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आधी रात 12 बजे गूंजे ‘जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे, देशभर में धूमधाम से मनाई गई जन्माष्टमी

मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव, भक्तों ने पंचामृत से कराया लड्डू गोपाल का अभिषेक; माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और पंचमेवा का लगाया भोग

Rahul Gupta

नई दिल्ली, 5 सितंबर।

शुक्रवार रात घड़ी में जैसे ही 12 बजे, देशभर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशियां छा गईं। मंदिरों और घरों में घंटे-घड़ियाल बज उठे और ‘जय कन्हैया लाल की’ तथा ‘नंद के घर आनंद भयो’ के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया और एक-दूसरे को जन्माष्टमी की बधाई दी।

दिनभर व्रत रखने के बाद श्रद्धालुओं ने मध्यरात्रि में विधि-विधान से कान्हा का पूजन किया और सुख-समृद्धि की कामना की। जन्माष्टमी को लेकर सुबह से ही घरों और मंदिरों में खास उत्साह देखने को मिला।

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फूलों और रोशनी से सजे मंदिर और घर

भक्तों ने लड्डू गोपाल के लिए नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी और मोरपंख खरीदे। घरों के मंदिरों को फूलों, गुब्बारों और रंग-बिरंगी सजावट से सजाया गया। मंदिरों में भी आकर्षक बिजली की रोशनी और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी झांकियां तैयार की गईं।

शहरों से लेकर गांवों तक कृष्ण जन्मोत्सव को लेकर माहौल भक्तिमय बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचे और मध्यरात्रि तक भगवान के जन्म का इंतजार करते रहे।

12 बजे जन्मे नंदलाल, गूंजे जयकारे

रात 12 बजते ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव शुरू हुआ। मंदिरों में घंटे और घड़ियाल बजने लगे और भक्तों ने जोर-जोर से ‘जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे लगाए। घरों में भी भगवान के जन्म की खुशी मनाई गई।

श्रद्धालुओं ने लड्डू गोपाल का पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक किया और उनका विधि-विधान से श्रृंगार किया। जन्म के बाद बाल गोपाल को नए वस्त्र पहनाए गए। मुकुट, मोरपंख, बांसुरी और आभूषणों से उनका श्रृंगार किया गया। इसके बाद उन्हें सुंदर झूले में विराजमान कर भक्तों ने प्रेमपूर्वक झुलाया। कई स्थानों पर भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़ी आकर्षक झांकियां भी सजाई गईं।

माखन-मिश्री और धनिया पंजीरी का भोग

जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, पंचमेवा, फल और मिठाइयों का भोग लगाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भोग में तुलसी दल शामिल करना शुभ माना जाता है।

पूजा के दौरान भक्तों ने ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप किया। इसके बाद धूप-दीप से भगवान की आरती की गई और प्रसाद वितरित किया गया।

46 मिनट का था निशिता काल पूजा मुहूर्त

जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की मुख्य पूजा निशिता काल यानी मध्यरात्रि में करने का विधान है। इस बार निशिता काल का पूजा मुहूर्त रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहा। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान का अभिषेक, पूजन और आरती की।

5 सितंबर सुबह 6:08 बजे के बाद व्रत पारण

जो श्रद्धालु अगले दिन व्रत का पारण करते हैं, वे 5 सितंबर 2026 की सुबह 6:08 बजे के बाद व्रत खोल सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र समाप्त होने के बाद पारण करना शुभ माना जाता है। हालांकि, अलग-अलग परंपराओं में व्रत खोलने का समय अलग हो सकता है।

जन्माष्टमी पर दीपक जलाने की परंपरा

जन्माष्टमी के दिन घर के पूजा स्थल पर लड्डू गोपाल या भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। शाम के समय तुलसी के पौधे के पास भी घी का दीपक जलाकर परिक्रमा करने की परंपरा है।

इसके अलावा घर के मुख्य द्वार पर संध्या के समय दीपक रखने की भी मान्यता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इससे घर में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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