दिव्या गुप्ता
जबलपुर। मध्य प्रदेश के भोपाल- जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारत का पहला ‘रेड टेबलटॉप रोड मार्किंग सिस्टम’ शुरू किया गया है। ये पहल नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व के पास हाईवे के उस हिस्से में लागू की गई है, जहां वन्यजीवों की आवाजाही अधिक होती है और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

क्यों खास है यह तकनीक ?
यह लाल और काले रंग की ऊंची थर्मोप्लास्टिक परतें सड़क पर बिछाई गई हैं, जो देखने में चमकीली होने के साथ-साथ थोड़ी उभरी हुई हैं। ये वाहन चालकों के लिए दृश्य और भौतिक चेतावनी का काम करती हैं। इनके कारण वाहन स्वत: धीमे हो जाते हैं और चालक वाहन चलाते वक्त अधिक सतर्क हो जाते हैं, जिससे पशुवाहन टकराव की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है। यह पारंपरिक स्पीड ब्रेकर की तरह झटका नहीं देता, बल्कि नियंत्रित रूप से गति घटाता है।

वन्यजीवों के लिए सुरक्षित राह
इस क्षेत्र में हाईवे के नीचे कुल 25 अंडरपास बनाए गए हैं, जो वन्यजीवों के पुराने प्राकृतिक मार्गों के अनुरूप तैयार किए गए हैं। सड़क के दोनों ओर लोहे की बाड़ भी लगाई गई है, ताकि जानवर अनियमित ढंग से सड़क पार न करें और सुरक्षित अंडरपास का ही उपयोग करें। अन्य परियोजनाओं से मिले शुरु आती संकेत बताते हैं कि हिरण से लेकर बाघ तक, सभी प्रजातियां इन अंडरपासों का सहज उपयोग करने लगी हैं।

संतुलन की कहानी
यह पूरा प्रोजेक्ट एक संवेदनशील और वैज्ञानिक सोच का उदाहरण है, जहाँ विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है। अब इस लाल-काली सड़क की यह पट्टी एक संदेश देती है..वाहन धीरे चलते हैं, जानवर सुरक्षित गुजरते हैं, और जीवन दोनों दिशाओं में बिना बाधा चलता रहता है। बता दें कि पहले इस राष्ट्रीय राजमार्ग को एचएच-12 के नाम से जाना जाता था, जो अब वर्तमान समय में एनएच-45 है।

देश के दूसरे राज्यों के लिए है सबक
यह साबित करता है कि यदि सड़कें थोड़ा ज्यादा सोच समझकर बनाई जाएं, तो वे जंगलों को बांटने की बजाए उनकी रक्षा भी कर सकती हैं। योजनाबद्ध विकास और जागरूक डिज़ाइन के साथ, पर्यावरण और प्रगति साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं – बिना किसी के नुकसान के। ये राष्ट्रीय राजमार्ग देश के दूसरे राज्यों की सरकारों के जिम्मेवार नीति निर्माताओं और अधिकारियों को भी एक सबक देती दिखती है कि जहां भी कहीं सड़क मार्ग पर वन्य जीवों के साथ वाहन चालकों के टकराव की संभावना बनती हो।
या फिर अगर किसी वन्य जीव अभ्यारण्य या सेंचुरी अथवा जंगल के पास से कोई नेशनल हाईवे या स्टेट हाईवे निकलता हो, तो वहां ऐसी ही ‘रेड कार्पेट रोड’ का प्रयोग मानव सभ्यता की वन्य जीवों संग होने वाली भिड़ंत की संभावना को खत्म करने में मददगार साबित हो सकता है। ताजा सूरते-हाल में इस राष्ट्रीय राजमार्ग से होकर निकलना वाहन चालकों विशेषकर पर्यटकों को गाड़ी में बैठे बैठे फोटो क्लिक करने का एक चांस तो देता दिखता ही है।