न्यूज़म ब्यूरो
ओशिवारा, 7 सितंबर।
पुलिस स्टेशन की टीम ने सोशल मीडिया पर फर्जी निवेश योजना चलाकर लोगों से ठगी करने के आरोप में राजस्थान से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि आरोपियों ने कम रकम निवेश कर भारी रिटर्न का लालच देकर ओशिवारा निवासी एक महिला से कुल 73,521 रुपये की ठगी की। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
फेसबुक विज्ञापन के जरिए बिछाया ठगी का जाल
पुलिस के अनुसार, महिला को फेसबुक पर ‘विझार्ड ट्रेडर्स ७’ नाम का एक पेज मिला था। इस पेज पर एक निवेश योजना का विज्ञापन किया गया था, जिसमें 99 रुपये के भुगतान पर 9,999 रुपये लौटाने का दावा किया गया था। महिला ने विज्ञापन में दिए गए लिंक पर क्लिक किया। इसके बाद उसे एक इंस्टेंट मैसेजिंग और कॉलिंग ऐप के माध्यम से अज्ञात व्यक्ति से संपर्क करने के लिए कहा गया। आरोपी ने कथित निवेश योजना की जानकारी देकर महिला को पैसे लगाने के लिए राजी किया।
22 बार में ट्रांसफर किए 73,521 रुपये
महिला ने शुरुआत में 99 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए। इसके बाद आरोपियों ने अलग-अलग कारण बताते हुए उससे लगातार और रकम जमा करने को कहा। पुलिस के मुताबिक, महिला ने रात से लेकर सुबह करीब 3.30 बजे तक कुल 22 बार पैसे ट्रांसफर किए। इस तरह उसके खाते से कुल 73,521 रुपये चले गए। ठगी का एहसास होने के बाद महिला ने ओशिवारा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
शिकायत मिलने के बाद ओशिवारा पुलिस की साइबर टीम ने जांच शुरू की। पुलिस ने लेनदेन से जुड़े डिजिटल एवं वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की और सोशल मीडिया पेज संचालित करने वाले संदिग्धों की पहचान कर उनकी लोकेशन ट्रैक की। जांच के दौरान आरोपियों के राजस्थान में होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद मुंबई पुलिस की टीम दौसा और जयपुर पहुंची। आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे, जिसके चलते पुलिस टीम को करीब चार दिनों तक उनकी तलाश करनी पड़ी।
स्थानीय पुलिस की मदद से दोनों गिरफ्तार
आखिरकार जयपुर के शिवदासपुरा पुलिस स्टेशन की स्थानीय पुलिस की मदद से मुंबई पुलिस ने जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 21 वर्षीय दीपक सीताराम मीणा और 30 वर्षीय हरकेश गोपाल मीणा के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से करीब 70 हजार रुपये कीमत के तीन मोबाइल फोन, 11 सिम कार्ड, एक डेबिट कार्ड और एक क्यूआर स्कैनर कोड बरामद किया है।
अन्य पीड़ितों की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने इसी तरीके से और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। साथ ही, उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और साइबर धोखाधड़ी के अन्य मामलों में संभावित संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
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