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भवन क्षेत्र में ऊर्जा खपत को कम करें, पर्यावरणीय स्थिरता बढ़ाएं, ऊर्जा दक्ष प्रौद्योगिकियां अपनाएं : प्रेरणा पुरी

ऊर्जा संरक्षण एवं सतत भवन संहिता पर कार्यशाला सह ऊर्जा दक्ष निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का आयोजन
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 16 मार्च 2026 : ऊर्जा प्रबंधन प्रकोष्ठ (EMC) / राज्य नामित एजेंसी (SDA), इंजीनियरिंग विभाग, यू.टी. चंडीगढ़ द्वारा ऊर्जा संरक्षण एवं सतत भवन संहिता विषय पर एक कार्यशाला तथा ऊर्जा दक्ष निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिकियों की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रेरणा पुरी सचिव इंजीनियरिंग विभाग चंडीगढ़ प्रशासन ने शिरकत की। अपने संबोधन में उन्होंने भवन क्षेत्र में ऊर्जा खपत को कम करने तथा पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सतत निर्माण पद्धतियों और ऊर्जा दक्ष प्रौद्योगिकियों को अपनाने के महत्व पर बल दिया।
इस अवसर पर सी.बी. ओझा, मुख्य अभियंता, यू.टी. चंडीगढ़ भी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन ऊर्जा संरक्षण एवं सतत भवन संहिता को अधिसूचित करने की प्रक्रिया में है, जिससे भवन क्षेत्र में ऊर्जा दक्ष प्रथाओं के क्रियान्वयन को और अधिक मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान एक तकनीकी सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें आर्किटेक्ट जित कुमार गुप्ता ने सतत भवन डिजाइन, ऊर्जा दक्ष निर्माण तकनीकों तथा आधुनिक भवनों में ऊर्जा संरक्षण उपायों के समावेशन पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
कार्यक्रम के दौरान ऊर्जा दक्ष निर्माण सामग्री और प्रौद्योगिकियों की एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। इस प्रदर्शनी में जॉनसन टाइल्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, महालक्ष्मी ब्रिक्स, एल.के. इलेक्ट्रिकल तथा विनायक इंडस्ट्री जैसी अग्रणी कंपनियों ने कूल रूफ टाइल्स, हीट-रिफ्लेक्टिव पेंट्स, एएसी ब्लॉक्स सहित अन्य ऊर्जा दक्ष निर्माण सामग्रियों और नवाचार उत्पादों का प्रदर्शन किया।
इस कार्यशाला में लगभग 125 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें इंजीनियर, बिल्डर, आर्किटेक्ट तथा विद्यार्थी शामिल थे। प्रतिभागियों ने ऊर्जा संरक्षण तथा सतत निर्माण पद्धतियों से संबंधित विषयों पर सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लिया।
इंजीनियर पवन शर्मा, प्रमुख EMC/SDA ने कार्यक्रम के दौरान इंजीनियरिंग विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की जानकारी दी, जिनमें ऊर्जा दक्ष प्रौद्योगिकियों का प्रचार-प्रसार, जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन तथा सतत विकास को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों का क्रियान्वयन शामिल है।

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