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यमुनानगर, अंबाला और पंचकूला जिलों में होगा मृदा एवं जल संरक्षण : अनुराग रस्तोगी

 

चंडीगढ़, 30 दिसंबर : हरियाणा सरकार द्वारा दीर्घकालिक पारिस्थितिक स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यमुनानगर, अंबाला और पंचकूला जिलों में 35 लाख रुपये की लागत से मृदा एवं जल संरक्षण कार्यों पर एक विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन किया जाएगा। यह अध्ययन भविष्य की संरक्षण योजनाओं के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा। इस प्रस्ताव को आज यहां मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई प्रतिपूरक वनरोपण प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (सीएएमपीए), हरियाणा की स्टीयरिंग कमेटी की 9वीं बैठक में स्वीकृति दी गई। बैठक में सुधीर राजपाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन), विनीत गर्ग, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (मुख्यालय), विवेक सक्सेना, मुख्य वन्यजीव संरक्षक तथा नवदीप सिंह, मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरियाणा कैम्पा उपस्थित रहे। 

इसके अलावा, प्रदेश में पौधारोपण बढ़ाने, वन्यजीव आवासों को सुरक्षित करने तथा संरक्षण ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से कई अनुपूरक एवं अतिरिक्त प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। इनपुट लागत में वृद्धि तथा राज्य की सफेदा पौधारोपण से हटने की नीति को ध्यान में रखते हुए, समिति द्वारा नर्सरी एवं पौधारोपण गतिविधियों के लिए धनराशि के पुनर्विनियोजन को मंजूरी दी गई। सफेदा क्लोनल पौधों के लिए निर्धारित 1.65 करोड़ रुपये की राशि को मालाबार नीम (मेलिया डूबिया) के पौधों के उत्पादन हेतु स्थानांतरित किया गया है, जिसकी लागत अब 27.18 रुपये प्रति पौधा आंकी गई है। इससे नर्सरी स्टॉक की गुणवत्ता एवं पौधों के जीवित रहने की दर में सुधार होने की संभावना है।

वन एवं वन्यजीव आवासों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए समिति ने राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों में सर्वेक्षण, सीमांकन, पिलर लगाने तथा बाड़ या दीवार निर्माण के लिए 16.95 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी। इसका उद्देश्य अतिक्रमण रोकना और आवास विखंडन को कम करना है।

इसके अतिरिक्त, वन एवं वन्यजीव क्षेत्रों में आवास सुधार, उपकरणों की खरीद, बुनियादी ढांचे के विकास और निगरानी गतिविधियों के लिए 4.55 करोड़ रुपये की अनुपूरक राशि को भी मंजूरी दी गई। वर्ष 2025–26 के दौरान वन्यजीव आवास सुधार कार्यों हेतु एनपीवी मद के अंतर्गत 1.48 करोड़ रुपये के पुनर्विनियोजन को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

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इसके अलावा, शिवालिक क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए कालका, नारायणगढ़ और छछरौली वन क्षेत्रों के लिए 50 लाख रुपये की लागत से तीन गश्ती वाहनों की खरीद को भी मंजूरी दी गई, जिससे क्षेत्र में निगरानी सुदृढ़ होगी और वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

 

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