बोले, वीबी-जी राम जी एक्ट में साफ है कि किसी भी हालत में मानदेय मनरेगा से कम नहीं हो सकता
बोले, वीबी-जी राम जी में सरकार की जवाबदेही, रोजगार की पारदर्शिता, अधिकार, भुगतान और रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी के प्रावधान हैं, भ्रष्टाचार खत्म हो रहा है, इसी बात से सुक्खू सरकार परेशान है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वीबी-जी राम जी 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देता है। किसी भी व्यक्ति को, जो काम करने का इच्छुक है, उसे रोजगार मिले, इसकी व्यवस्था इस कानून के तहत की गई है। रोजगार पाने की अर्हता केवल काम करने की इच्छा है। केंद्र सरकार पहले निर्माण कार्य (कंस्ट्रक्शन कॉस्ट) का 75 प्रतिशत वहन करती थी, जिसे अब बढ़ाकर 90 प्रतिशत कर दिया गया है। हिमाचल समेत अन्य पहाड़ी राज्यों के लिए यह 15 प्रतिशत की वृद्धि है। कार्यस्थल पर यदि किसी भी व्यक्ति के साथ कोई दुर्घटना होती है तो उसे प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का लाभ मिलेगा। 15 दिनों के भीतर भुगतान न होने पर ब्याज सहित भुगतान की बाध्यता तय की गई है। कार्डधारक को रोजगार न मिलने की स्थिति में भत्ता देने का भी प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार ने प्रशासनिक शुल्क को बढ़ाकर 6 प्रतिशत से 9 प्रतिशत कर दिया है। इसके बाद भी इस योजना का विरोध सिर्फ राजनीतिक विद्वेष के कारण किया जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार यह कह रही है कि वीबी-जी राम जी कानून के तहत मनरेगा की मजदूरी कम हो जाएगी। यह भी सरासर झूठ है। वीबी-जी राम जी एक्ट के सेक्शन 10 में स्पष्ट प्रावधान है कि केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित मानदेय किसी भी हालत में मनरेगा से कम नहीं होगा। आपदा राहत और आपदा न्यूनीकरण के लिए भी वीबी-जी राम जी में प्रावधान है। इसका सर्वाधिक लाभ हिमाचल प्रदेश के आपदा-ग्रस्त क्षेत्रों में राहत, पुनर्वास और आपदा न्यूनीकरण के कार्यों में लिया जा सकता है, लेकिन यह हिमाचल सरकार की प्राथमिकता ही नहीं है। सरकार सिर्फ झूठ बोलकर लोगों को गुमराह करते हुए अपना समय काट रही है। सुक्खू सरकार की यह राजनीति प्रदेश के लिए हानिकारक है। 1 जुलाई से वीबी-जी राम जी लागू हो रही है। इसलिए प्रदेश सरकार इस योजना का अधिकतम लाभ उठाने की दिशा में कार्य करे।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मनरेगा की तुलना में वीबी-जी राम जी विकसित भारत के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इस योजना का मकसद केवल काम देना नहीं, बल्कि आजीविका को सशक्त बनाना है। लेकिन इस कानून के बनने के दिन से ही सुक्खू सरकार लगातार अनर्गल बयानबाजी कर रही है और झूठ बोल रही है। जो योजना भ्रष्टाचार को खत्म करने, संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने, कार्यों में पारदर्शिता लाने, सरकार की जवाबदेही तय करने तथा मानदेय के नियमित भुगतान को सुनिश्चित करने के प्रावधान करती है, उसका केवल राजनीतिक कारणों से विरोध करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
पढ़ने के लिए धन्यवाद
आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।