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केंद्र फंडों के वितरण का निर्णय करते समय सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल करें : मीत हेयर

पंजाब की सहमति के बिना पंजाब यूनिवर्सिटी से संबंधित कोई भी निर्णय न लिया जाए : मीत हेयर 

नई दिल्ली/चंडीगढ़, 16 दिसंबर : संगरूर से लोकसभा सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर ने संसद में पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ की सीनेट में बदलाव और पंजाब को बाढ़ राहत पैकेज से वंचित रखने के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि केंद्र सरकार कोई भी निर्णय लेते समय संबंधित राज्यों की सहमति और सभी राज्यों की प्रतिनिधिता सुनिश्चित करे। मीत हेयर ने संसद में आज ‘पुनर्विचार एवं संशोधन बिल 2025’ पर बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि 71 कानूनों में संशोधन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों को बराबर की हिस्सेदारी देने के संशोधन की जरूरत है।

मीत हेयर ने कहा कि जैसे जीएसटी काउंसिल में सभी राज्यों की प्रतिनिधिता है, वैसे ही अन्य मामलों में भी राज्यों को प्रतिनिधिता मिलनी चाहिए। आप सांसद ने पंजाब में आए भयानक बाढ़ों का आज फिर मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब दो साल पहले बिहार में बाढ़ आई थी तो 12 हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज दिया गया था, लेकिन पंजाब के साथ अब भेदभाव किया गया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा कहीं भी यह देखकर नहीं आती कि उस राज्य में भाजपा की सरकार है या गैर-भाजपा सरकार। उन्होंने कहा कि फंड जारी करने में पक्षपात नहीं करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि फंडों के वितरण का निर्णय करने वाली समिति में सभी राज्यों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। इससे राज्यों को फंडों का सही वितरण किया जा सकेगा।

मीत हेयर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पंजाब को बिना विश्वास में लिए पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ की सीनेट तोड़ने की चाल चली गई, जो राज्य में हुए कड़े विरोध के कारण वापस लेनी पड़ी। उन्होंने कहा कि पंजाब पुनर्गठन कानून के अनुसार पंजाब यूनिवर्सिटी से संबंधित कोई भी निर्णय राज्य सरकार की सहमति के बिना नहीं लिया जा सकता।

 

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