Follow

माताएं तय कर लेती हैं तो राह में कोई रोड़ा नहीं बन सकता : जयराम ठाकुर

Listen to this article

लोक माता अहिल्याबाई के शासन में दिखती है आधुनिक भारत की झलक

शिमला : गेयटी थियेटर में आयोजित लोक माता अहिल्याबाई होलकर “मातृ नमन कार्यक्रम” को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि यह कार्यक्रम बहुत बड़ा है। यह मातृवंदन हैं। माँ के बिना तो हमारा अस्तित्व ही नहीं है। आज हम जो भी हैं उसमें हमारी माँ की सीख, संघर्ष प्रेरणा का ही योगदान हैं। माँ पर कुछ कहना सच में सूर्य को दिया दिखाने जैसा है, क्योंकि माँ की महिमा शब्दों में समेटी ही नहीं जा सकती। माँ जीवन की वह शक्ति है, जो जन्म देती है, सँवारती है और हर पल अपने बच्चे के भविष्य के लिए समर्पित रहती है। पहली गुरु बनकर बोलना सिखाती है, चलना सिखाती है, और जीवन जीना सिखाती है।

 

Advertisement

 

सच कहा जाए तो माँ केवल जन्म नहीं देती, बल्कि जीवन को अर्थ देती है, दिशा देती है और हमें मानवता और संवेदनशीलता से जोड़ती है। उसके त्याग, धैर्य, अनुशासन और असीम प्रेम से ही व्यक्ति महान बनता है, परिवार संस्कारित होता है और राष्ट्र मजबूत बनता है। “यदि दुनिया को बेहतर बनाना है, तो माताओं का सम्मान, समर्थन और सशक्तिकरण आवश्यक है, क्योंकि हर महान व्यक्ति के व्यक्तित्व की जड़ में “माँ” खड़ी होती है।”इस कार्यक्रम में अपने संघर्ष और लगन से अपने बच्चों को आगे बढ़ाने वाली माताओं को उन्होंने सम्मानित किया। इस मौके पर उनके साथ वरिष्ठ टीवी पत्रकार रुबिका लियाकत, श्यामला ट्रस्ट के संरक्षक नितिन व्यास, अध्यक्ष सूरज जमालटा, सचिव ईशा शर्मा, वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज आदि उपस्थित थे।

 

उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में पहुँच स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ क्योंकि यह कार्यक्रम हर लिहाज़ से बाक़ी के कार्यक्रमों से अलग है। माताओं के बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। माताएं जब ठान लेती हैं तो उनकी राह में कोई भी बाधाएँ नहीं आ सकती हैं। कोई कठिनाई उनका रास्ता नहीं रोक सकती है। उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्व काल के किस्से साझा करते हुए बताया कि कैसे एक माँ ने सहारा योजना के सहारे पति के छोड़ जाने के बाद भी दिव्यांग बच्चों सहित ख़ुद को संभाला और कैसे शगुन योजना का पैसा मिलने पर बेटी ने चेक अपने पिता को सौंपते हुए कहा कि यह पैसा आप उन्हें लौटा दो जिनसे आपने कर्ज लिया है। यह भाव सिर्फ मातृशक्ति का हो सकता है। उनके लिए संघर्ष बड़ी बाधा नहीं हर दिन का काम हैं उनसे बखूबी निपटती हैं।

उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम लोक माता पुण्य श्लोक अहिल्या बाई होलकर के नाम से है। उनका जीवन अपने आप में संघर्षो की जीवंत कहानी हो। लेकिन उनके काम हैं उनमें आधुनिक भारत की झलक दिखती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से हमने हाल ही में उनकी जन्म त्रिशताब्दी मनाई। इतिहास ने उनके साथ न्याय नहीं किया। हमें उनके बारे में बहुत ज़्यादा जानने नहीं दिया गया। अब जब उनके काम हम देखते हैं तो लगता है कि आधुनिकता का वह अग्रदूत थी। उनके सेवाकाल में आधुनिक भारत की झलक दिखती है। लोक माता ने समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने के लिए कई सुधार किए।

 

 

महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की, शिक्षा दी, समाज में उनकी स्थिति को सुधारने का प्रयास बाल विवाह, विधवा पुनर्विवाह और अन्य सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए काम किया। व्यापार,उद्योग, कृषि और उद्यमियों को प्रोत्साहित किया। कृषि विकास हेतु बेहतर बीज, उर्वरक और सिंचाई के लिए कई योजनाएं शुरू कीं। वन और भूमि पर जनजातियों को मालिकाना हक दिए। काशी के घाटों का जीर्णोद्धार करवाया। मंदिरों में यात्रियों की सुविधा के लिए काम काम किया।

 

प्रयाग और अन्य धार्मिक स्थलों पर कई मंदिरों का निर्माण करवाया काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर, विष्णुपद मंदिर गया बिहार, ज्ञान वापी मंदिर का जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण करवाया। गृहणेश्वर ज्योतिर्लिंग एलोरा महाराष्ट्र अहिल्या बाई की देखरेख में पुनर्निर्मित हुआ। उनकी नीतियों ने हिंदू समाज में एकता और हमारी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत किया। लोकमाता के कार्यों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि उस बोलने के लिए समय कम पड़ जाए। इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजन कर्ताओं को शुभकामनाएं दी।

 

What are your Feelings
Advertisement
Tap to Refresh