कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार ने देर से एफआईआर दर्ज करने और परिवहन मंत्री लालजीत भुल्लर को गिरफ्तार करने में देरी कर लोगों के विश्वास को ठेस पहुंचाई है और यह धारणा पैदा कर दी कि मंत्री को बचाया जा रहा
चंडीगढ़,
23मार्च : शिरोमणी अकाली दल के वरिष्ठ नेता और बठिंडा सांसद बीबा हरसिमरत कौर बादल ने आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के जिला प्रबंधक डाॅ. गगनदीप सिंह रंधावा की परेशान करने वाली मौत की सीबीआई जांच देने का आग्रह किया है, जिन्हे परिवहर मंत्री लालजीत भुल्लर द्वारा शारीरिक और मानसिक उत्पीड़ने के बाद आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।संसद में गृहमंत्री के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बीबा हरसिमरत कौर बादल ने कहा, जिसमें उन्होने कहा था कि अगर पंजाब के सांसद इस संबंध में औपचारिक रूप से मांग पत्र देते हैं तो केंद्र सरकार इस घटना की जांच का आदेश देगा। बीबा बादल ने पंजाब के अन्य सांसदो से इस मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए इसी तरह औपचारिक रूप से अनुरोध करने का आग्रह किया है। उन्होने कहा,‘‘ मामले की गंभीरता और राजनीतिक हस्तक्षेप के गंभीर आरोपों को देखते हुए यह जरूरी है कि जांच एक स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जाए। उन्होने कहा कि केवल सीबीआई जांच ही निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कर सकती है और पीड़ित परिवार और जनता का विश्वास बहाल कर सकती है।’’
अमित शाह को लिखे पत्र में बठिंडा सांसद ने कहा कि डाॅ. रंधावा एक उच्च योग्य अधिकारी थे, जिनके पास बीएससी, कृषि विज्ञान में एमएससी ,पीएचडी और एमबीए की डिग्रियां थी और दो जिलों का प्रभार संभालने वाले जिम्मेदार सरकारी अधिकारी थे। उन्होने कहा,‘‘ 21 मार्च को अपनी मौत से पहले उन्होने एक वीडियो संदेश रिकाॅर्ड किया, जिसमें वह जिस दबाव और परिस्थितियों का सामना कर रहे थे उसके बारे उन्होने विस्तार से बताया था। यह बेहद दर्दनाक है कि इस तरह के सम्मानीय अधिकारी को इस हद तक मजबूर किया गया कि उन्होने अपने बच्चों और परिवार को पीड़ा से बचाने के लिए अपनी जान लेने का फैसला किया।’’
बीबा बादल ने पत्र में कहा कि इस तरह की परिस्थितियां सिस्टम की नाकामी की ओर इशारा करती है, जहां अधिकारियों द्वारा बार-बार गुहार अनसुनी कर दी जाती है। उन्होने आगे लिखा,‘‘ डाॅ. रंधावा अपनी मानसिक परेशानी और दबाव के बारे डिप्टी कमिशनर और वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के प्रबंध डाॅयरेक्टर के संज्ञान में लाए थे, लेकिन प्रभावशाली मंत्री की मिलीभगत के कारण आम आदमी पार्टी द्वारा कोई कार्रवाई नही की गई।’’
अकाली नेता ने कहा कि इस मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार परिवहन मंत्री लालजीत भुल्लर , उनके पिता और एक सहयोगी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होने कहा कि यह खुलासा हुआ है कि डाॅ. रंधावा को मंत्री के पिता के हक में टेंडर देने के लिए अत्यधिक परेशानी और दबाव का सामना करना पड़ा। ‘‘ जब उन्होने विरोध किया तो उन्हे पीटा गया और अपमानित किया गया और धमकी भी दी गई। उन्हें गैंगस्टरों के जरिए धमकी भी दी गई जिससे उनमें भय और तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया।’’
बीबा बादल ने कहा कि यह बेहद हैरानी वाली बात है कि अधिकारी को अमानवीय तरीके से अपमानित किया गया और कपड़े उतारने पर मजबूर किया गया और मंत्री और उनके गुंडो द्वारा पिस्तोल से सिर पर वार कर मारपीट की गई। उन्होने कहा,‘‘ इस तरह के कृत्य सत्ता का घोर दुरूपयोग है और डराने-धमकाने के ऐसे तरीकों को दर्शाता है जो बुनियादी मानवाधिकारों और प्रशासनिक मानदंडों का उल्लंघन करता है और अंत में उन्हे इस हद तक परेशान कर दिया गया कि उन्हे अपनी जान लेने पर मजबूर कर दिया गया।’’
बीबा बादल ने कहा कि परिवार की हालत बेहद दुखदायी है। ‘‘ उनके छोटे बच्चों ने अपने पिता और अपनी पूरी दुनिया को खो दिया है। इस दुखद घड़ी में उन्हें सार्वजनिक रूप से बोलने और न्याय मांगने के लिए मजबूर किया जा रहा है। किसी भी परिवार को ऐसी परिस्थिति का सामना करने के लिए मजबूर नही किया जाना चाहिए।’’
बीबा बादल ने इस मामले में आम आदमी पार्टी के रवैये को लेकर उठे विवादों के बारे भी विस्तार से बताया। उन्होने कहा कि केस दर्ज कर लिया गया है लेकिन 24 घंटे से भी अधिक समय बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई गिरफ्तारी नही की गई है। उन्होने कहा कि केस दर्ज करने में देरी और मंत्री के इस्तीफे को लेकर अस्पष्टता और राज्यपाल को इस्तीफे की कोई औपचारि सूचना नही दिए जाने से जनता का विश्वास कम कर दिया है और यह धारणा पैदा कर दी है कि सत्ता में बैठे लोगों को बचाया जा रहा है।
अकाली नेता ने अपने पत्र में यह भी लिखा कि यह मामला केवल एक अधिकारी की दुखदायी मौत तक सीमित नही है, बल्कि सिस्टम के भीतर काम करने वाले अधिकारियों की सुरक्षा, गरिमा और स्वतंत्रता के बारे एक बड़ा और गहरा चिंताजनक सवाल उठाता है। उन्होन कहा,‘‘ यदि ऐसी घटनाओं को तत्काल और जवाबदेही के साथ संबोधित नही किया जाता तो यह प्रशासनिक ढ़ांचे के भीतर डर, दबाव , जबदस्ती और चुप्पी का माहौल पैदा कर सकता है।’’