Follow

नारनौल में श्रद्धा व उल्लास के साथ धूमधाम से मना भगवान परशुराम जन्मोत्सव, राव नरेंद्र ने की शिरकत

Listen to this article

न्यूज़म ब्यूरो

नारनौल/चंडीगढ़। सर्व समाज द्वारा नारनौल में परशुराम जन्मोत्सव समारोह बड़ी धूमधाम एवं श्रद्धा से बनाया गया इस कार्यक्रम में बताओ और मुख्य अतिथि हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ मनीष शर्मा ने की। राव नरेंद्र सिंह ने मंच से भगवान परशुराम जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दी और उन्होंने कहा कि यह केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि धर्म, सत्य, न्याय, शौर्य, तपस्या और संस्कृति के आदर्शों को स्मरण करने का अवसर भी है। भगवान परशुराम भारतीय सनातन परंपरा के ऐसे महान व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपने जीवन से समाज को साहस, अनुशासन और धर्म रक्षा का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे पुत्र अवतार माने जाते हैं। उनका जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था, जिसे हम परशुराम जयंती के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं। उनके पिता महर्षि जमदग्नि महान ऋषि थे और माता रेणुका त्याग, सेवा और आदर्शों की प्रतिमूर्ति थीं। ऐसे महान कुल में जन्म लेकर भगवान परशुराम ने बचपन से ही ज्ञान, तपस्या और पराक्रम का अद्भुत परिचय दिया।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि वे ब्राह्मण कुल में जन्मे, लेकिन उनमें क्षत्रिय जैसा अद्भुत साहस और वीरता थी। इसी कारण उन्हें शस्त्र और शास्त्र दोनों का अद्वितीय ज्ञाता कहा जाता है। उनके व्यक्तित्व में ज्ञान की गंभीरता, तपस्या की शक्ति और योद्धा का तेज एक साथ दिखाई देता है। यही विशेषता उन्हें अन्य सभी अवतारों में विशिष्ट बनाती है।
उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम जी का जीवन हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है। जब धरती पर अत्याचार बढ़ गया, अहंकारी और अन्यायी शासकों ने प्रजा को पीड़ित करना शुरू किया, तब भगवान परशुराम ने धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाया। उन्होंने यह सिद्ध किया कि जब समाज पर संकट आए, तब सत्य और न्याय की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
उनका प्रमुख अस्त्र फरसा था, इसलिए उन्हें परशु धारण करने वाले राम अर्थात परशुराम कहा गया। उनका फरसा केवल एक हथियार नहीं था, बल्कि अधर्म और अन्याय के अंत का प्रतीक था। वे महान योद्धा होने के साथ-साथ महान तपस्वी और विद्वान भी थे। उन्होंने कठिन तपस्या कर भगवान शिव से दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्त किए थे।
भगवान परशुराम जी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक धर्म और न्याय की स्थापना मानी जाती है। उन्होंने समाज में संतुलन स्थापित किया और यह संदेश दिया कि शक्ति का उपयोग सदैव सत्य और जनकल्याण के लिए होना चाहिए। वे केवल युद्ध कौशल में ही नहीं, बल्कि नीति, मर्यादा और सदाचार में भी श्रेष्ठ थे।
वे गुरु रूप में भी अत्यंत पूजनीय हैं। महाभारत काल के महान योद्धा भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और दानवीर कर्ण जैसे महापुरुषों को भी उन्होंने शस्त्र विद्या प्रदान की थी। इससे स्पष्ट होता है कि वे केवल योद्धा ही नहीं, बल्कि महान शिक्षक, मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी थे।
इस अवसर पर उनके साथ जिला अध्यक्ष सत्यवीर यादव झुकिया, महिला जिला अध्यक्ष डॉ राज सुनेश, पीसी गुप्ता, सूरज बोहरा, डॉ धीरज शर्मा, विनोद शर्मा पूर्व सरपंच, महेश शर्मा, मुकेश जोशी, नवल, चेतन, मोहन लाल शर्मा, हेमंत शर्मा, रोहन शर्मा, दक्ष शर्मा, घनश्याम शर्मा, सतबीर शर्मा, धर्मपाल शर्मा, नितिन शर्मा, सुरेन्द्र शर्मा, प्रवीण कुमार, कृष्ण भारद्वाज, संदीप नुनीवाल, कुलदीप भारगढ़, खेमचंद, कृष्ण पटिकरा, मनपाल यादव, श्याम सुंदर सोनी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
What are your Feelings
Add a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
Tap to Refresh