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भाजपा महिलाओं को 2029 में ही 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रयास करती रहेगी : मोहन लाल बड़ौली

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लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल का विरोध करने वाला विपक्ष नारी शक्ति की नजरों से गिर गया है : मोहन लाल बड़ौली

नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन बिल का विरोध करके कांग्रेस ने जो पाप किया है उसका महिलाएं चुनाव में जवाब देंगी : बड़ौली

महिला आरक्षण का मुद्दा कभी शांत होने वाला नहीं है, आरक्षण पर महिलाओं का 100 प्रतिशत हक है : बड़ौली

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शीघ्र जारी होगी हरियाणा नगर निकाय चुनाव के प्रत्याशियों की लिस्ट : बड़ौली

न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़, 21 अप्रैल। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंडित मोहन लाल बड़ोली ने मंगलवार को दिल्ली हरियाणा भवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, सपा, डीएमके, टीएमसी आदि विपक्षी पार्टियां नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन बिल के साथ-साथ परिसीमन के बिल का विरोध करके देश की नारी शक्ति की नजरों से गिर गई है। श्री बड़ौली ने कहा कि यह बिल देश की महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में सशक्त बनाने के लिए बेहद जरूरी था, लेकिन विपक्षी दलों ने इसमें बाधा डालकर महिलाओं को उनके राजनीतिक अधिकारों से वंचित किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी महिलाओं को 2029 में ही 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाने का प्रयास करती रहेगी।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बड़ौली ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक विशेष सत्र बुलाकर इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराने की मजबूत इच्छा दिखाई। तीन दिवसीय विशेष सत्र में मोदी सरकार ने पूरी तैयारी के साथ महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में कदम बढ़ाया, लेकिन विपक्षी दलों ने अड़ंगा लगा दिया।

बड़ौली ने कहा कि यह विधेयक महिलाओं के लिए 40 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद एक बड़ा अवसर था। यदि यह बिल बिना बाधा के पारित होता तो महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में बराबरी की राजनीतिक भागीदारी मिलती। उन्होंने कहा कि विपक्ष के इस रवैये से देश की आधी आबादी में भारी आक्रोश है और महिलाएं इसे कभी नहीं भूलेंगी।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार ने पहले ही पंचायत, जिला परिषद, ब्लॉक समिति में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देकर उन्हें सशक्त बनाने का काम किया है। आरक्षण मिलने से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे नेतृत्व की भूमिका में आगे आई हैं।

उन्होंने कांग्रेस पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने यह भ्रम फैलाया कि इस बिल से दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ भेदभाव होगा। जबकि संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी राज्य के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बड़ौली ने कहा कि विपक्ष ने जानबूझकर इस ऐतिहासिक अवसर को गंवाया है, जिससे महिलाओं को मिलने वाला उनका हक टल गया। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं जागरूक हैं और आने वाले चुनावों में विपक्ष के इस पाप को जरूर याद रखेंगी तथा इसका खामियाजा विपक्ष को भुगतना होगा।

बड़ौली विश्वास दिलाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के अपने संकल्प को जरूर पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार महिलाओं के सम्मान, अधिकार और सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है  और आधी आबादी को उनका हक दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 17 अप्रैल का दिन भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जा सकता था, लेकिन विपक्ष ने बिल का विरोध करके नारी शक्ति के सपनों पर सीधा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि 60 वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद विपक्ष ने महिलाओं को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया, लेकिन महिलाओं को राजनीतिक अधिकार देने की कभी गंभीर कोशिश नहीं की।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यह वही कांग्रेस है जिसने शाह बानो केस में महिलाओं के अधिकारों से समझौता किया और ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दों पर भी महिलाओं के हितों के खिलाफ खड़ी रही। विपक्ष का रवैया यह साफ दिखाता है कि विपक्ष की मंशा महिलाओं को अधिकार देना नहीं, बल्कि प्रक्रिया को उलझाकर रोकना है।

मोहन लाल बड़ौली ने कहा कि यह पूरा मामला परिवारवाद बनाम सामान्य महिला की लड़ाई को उजागर करता है। विपक्ष नहीं चाहता कि गांव, गरीब और मध्यम वर्ग की महिलाएं संसद में आएं, क्योंकि इससे उनके राजनीतिक वर्चस्व को खतरा होगा।

एक अन्य सवाल पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा कभी शांत होने वाला नहीं है। आरक्षण पर महिलाओं का 100 प्रतिशत हक है और वो उनको मिलकर रहेगा। हरियाणा में होने वाले निकाय चुनाव पर उन्होंने कहा कि जल्द ही प्रत्याशियों के नामों की लिस्ट जारी हो जाएगी।

दुष्यंत चौटाला के मुद्दे पर श्री बड़ौली ने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों को जनता नकार चुकी है। इस तरह के दलों के नेता उलटी-सीधी बयानबाजी करके राजनीतिक क्षेत्र में जिंदा रहना चाहते हैं और यह उनकी प्रैक्टिस भी है।

 

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