तृप्ति भटनागर
भोपाल | मध्यप्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र के लिए बीता 29 जून एक ऐतिहासिक दिन रहा, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 440 मेगावॉट क्षमता वाली मुरैना सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना के पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) पर औपचारिक हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
यह समझौता नीमच और शाजापुर में हाल ही में लोकार्पित सोलर पार्क्स के बाद प्रदेश की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा को और आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मध्यप्रदेश लगातार नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है, और यह परियोजना उसी दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
मुरैना सोलर प्लस स्टोरेज: ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी क्रांति
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका सोलर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम है, जिसे ऊर्जा क्षेत्र में एक “युगांतकारी मॉडल” के रूप में देखा जा रहा है। इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से दिनभर में एक ही बैटरी का दो बार उपयोग संभव होगा, जिससे बिजली संग्रहण और वितरण की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
यह मॉडल न केवल ऊर्जा दक्षता बढ़ाएगा, बल्कि ग्रिड स्थिरता और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में भारत के ऊर्जा ढांचे को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है।
देश में अब तक की सबसे कम दर पर बिजली उत्पादन
इस परियोजना के तहत बिजली की दर मात्र ₹2.70 प्रति यूनिट तय की गई है, जिसे अब तक की सबसे कम सौर ऊर्जा दरों में से एक माना जा रहा है। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश के ऊर्जा नीति प्रबंधन और निवेश अनुकूल वातावरण को दर्शाती है।
कम दर पर स्वच्छ बिजली उपलब्ध होने से न केवल उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा, बल्कि उद्योगों और कृषि क्षेत्र में भी बिजली लागत कम होने की संभावना है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
मध्यप्रदेश बन रहा ग्रीन एनर्जी का बड़ा केंद्र
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी ग्रीन एनर्जी हब बनाना है। नीमच, शाजापुर और अब मुरैना जैसी बड़ी परियोजनाएं प्रदेश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से ले जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाएं न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और निवेश के अवसर भी प्रदान कर रही हैं। आने वाले समय में प्रदेश में सौर ऊर्जा क्षमता को और तेजी से बढ़ाया जाएगा।
स्वच्छ ऊर्जा और विकसित मध्यप्रदेश की दिशा में बड़ा कदम
इस ऐतिहासिक समझौते को मध्यप्रदेश की ऊर्जा नीति में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। यह परियोजना न केवल तकनीकी रूप से उन्नत है, बल्कि आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुरैना सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना आने वाले वर्षों में प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य 2030 और 2047 के विजन को भी मजबूत आधार प्रदान करेगी।
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