फर्जी फर्म/ कंपनियां बनाकर पैसा किया जा रहा था ट्रांसफर
मामले में अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार, 16 स्थानों पर की गई गहन छापेमारी
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 12 मार्च। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले की जांच में यह सामने आया है कि मुख्य आरोपियों ने कई फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी धन को अवैध रूप से विभिन्न खातों में ट्रांसफर किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सरकारी विभागों के खातों से इसे इन फर्जी कंपनियों के खातों में अनधिकृत रूप से भेजा जाता था। इन कंपनियों में R S Traders, Cap Co Fintech services., SRR Planning Gurus Pvt. Ltd. और Swastik Desh Project आदि शामिल हैं।
एडीजीपी चारू बाली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी जांच की जानकारी
यह जानकारी राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) की एडीजीपी चारू बाली ने दी। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस पंचकूला में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में आयोजित की गई थी। इस अवसर पर उनके साथ एसपी गंगाराम पूनिया भी उपस्थित रहे। प्रेस कांफ्रेंस में बताया गया कि दिनांक 23 फरवरी 2026 को एसवी एंड एसीबी थाना पंचकूला में IDFC First Bank तथा AU Small Finance Bank के अज्ञात कार्मिकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) सहपठित 13(1)(a) तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316(5), 318(4), 336(3), 338, 340(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था। अब तक की जांच में 8 विभागों के 12 बैंक खातों की संलिप्तता सामने आई है, जिनमें से 10 खाते IDFC First Bank, सेक्टर-32 चंडीगढ़ और 2 खाते AU Small Finance Bank में संचालित थे। इस मामले में 16 स्थानों पर गहन छापेमारी की गई है। कुछ स्थानों से वीडियो फुटेज भी ली गई है।

11 आरोपी गिरफ्तार, जिनमें बैंक कर्मचारी और सरकारी कर्मचारी शामिल
मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें 6 बैंक कर्मचारी, 4 निजी व्यक्ति और एक सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। इनमें से 10 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं जबकि एक आरोपी पुलिस रिमांड पर है। जांच के दौरान अब तक 16 स्थानों पर गहन छापेमारी की गई है।इस मामले में कुछ स्थानों से वीडियो फुटेज भी ली गई है। इस दौरान संपत्तियों की खरीद से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। साथ ही 25 से अधिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप आदि जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच साइबर फॉरेंसिक लैब की सहायता से की जा रही है। इसके अतिरिक्त 3 फॉर्च्यूनर, 2 इनोवा और 1 मर्सिडीज सहित 6 वाहन भी जब्त किए गए हैं, जिन्हें अपराध की आय से खरीदे जाने का तार्किक तौर पर संदेह है।
जांच एजेंसी द्वारा अब तक 100 से अधिक बैंक खातों पर डेबिट फ्रीज लगाने के लिए अनुरोध भेजे गए हैं। जाँच में सामने आया है कि अभी तक 8 सरकारी विभागो में अनाधिकृत लेन देन सामने आया है उनकी पहचान की जा चुकी है। पिछले एक साल के लेखा जोखा की गहनता से जाँच की जा रही है जो कि अंतिम चरण में है।अभी तक की जाँच में कई सरकारी अधिकारी/ कर्मचारियों तथा निजी व्यक्तियों की संलिप्तता की भी पहचान की गई है । पुष्टि होने उपरांत विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। इसके साथ ही 10 संपत्तियों की पहचान की गई है, जिन्हें अपराध से अर्जित धन से खरीदे जाने का तार्किक तौर पर संदेह है।
फर्जी डेबिट मेमो और नकली बैंक स्टेटमेंट के जरिए किया गया ट्रांजैक्शन
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि बैंक रिकॉर्ड में फर्जी डेबिट मेमो तैयार कर या बिना किसी वैध डेबिट मेमो/चेक के ही धनराशि ट्रांसफर की गई। इसके अलावा फर्जी बैंक स्टेटमेंट भी तैयार किए गए ताकि खातों से धन उन विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया जा सके जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आरोपियों या उनके परिजनों से जुड़े हुए थे। जांच एजेंसी द्वारा बैंकों और संबंधित विभागों से बड़ी मात्रा में रिकॉर्ड प्राप्त हो चुका है और उसका गहन विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकृत (Authorized) और अनधिकृत (Unauthorized) लेन-देन की पहचान की जा रही है, ताकि पूरे फंड फ्लो का पता लगाया जा सके।
जांच एजेंसियों को भी उपलब्ध कराई जा रही जानकारी, जांच जारी
इस मामले में विभिन्न जांच एजेंसियों द्वारा मांगी गई जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है व ही विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ उचित व प्रभावी सहयोग व समन्वय रखकर मामले की जांच की जा रही है। साथ ही गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और मामले की वैज्ञानिक व तकनीकी आधार पर जांच की जा रही है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अनुसार, मामले की जांच जारी है और आने वाले समय में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।