डंपिंग ग्राउंड में संपीडित बायोगैस (सीबीजी) प्लांट की स्थापना के लिए भूमि चिन्हित की। यह प्लांट पृथक किए गए जैविक कचरे से स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन करेगा और कचरा प्रबंधन में मदद करेगा। समारोह के दौरान पंजाब के राज्यपाल एवं यू.टी. चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

 

उनके साथ चंडीगढ़ की महापौर हरप्रीत कौर बबला; राज्यपाल के प्रधान सचिव वी.पी. सिंह; गृह सचिव-सह-सचिव, स्थानीय सरकार मंदीप सिंह बराड़; मुख्य वन संरक्षक सौरभ कुमार; आयुक्त, नगर निगम चंडीगढ़ अमित कुमार; विशेष आयुक्त, एमसीसी प्रदीप कुमार; कार्यकारी निदेशक, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) डॉ. अजीत कुमार ठाकुर; सहित चंडीगढ़ प्रशासन, नगर निगम के अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
 
 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अब सही कचरा प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा समाधान अत्यंत आवश्यक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि शहरों को पुराने तरीके से कचरा डंप करने की बजाय कचरे को एक उपयोगी संसाधन के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने बताया कि दादूमाजरा डंपिंग ग्राउंड लंबे समय से स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का कारण रहा है और प्रशासन इसे सुधारने के लिए लगातार काम कर रहा है।

 

राज्यपाल ने कहा कि दादूमाजरा को डंपिंग ग्राउंड से स्वच्छ ऊर्जा केंद्र में बदलना चंडीगढ़ के लिए गर्व की बात है और यह देश के अन्य शहरों के लिए भी एक उदाहरण बनेगा। उन्होंने इस परियोजना में साझेदारी के लिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड की सराहना की और कहा कि कचरे से वाहनों के लिए बायोगैस बनाना एक दूरदर्शी और टिकाऊ कदम है।
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उन्होंने नगर निगम चंडीगढ़ की प्रशंसा करते हुए कहा कि निगम ने वैज्ञानिक तरीकों से पुराने कचरे को साफ करने का कार्य सफलतापूर्वक किया है। उन्होंने बताया कि सीबीजी प्लांट के लिए भूमि चिन्हांकन वर्ष 2019 से चल रहे चरणबद्ध सफाई कार्य का परिणाम है।
राज्यपाल ने बताया कि लगभग 28 एकड़ भूमि को कचरे से मुक्त किया गया है, जिससे प्रदूषण, दुर्गंध और स्वास्थ्य जोखिमों में काफी कमी आई है। इससे क्षेत्र में पर्यावरणीय संतुलन बहाल हुआ है और साफ की गई भूमि का उपयोग अब बेहतर और टिकाऊ तरीके से किया जा सकेगा।
 
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IOCL के प्रयासों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि अत्याधुनिक सीबीजी प्लांट ऐसे मॉडल के तहत स्थापित किया जा रहा है, जिसमें परियोजना की डिज़ाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी IOCL की होगी। इस पर नगर निगम चंडीगढ़ को कोई खर्च नहीं करना होगा। यह प्लांट प्रतिदिन 200 टन जैविक कचरे (जिसमें अधिकतम 10 प्रतिशत मिश्रित कचरा होगा) और 30 टन गोबर का प्रसंस्करण करेगा तथा सभी प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन करेगा। इसके साथ ही 33 प्रतिशत क्षेत्र में हरित पट्टी विकसित की जाएगी।
 

 

राज्यपाल ने वन विभाग और नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे साफ की गई भूमि के लिए विस्तृत पौधारोपण और सौंदर्यीकरण योजना तैयार करें। इसमें हरित क्षेत्र, जॉगिंग ट्रैक, बच्चों के खेलने के स्थान और खुले क्षेत्र शामिल होंगे, ताकि यह इलाका नागरिकों के लिए स्वस्थ और उपयोगी बन सके। उन्होंने यह भी घोषणा की कि जुलाई 2026 में इसी स्थान से बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान शुरू किया जाएगा।
 उन्होंने कहा कि ये सभी प्रयास चंडीगढ़ को देश के सबसे सुव्यवस्थित शहरों में शामिल रखते हैं और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और पर्यावरण के अनुकूल शहर बनाने के लक्ष्य को मजबूत करते हैं।
 

इस अवसर पर बोलते हुए चंडीगढ़ की महापौर हरप्रीत कौर बबला ने कहा कि नगर निगम एक स्वच्छ, हरित और स्वस्थ शहर के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सीबीजी प्लांट एक ऐसा प्रोजेक्ट है जिससे कचरा प्रबंधन की समस्या भी हल होगी और स्वच्छ ऊर्जा भी प्राप्त होगी। इससे विशेष रूप से दादूमाजरा और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।
 
महापौर ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड और नगर निगम अधिकारियों के सहयोग और मेहनत की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 125 करोड़ रुपये है और इससे प्रदूषण कम होगा, मीथेन गैस का उत्सर्जन घटेगा तथा जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी।
 
 
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