पांडेसरा के 8 क्लीनिकों पर एक साथ छापेमारी, आरोपियों में 12वीं पास, बीएससी और पूर्व कंपाउंडर शामिल; करीब 2 से 10 साल से इलाज करने का आरोप
राहुल गुप्ता
सूरत, 17 सितंबर।
सूरत के पांडेसरा इलाके में बिना मान्य मेडिकल डिग्री के मरीजों का इलाज करने का कथित मामला सामने आया है। पुलिस को सूचना मिली थी कि इलाके में कुछ लोग डॉक्टर की जरूरी योग्यता के बिना क्लीनिक चला रहे हैं। सूचना की पुष्टि के लिए पुलिस ने पहले डमी मरीजों को इन क्लीनिकों में भेजा। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 8 अलग-अलग क्लीनिकों पर छापेमारी की और 8 लोगों को गिरफ्तार किया।
डमी मरीजों से हुई आरोपों की पुष्टि
पुलिस के मुताबिक, पांडेसरा इलाके में कुछ लोगों के बिना वैध मेडिकल योग्यता के मरीजों का इलाज करने की सूचना मिली थी। इसके बाद सीधे छापेमारी करने के बजाय पहले डमी मरीजों को संबंधित क्लीनिकों में भेजकर जांच की गई।
डमी मरीजों के जरिए यह पता लगाया गया कि क्लीनिकों में मरीजों का इलाज कौन कर रहा है और उसके पास डॉक्टर के रूप में इलाज करने की आवश्यक योग्यता है या नहीं। जांच के बाद एसओजी और जिला स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त कार्रवाई के लिए तीन टीमें गठित कीं।
8 क्लीनिकों पर एक साथ छापेमारी
टीमों ने पांडेसरा इलाके में एक साथ 8 अलग-अलग जगहों पर कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान 8 लोगों को पकड़ा गया। पुलिस का आरोप है कि ये सभी बिना मान्य मेडिकल डिग्री के मरीजों का इलाज कर रहे थे।
जांच में आरोपियों की शैक्षणिक योग्यता और उनके पुराने कामकाज की जानकारी भी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, कुछ आरोपी केवल 12वीं तक पढ़े हैं, जबकि कुछ ने बीएससी की पढ़ाई की है। वहीं कुछ आरोपी पहले कंपाउंडर या ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट के तौर पर काम कर चुके थे।
2 से 10 साल से कथित तौर पर कर रहे थे प्रैक्टिस
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपी करीब 2 साल से लेकर 10 साल तक बिना मान्य मेडिकल डिग्री के मरीजों का इलाज कर रहे थे। यानी यह कथित प्रैक्टिस कुछ दिनों या महीनों तक सीमित नहीं थी।
कार्रवाई के दौरान क्लीनिकों से दवाइयां, इंजेक्शन, सिरप और अन्य मेडिकल सामग्री बरामद की गई। पुलिस के अनुसार, जब्त किए गए सामान की कुल कीमत करीब 98,825 रुपये है।
एक किशोर की मौत से भी जुड़ा मामला
गिरफ्तार आरोपियों में पार्थ देवनाथ का नाम भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, उसके खिलाफ एक परिवार ने आरोप लगाया है कि उसने पहले 14 वर्षीय किशोर का इलाज किया था और इलाज के बाद किशोर की मौत हो गई।
हालांकि, इस मामले में अभी जांच जारी है। किशोर की मौत को लेकर पांडेसरा पुलिस स्टेशन में आकस्मिक मौत की रिपोर्ट यानी एडीआर दर्ज है। इसलिए फिलहाल यह जांच का विषय है कि किशोर की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसके इलाज का मौत से कोई संबंध था या नहीं।
पुलिस ने क्या कहा
सूरत एसओजी के डीसीपी राजदीप सिंह नकुम ने बताया कि एसओजी और स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए पांडेसरा से 8 कथित फर्जी डॉक्टरों को पकड़ा है। उन्होंने बताया कि पहले डमी मरीजों के जरिए जांच की गई और आरोपों की पुष्टि होने के बाद छापेमारी की गई।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों में 12वीं पास, बीएससी की पढ़ाई करने वाले और पहले कंपाउंडर या ऑपरेशन थिएटर में काम कर चुके लोग शामिल हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि इनके पास मरीजों का इलाज करने के लिए मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री नहीं थी।
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी इतने लंबे समय तक क्लीनिक कैसे चलाते रहे और इनके यहां कितने मरीज इलाज के लिए आते थे। सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। वहीं 14 वर्षीय किशोर की मौत से जुड़े मामले की जांच भी जारी है।
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